सियासत : बरखा सिंह अध्यक्ष हैं महिला आयोग की, राय दे रहीं न्यूज चैनल पर

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा सिंह, जिन्हें कल इसकी सुनवाई करना हैं वहाँ टीवी चैनल पर क्यों बैठीं. क्यों अपनी राय दे रही हैं या बोल रही हैं जबकि उन्हें तो आयोग में सुनवाई कर अपना फ़ैसला देना है. क्यों टीवी चैनलों पर बक बक कर रही हैं.

जो महिला कुमार विश्वास पर आरोप लगा रही हैं, वह खुद ही अस्पष्ट हैं. क्या कहना है उस महिला का कि सोशल मिडिया पर उनके और कुमार विश्वास के बारे में, जो आपत्तिजनक बातें कही जा रही हैं, कुमार उसका खंडन करें. कुमार खंडन कर चुके हैं, कर रहे हैं, उसे बहन जैसा बता रहे हैं, महिला भी उन पर अनैतिक संबंधों जैसा आरोप नहीं लगा रही. कुमार विश्वास से वह महिला और उसके पति मिल चुके हैं. फिर मामला क्या है ?

साफ साफ लग रहा है कि कुछ चैनल और लोग जानबूझ कर गंदगी फैला रहे हैं या रोटी जो राजनैतिक ही होती है, सेंक रहे हैं.

क्यों बिना मतलब की मसालेदार चाट परोसी जा रही है? पेनल में बैठी महिलाएँ उस महिला की परेशानी समझ उसके पति को क्यों नहीं समझातीं, जिसने पत्नी को बाहर कर दिया? क्यों नहीं उस महिला के पक्ष में खड़ी होकर अदालत और इसी महिला आयोग का दरवाज़ा उसके पति के विरुद्ध खटखटातीं?

टीवी की बहसों से या उस महिला की टीवी वाली बातों से किसी निर्णय पर नहीं पहुँचा जा सकता. सारी बहस सार हीन थी.

स्पष्ट कर दूँ, उस महिला का विरोधी या कुमार का समर्थक नही हूँ .

जसबीर चावला के फेसबुक वॉल से



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