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ओडिशा में बसंत ऋतु नहीं, सीधे गर्मी का आगमन, 6 जगहों पर तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार

भुवनेश्वर : ओडिशा में इस साल गर्मी का जल्द आगमन हुआ है, क्योंकि फरवरी की शुरुआत में ही कई जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, रविवार को राज्य के छह जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया, जो कि सर्दी के विदा होते ही तेजी से गर्मी के बढ़ने का संकेत है।

राज्य में सबसे अधिक तापमान बोलांगीर में 36.67°C दर्ज किया गया, इसके बाद टिटलागढ़ में 36°C रहा। अन्य स्थानों में तापमान इस प्रकार रहा – पारादीप (35.8°C), सुंदरगढ़ (35.6°C), भुवनेश्वर (35.1°C) और चंद्रबली (35°C)।

आईएमडी के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान इसी तरह ऊंचा बना रहेगा, क्योंकि मौसम में कोई महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना नहीं है। गर्मी के इस असामान्य रूप से जल्दी आगमन के कारण लोगों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा, आईएमडी ने ओडिशा के कम से कम 10 जिलों—बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक, जगतसिंहपुर, खुर्दा, नयागढ़, अंगुल और ढेंकानाल—में घने कोहरे की चेतावनी भी जारी की है, जो अगले दो दिनों तक सुबह के समय दृश्यता को प्रभावित कर सकता है और यातायात में बाधा डाल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, हीटवेव (लू) का खतरा भी बढ़ेगा और कुछ जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर सकता है। ठंड के खत्म होने के साथ ही लोगों को आने वाली भीषण गर्मी के लिए तैयार रहना होगा।

उपरोक्त खबर पर दो टिप्पणियां-

आनंद प्रधान-

इस साल बसंत नहीं आया..! नेरूदा कहते थे कि तुम सभी फूलों को काट दो लेकिन बसंत को आने से नहीं रोक सकते हो।

हम सारे पेड़ काट रहे हैं…कहते हैं कि इस साल अब बसंत नहीं आएगा।..

सोचना कि हम विकास के लिए क्या गँवा रहे हैं?


सौमित्र राय-

जल्द एक दिन ऐसा आएगा,
जब बसंत नहीं होगा
फूल नहीं खिलेंगे
न फूलों की बातें छिड़ेंगी
चेहरे की फूलों सी मिसालें भी नहीं दी जाएंगी
रह जाएंगे तो सिर्फ कांटे
उनकी चुभन, टीस और ज़ख्म से बहता मवाद
चीख–चीखकर बताएगा
कि हमने इस कायनात से प्रेम को खत्म कर दिया
गुलाबों को कोख में ही मार दिया
हमने बेरहमी से जंगलों की हत्या की

ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में वसंत नहीं आया। दुनिया बदतर होती जा रही है।
बस, मैं जा रहा हूं उस जमीन पर, जहां फूल खिलते हैं
लोगों के गाल पर, बागों में बहार होती है
बातों में फूल खिलते हैं

भौंरे की गुनगुन और तितलियों की आमद दिखती है
अब शायद उम्र भर के लिए।

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