यह पूरी व्यवस्था के अनैतिक होने का सबूत है। हटाये गए ये वोटर सिर्फ उन क्षेत्रों के है जहां पहले चरण में मतदान होना है। दूसरे चरण के मतदाताओं के लिए प्रक्रिया नौ अप्रैल तक पूरी होगी।
संजय कुमार सिंह
अमर उजाला और देशबन्धु में बंगाल के लाखों वोटर हटाए जाने की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। देशबन्धु में तो बताया गया है कि अंदर पेज दो पर अमित शाह की खबर है। इसके अनुसार, चुन-चुन कर देश से घुसपैठियों को बाहर करेंगे। घुसपैठियों को मतदाता सूची से बाहर करना अमित शाह और नरेन्द्र मोदी का मुद्दा था। यह काम चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लिया और सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि उसे यह अधिकार है। देश की सर्वोच्च अदालत ने उसके इस अधिकार को स्वीकार किया। मतदाता सूची का विशेष सघन परीक्षण चलता रहा। बंगाल से खबरें आती रहीं कि घुसपैठियों की बजाय लॉजिकल डिसक्रिपेंसी देखी जा रही है। लाखों मतदाताओं को परेशान किया गया। आखिरकार डिजिटल इंडिया में डिजिटल मतदाता सूची नहीं दी गई। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार, एसआईआर के बाद मतदाता सूची से 91 लाख वोटर हटाए गए हैं। हिन्दी के मेरे दूसरे अखबार, अमर उजाला में यह दूसरे पहले पन्ने पर छह कॉलम की लीड है। पहले पन्ने पर विज्ञापन बहुत ज्यादा नहीं हैं फिर भी यह खबर दूसरे पहले पन्ने यानी तीसरे पन्ने पर छह कॉलम की लीड है। पहले पन्ने पर सरकारी प्रचार और सेवा दोनों सबसे ऊपर हे। नारी शक्ति वंदन की जिम्मेदारी है और 45 लाख लोंगों को राहत मिलेगी क्योंकि अनधिकृत बस्तियां नियमित होंगी। जाहिर है यह चुनाव के समय सरकारी प्रचार है और इसकी बात करने का कोई मतलब नहीं है। लीड है तो है। किसी और अखबार में यह खबर पहले पहले पन्ने पर नहीं है। पश्चिम बंगाल में 91 लाख लोग लोग वोट नहीं डाल पाएंगे। उपशीर्षक है, 60 लाख शिकायतों में न्यायिक अधिकारियों को 27.16 लाख मतदाता अवैध मिले। खबर के अनुसार, नाम हटाये जाने की 60.06 लाख शिकायतों की जांच में 45 फीसदी के करीब दावे फर्जी मिले। यह संख्या भी बहुत बड़ी है। जाहिर है, मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग लोगों के नाम हटवाने में लगा हुआ था और गलत आवेदन भी कर रहा था। यह सामान्य नहीं है।
अभी तक मैं यही जानता था कि किसी भी क्षेत्र में सामान्य तौर पर रहने वाले लोगों को मतदाता कहा जाता है। उनमें विदेशी और 18 साल से कम के बच्चे अपवाद होते हैं। नियम बदलने की कोई सूचना या खबर तो नहीं है, फर्जी शिकायत पाए जाने के बावजूद 91 लाख लोग वोट नहीं डाल पाएंगे। इनके विदेशी या घुसपैठिया होने का कोई शक नहीं है तो मतदाता सूची से निकालकर किसी की सेवा की जा रही है। अगर विदेशी हैं तो जहां के हैं वहां भेजा जा सकता है लेकिन भारत के कहने से बांग्लादेश नहीं मान लेगा कि वह बांग्लादेशी घुसपैठिया है। ऐसे में वह भारतीय तो हो ही सकता है। इसलिए मामला मुश्किल है और सोच समझ कर फैसला किया जाना चाहिए या जो विदेशी हैं अथवा भारतीय नागरिक नहीं हैं उन्हें उनके देश भेजा जाना चाहिए पर यह सब नहीं होकर जो हो रहा है उसकी राजनीति समझना मुश्किल नहीं है। किसके फायदे के लिए फयफयद क कौन कर सकता है या हो सकता है – समझना मुश्किल नहीं है। फिर भी सब हुआ तो खबर बड़ी होनी चाहिए थी लेकिन वह भी नहीं है। खासकर हिन्दी के अखबारों में।

अंग्रेजी अखबारों में दि एशियन एज में यह खबर पहले पन्ने पर पांच कॉलम में है। मणिपुर में दो बच्चों की मौत के साथ फायरिंग में तीन लोगों की मौत की खबर लीड है। सबसे गंभीर खबर यह है कि जम्मू और कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया। पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं। खबर के अनुसार दो पाकिस्तानी आतंकी भी पकड़े गए जो फरार चल रहे थे। 19 जगहों पर छापा पड़ा है पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं। अंग्रेजी अखबारों में कोलकाता का टेलीग्राफ न सिर्फ एसआईआर के मामले में स्पष्ट है बल्कि यह भी बताया है कि आधे से ज्यादा नाम अल्पसंख्यक क्षेत्रों से हटाए हैं। आप समझ सकते हैं कि कहा-दिखाया चाहे जो गया हो, हुआ वही है जो भाजपा चाहती थी या जिससे भाजपा को फायदा होगा। द टेलीग्राफ में मणिपुर में हिन्सा की खबर भी है। इंडियन एक्सप्रेस में इसका शीर्षक और स्पष्ट है लेकिन एसआईआर के पीड़ितों की संख्या कम बताई गई है। आप जानते हैं कि मणिपुर में लंबे समय से हिन्सा चल रही है। तनाव और संघर्ष के कई उदाहरण हैं। सरकारी कोशिशों की खबर नहीं के बराबर होती है। ऐसे में एक घर पर रॉकेट जैसी चीज गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई। इसके खिलाफ इलाके के लोगों ने सीआरपीएफ की चौकी को घेर लिया। जहां दो लोगो मारे गए। इंडियन एक्सप्रेस के शीर्षक में 27 लाख वोटर बाहर किए जाने की खबर है जबकि अंदर कुल 89 लाख मतदाता कम होने की खबर है।
पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची से लोगों के नाम कम किए जाने की खबर द हिन्दू में लीड है। शीर्षक के अनुसार, मतदाता 12 प्रतिशत कम हुए हैं और न्यायिक समीक्षा के बाद 27 लाख मतदाता बाहर कर दिए गए हैं। उपशीर्षक में बताया गया है कि एसआईआर शुरू होने के बाद से कुल 91 लाख मतदाता हटाये गए हैं। अखबारों ने यह भी बताया ही है कि सबसे ज्यादा नाम मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद में कटे हैं लेकिन यह उपशीर्षक नहीं है। उदाहरण के लिए, इंडियन एक्सप्रेस का उपशीर्षक है, …. प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा कटौती मतुआ प्रभाव वाले नादिया में हुई है। इंडियन एक्सप्रेस ने एक मुर्शिदाबाद के मजदूर 42 साल के अंतु शेख का विवरण प्रकाशित किया है। इसका शीर्षक है, मैंने 2024 में वोट डाला था… अब पहचान साबित करने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे और भी लोग है। अखबार ने ऐसे 10 लोगों से बात करने का दावा किया है। जाहिर है कि यह अनैतिक है। कई चुनावों में तरह-तरह की गड़बड़ियां करने की शिकायत है लेकिन कार्रवाई किसी में भी नहीं। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, एसआईआर ने बंगाल के मतदाता 12 प्रतिशत कम कर दिए। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है। शीर्षक में ही मुर्शिदाबाद का नाम है। खबरों के अनुसार, यहां 11.01 लाख शिकायतें थीं। इनमें 4,55,137 अवैध मतदाता मिले।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


