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भोपाल के सांध्य दैनिक ‘प्रदेश टुडे’ के मालिक दीक्षित बंधुओं में दरार !

भोपाल : आर्थिक संकट से जूझ रहे यहां के सांध्य दैनिक ‘प्रदेश टुडे’ में इन दिनों मालिक भाइयों अवधेश दिक्षित और हृदेश दीक्षित के बीच दरार पड़ने की खबर है। पता चला है कि इसके पीछे अखबार के सर्वेसर्वा सतीश पिंपले हैं। पिंपले की अखबार में हर जगह दखल है। मन-मर्जी के अलावा पिंपले खुद की कमाई का कोई मौका भी नहीं छोड़ता! 

भोपाल : आर्थिक संकट से जूझ रहे यहां के सांध्य दैनिक ‘प्रदेश टुडे’ में इन दिनों मालिक भाइयों अवधेश दिक्षित और हृदेश दीक्षित के बीच दरार पड़ने की खबर है। पता चला है कि इसके पीछे अखबार के सर्वेसर्वा सतीश पिंपले हैं। पिंपले की अखबार में हर जगह दखल है। मन-मर्जी के अलावा पिंपले खुद की कमाई का कोई मौका भी नहीं छोड़ता! 

‘प्रदेश टुडे’ के एक डायरेक्टर और इंदौर के बड़े कारोबारी राकेश मेहता ने अखबार में और धन लगाने से मना कर दिया! क्योंकि अखबार की करोड़ों की रिकवरी अटकी है। राकेश की बात को अवधेश ने भी सही माना और पिंपले की कार्यशैली पर ऊंगली उठाई। अवधेश के रिकवरी का आदेश देने के बाद खबर है कि हृदेश दीक्षित की अपने बड़े भाई से कहा सुनी भी हुई है।  चर्चा ये भी है कि पिंपले ने अपनी एक फर्म बना रखी है, जो ‘प्रदेश टुडे’ को कागज सप्लाई का काम करती थी। यह मामला भी उजागर हो गया! फिलहाल हृदेश ऑफिस नही आ रहे हैं! दोनों भाइयों में दरार की खबर अखबार द्वारा दो महीने पहले लगाए गए ‘ऑटोमोबाइल शो’ के समय भी सामने आई थी। 

भोपाल और अन्य शहरों में ‘प्रदेश टुडे’ की पहचान अखबार की बजाए ब्लेक मैलिंग के हथियार के रुप में ज्यादा है। पिछले दिनों रैनाल्ट मोटर्स के भोपाल शो रुम पर ‘प्रदेश टुडे’ के कुछ गुंडों ने उत्पात मचाया और सर्विसेज को लेकर कंपनी पर ऊंगली उठाई थी! बात बढने पर अपना प्रभाव दिखाते हुए रेनॉल्ट कंपनी के एमपी हेड संजय सोनी के खिलाफ मामला भी पुलिस में दर्ज कराया। 

इसके पीछे की कहानी ये है कि ‘प्रदेश टुडे’ ने रेनाल्ट के विज्ञापन बगैर किसी अनुमति और आरओ (रिलीस आर्डर) के छापकर बिल कंपनी को भेज दिए थे। संजय सोनी, जो कि पूर्व में दैनिक भास्कर और नईदुनिया के मार्केटिंग हेड रहे हैं, उन्होंने इस पर आपत्ति ली! जब ऐसे विज्ञापनों का पैमेंट अटका तो बात बिगड़ गई। एक और मामला इंदौर के एक बिल्डर की आत्महत्या के मामले में आरोपी बने बिल्डर अश्विन मेहता को लेकर है। आत्महत्या करने वाले बिल्डर ने अपने सुसाइड नोट में मेहता का नाम लिखा है। अश्विन मेहता का पैसा भी ‘प्रदेश टुडे’ में लगा है, पर उसे भी अखबार से कोई मदद नहीं मिली! 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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