मध्यप्रदेश में टीवी पत्रकारिता को सूंघ गया सांप

लगातार टेलीविजन न्यूज़ देखने पर लगा कि मध्यप्रदेश में न्यूज़ 24 के गोविन्द गुर्जर और न्यूज़ नेशन के नीरज श्रीवास्तव एक बेहतरीन पत्रकार के रूप में उभर के सामने आये हैं। पिछले एक बरस से मध्यप्रदेश की टेलीविजन पत्रकारिता को सांप सूंघा हुआ लगता है। खबर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति इसे धीरे धीरे छत्तीसगढ़ की राह पर ले जा रही है। हालात ऐसे ही रहे तो हो सकता है एमपी में 2018 के चुनाव के बाद दिल्ली में बैठे एडिटर मध्यप्रदेश को भी छतीसगढ़ की तर्ज पर ख़बरों के नजरिये से ड्राय स्टेट मान लें।

तमाम मित्र इस इलाके मध्यक्षेत्र में टीवी पत्रकारिता कर रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के नेशनल टीवी न्यूज़ रिपोर्टरों की दृष्टि से बीता साल 2016 ठीक नहीं कहा जा सकता। इस दरम्यान कोई रिपोर्टर ख़ास और बड़ी खबर नहीं कर पाया। जिससे उसे राष्ट्रीय परिदृश्य पर पहचाना जाए। एक दो ख़बरें हुईं भी तो टेलीविजन रिपोर्टर उसमे सिर्फ लकीर पीटते नजर आये क्योंकि वेब मीडिया के मित्र उन ख़बरों पर उनसे पहले ही जम के खेल चुके थे। अब से पहले होता ये था कि पहले खबर और विज्युअल या फोटोग्राफ टीवी के पास होते थे और बाद में वेब ,सोशल और प्रिंट मीडिया के पास पहुँचते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा। अब बाजी वेब मीडिया मार रहा है, प्रिंट मीडिया मार रहा है और टीवी का बड़ा और महान माने जाने वाला रिपोर्टर सिर्फ उनकी बासी खबर चैनल पर चलवा के अपनी नौकरी बचाता प्रतीत होता है। ऐसे में टीवी रिपोर्टरों को ani के रिपोर्टर भी बड़ा झटका देते नजर आते हैं। उनकी तेजी के सामने कई बड़े -बड़े टीवी पत्रकार पानी भरते नजर आ रहे हैं।

समीक्षा करना, सवाल उठाना मेरी आदत है, उसके मुताबिक मैंने पाया कि पिछले कुछ सालों में मेरे [ins, इण्डिया टीवी], तब आजतक के राजेश बदल, अमित कुमार दीप्ती चौरसिया, तब ज़ी न्यूज़ के राजेन्द्र शर्मा, तब न्यूज़ 24 के प्रवीण दुबे, स्टार [बाद में एबीपी] के बृजेश राजपूत ndtv की रुबीना खान बाद में सिद्धार्थ दास के बीच एक अघोषित मुकाबला था कि कौन बड़ी खबर करता है कौन सबसे पहले खबर करता है, तबके आईबीएन 7 के मनोज शर्मा का जिक्र इसलिए नहीं कर रहा हूँ कि वे उस दौर में ही खबर करने की तासीर खो कर इस मुकाबले से खुद ही बाहर हो चुके थे। आईबीएन 7 लोड लेने का विषय नहीं था। इस अघोषित कॉम्पटीशन में हम सब एक से बढ़कर एक ख़बरें सामने लाते थे। ख़बरें भी ऐसीं की जिनसे जनता का, समाज का भला तो होता ही था ,सरकार को घेर कर कटघरे में खड़ा कर देते थे। कौन खबर करता है यह उस समय  बहुत महत्वपूर्ण नहीं था ,महत्वपूर्ण यह था कि खबर पहले टीवी पर प्रसारित हुई और बाद में प्रिंट या वेब मीडिया की हैडलाइन बनी। अब मध्यप्रदेश /छत्तीसगढ़ के टीवी रिपोर्टर्स में उस कॉम्पटीशन का अभाव साफ़ नजर आता है।

ऐसे में अगर नेशनल न्यूज़ चैनल की बात करें तो सबसे अलग अलग तरह की ख़बरों को स्वीकार करने और उसे टेलीकास्ट करने का सर्वाधिक माद्दा इंडिया टीवी में हैं लेकिन उनके रिपोर्ट पुष्पेंद्र वैद्य सिवाए भर्ती की ख़बरें और ऊपर से मिले असाइनमेंट के आलावा कुछ नहीं कर पाए। उनके कारण इस इलाके में इण्डिया टीवी का भट्टा ही बैठ गया है। चैनल को इस इलाके में नंबर बढ़ाने के लिए अब ख़बरों के भरोसे नहीं नेटवर्किंग टीम के भरोसे काम करना पड़ रहा है।

दूसरे बड़े चैनल आजतक का एमपी /सीजी में नाम ही काफी है। आज तक अपने नाम और ब्रांड के दम पर सबका विश्वसनीय है ,काम करने वाला फिर अमित कुमार हो या हेमेंद्र शर्मा इससे आजतक की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कई लोग वहां आये गए होते रहते हैं।

तीसरे बड़े चैनल में शुमार एबीपी न्यूज़ पिछले कुछ समय से खुद को ही आगे नहीं रख पा रहा है ,दर्शकों को आगे कैसे रखे । एक उम्दा रिपोर्टर बृजेश राजपूत चैनल की शुरुवात से जुड़े हैं। लंबे अरसे बाद उन्हें भी नहीं सूझता है कि खबर के नाम पर क्या करें ?या वो खुद को दोहराना नहीं चाहते। बहरहाल जो भी हो एबीपी की पकड़ दर्शकों पर लगातार कमजोर हुई है और दर्शकों ने फ़िलहाल इस एबीपी न्यूज़ को पीछे रख दिया है।

नेशनल न्यूज़ चैनल के मध्य क्षेत्र में ठन्डे रवैये के बीच ndtv का भोपाल दफ्तर बंद होने का फरमान जाहिर करता है सब कुछ ठीकठाक नहीं है। ऐसे में इस इलाके के दो रिपोर्टर न्यूज़ 24 के गोविन्द गुर्जर और न्यूज़ नेशन के नीरज श्रीवास्तव ने बीते साल शानदार और ख़ास ख़बरें कीं। वो ख़बरें जिनकी टेलीविजन और दर्शक दोनों को जरुरत होती है। न्यूज़ नेशन और न्यूज़ 24 नंबर गेम में जहाँ भी हों लेकिन खबरदारी जोरदार की। न्यूज़ 24 में गोविन्द गुर्जर की ख़बरें भी एक वजह बनी की उसे अब मध्यप्रदेश में दर्शकों की कमी नहीं है।

लेखक अनुराग उपाध्याय भोपाल के वरिष्ठ और तेजतर्रार टीवी पत्रकार हैं.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मध्य प्रदेश सरकार ने छल वेबसाइटों को 4 साल में दिए 14 करोड़ के सरकारी विज्ञापन, इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित की रिपोर्ट

वरिष्ठ पत्रकार श्याम लाल यादव की रिपोर्ट में खुलासा, पत्रकारों और उनके रिश्तेदारों की ओर से संचालित की जा रही हैं वेबसाइट, 10 हजार रूपए से लेकर 21 लाख 70 हजार रुपए तक विज्ञापन दिए गए, कांग्रेसी विधायक बाला बच्चन ने विधानसभा में उठाया था सवाल

-दीपक खोखर-

भोपाल, 10 मई। मध्य प्रदेश में 4 साल के दौरान 244 छल वेबसाइटों को 14 करोड़ रूपए के सरकारी विज्ञापन दिए गए। इनमें से ज्यादातर वेबसाइट पत्रकारों और उनके रिश्तेदारों की ओर से संचालित की जा रही हैं। इन वेबसाइट को वर्ष 2012 से वर्ष 2015 के बीच 10 हजार रूपए से लेकर 21 लाख 70 हजार रूपए के विज्ञापन दिए गए। इंडियन एक्सप्रेस ने इस बारे में सोमवार 9 मई के अंक में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। वरिष्ठ पत्रकार श्याम लाल यादव की रिपोर्ट में यह तमाम खुलासे हुए हैं। दरअसल कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने विधानसभा में सवाल उठाया था। जिसके बाद उन्हें दिए गए जवाब में तमाम जानकारी हासिल हुई।

इंडियन एक्सप्रेस हमेशा ही अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए अलग पहचान रखता है और इस रिपोर्ट में भी इस प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने बेहतरीन पत्रकारिता का नमूना पेश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 26 वेबसाइट को 10 लाख रूपए से ज्यादा के विज्ञापन जारी किए गए। जिनमें से 18 वेबसाइट पत्रकारों के रिश्तेदारों द्वारा संचालित की जा रही हैं। 81 वेबसाइट को 5 से 10 लाख रूपए के विज्ञापन दिए गए। 33 वेबसाइट तो ऐसी हैं जो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भोपाल में आवंटित भवन से संचालित हो रही हैं। एक बात और जिस वेबसाइट को सबसे ज्यादा 21 लाख 70 हजार रूपए मिले हैं, वह अश्वनी राय के नाम से हैं, जो भाजपा के एक पदाधिकारी के कार्यालय में काम करते हैं। राय स्पष्टीकरण देते हैं कि वे भाजपा के लिए काम करते हैं, लेकिन वेबसाइट से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

वेबसाइट अलग-अलग नाम से, सामग्री एक समान

यहीं नहीं खास बात यह है कि कई वेबसाइट अलग-अलग नाम से हैं, लेकिन उन सबमें सामग्री एक ही है। ज्यादातर वेबसाइट ने तो अपने बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी है। इस बारे में पूछे जाने पर मध्य प्रदेश के जनसंपर्क विभाग के आयुक्त अनुपम राजन कहते हैं यह न्यू मीडिया है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इन्हें कौन संचालित कर रहा है। हालांकि साथ ही वे कहते हैं कि अपनी विज्ञापन पॉलिसी में बदलाव कर रहे हैं और यह देखा जा रहा है कि वेबसाइट चल रही है या नहीं। उधर, विधायक बाला बच्चन का सीधे तौर पर आरोप है कि भाजपा से जुड़े लोगों को ही फायदा पहुंचाया गया, जबकि वास्तविक पत्रकार की वेबसाइट को ही विज्ञापन मिलने चाहिए।

विस्तृत जानकारी के लिए इंडियन एक्सप्रेस की मूल खबर की कटिंग उपर अपलोड किया गया है. इसी मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस ने एक अन्य खबर भी प्रकाशित की है जो नीचे है. पढ़ने के लिए नीचे की न्यूज कटिंग पर क्लिक कर दें ताकि अक्षर साफ साफ पढ़ने में आ सकें.

दीपक खोखर की रिपोर्ट. संपर्क- 09991680040

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पिछलग्गू बने एमपी के प्रमुख हिंदी अखबारों ने इस मुद्दे पर कलम चलाने का दुस्साहस नहीं दिखाया

नए मंत्रालय की घोषणा कर खुशियों का दिवास्वप्न दिखाते मुख्यमंत्री शिवराज….मान गए.. क्या नायाब तरीका खोज निकाला है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अपनी रिआया को खुशहाल बनाने का.. खुशियाँ बांटने के लिए हैप्पीनेस मंत्रालय खोलने की घोषणा कर डाली। इसे घोषणा वीरता के लिए बदनाम मुख्यमंत्री का गरीब जनता के साथ एक और क्रूर मज़ाक नहीं तो क्या कहें..? यह तो हो नहीं सकता कि मुख्यमंत्री को यह इल्म न हो कि महज मंत्रालय खोल देने से खुशहाली लाना मुमकिन नहीं..! यदि यही खुशहाली लाने का रामबाण होता तो उनसे ज्यादा सयाने नेता प्रधानमंत्री मोदी मुख्यमंत्री रहते कम से कम गुजरात मे तो इसे आजमा ही चुके होते..!

कुल मिलाकर यह जनता को भरमाने का शिगूफ़ा ही नजर आता है कि सरकार उनकी खुशहाली के लिए चिंतित है और लगातार कुछ ना कुछ करती ही रहती है. ऐसी ही लोक लुभावनी घोषणा 40-45 साल पहले तब के मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्यामाचरण शुक्ल ने भी की थी। उन्हें भी रातोंरात भिखारियों के कल्याण की सूझी और गांधी जयंती के शुभदिन एक सरकारी आदेश के द्वारा पूरे प्रदेश में [तब छत्तीसगढ़ नहीं बना था] भीख मांगने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

यदि सिर्फ कानून बना देने और नया विभाग खोल देने भर से खुशहाली आती तो अनुसूचित जाति/ जनजाति विभाग, महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण विभाग, किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग तथा इनके अधीन काम करने वाले ढेरों निगम, मण्डल और आयोगों के मार्फत इन तबकों और क्षेत्रो मे गज़ब की खुशहाली आ चुकी होती. प्रदेश में सरकारी स्कूल-कालेजों और सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा से सब वाकिफ हैं और किसानों द्वारा ख़ुदकुशी की घटनाएँ आम हैं। बलात्कार में मध्यप्रदेश सबसे ऊपर है और महिलाओं तथा बच्चों के गायब होने और उनकी तस्करी मे भी पीछे नहीं है.. यह किसी विरोधी नेता का आरोप या मीडिया की खबर नहीं बल्कि खुद राज्य के गृहमंत्री ने विधानसभा में जानकारी दी है।

नया मंत्रालय बनाने का सीधा मतलब नए मंत्रियों और अफसरों के लिए काम का बंदोबस्त, बंगला-गाड़ी नौकर-चाकर,एसी ऑफिस और देर सबेर इनके तहत बनने वाले निगम-मण्डल मे चुके हुए नेताओं का पुनर्वास होता है.. अफसोस है पूरी तरह सरकार के पिछलग्गू बन चुके प्रदेश के प्रमुख हिन्दी अखबारों ने इस मुद्दे पर भी कलम चलाने का दुस्साहस नहीं दिखाया. उनके संपादकीय राहुल गांधी के बयान, चीन के दुराग्रह और कोलकाता की दुर्घटना का ही पोस्टमार्टम करने में व्यस्त रहे.

भोपाल से श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

इस प्रकार का महिमामंडन अफसरों का दिमाग खराब कर अहंकारी बनाने में भरपूर योगदान देता है

भोपाल नगर निगम में जबसे तेजस्वी नायक के बाद छवि भारद्वाज के आयुक्त बनने की खबर आई है भोपाल के मीडिया का फोकस उन पर आ गया है। उनकी तैनाती की खबर फोटो के साथ छपी और अगले दिन फोन पर लिया गया मिनी इंटरव्यू फोटो के साथ छपा। इसके अगले दिन उनके कार्यभार ग्रहण करने के दिन की सूचना देने वाली खबर फिर फोटो के साथ छपी और फिर कार्यभार संभालने की खबर भी फोटो.

इस प्रकार का महिमामंडन अफसरों का दिमाग खराब करने और उन्हे अहंकारी तथा प्रचारप्रेमी बनाने मे भरपूर योगदान देता है। क्या आयुक्त का पद ग्रहण करना इतना बड़ा कार्यक्रम था कि उसमें महापौर मौजूद रहते। क्या यह वाकई खबर थी? तब तो हर चीफ़ सेक्रेटरी के पद ग्रहण करते समय मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के पद ग्रहण करते समय गृहमंत्री के मौजूद ना रहने पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए. नोट कर लीजिए, ऐसी ही मीडियाबाजी होती रही तो वह दिन भी दूर नहीं.

ऐसा नहीं है कि भास्कर और अन्य अखबारों द्वारा नए आयुक्त की बेजा पब्लिसिटी की वजह उनका महिला होना या कोई विशेष उपलब्धि उनके खाते में दर्ज होना है। दरअसल राजधानी का नगर निगम और उसके आयुक्त का पद है ही ऐसा है जहां कारोबारियों और धंधेबाजों को आए दिन हाजरी बजानी पड़ती है। भोपाल के लगभग सभी पुराने मीडिया मालिक दूसरे कारोबारों मे उतर कर उसे प्रमोट करने के लिए अपने रुतबे का बेजा इस्तेमाल करते रहते हैं। यह बात दीगर है की कुछ कामयाब हैं तो कुछ बिकने की हद तक बर्बाद हो चुके हैं। जो कामयाब हैं वे सौ करोड़ गरीबों के देश में सकारात्मक खबरों के नाम पर हकीकत से मुँह चुराते नजर आते हैं।     

इन कामयाब मालिकों की देखा-देखी भोपाल के बहुत से बिल्डर आदि कारोबारी पत्रकारिता का दोहन करने के लिए मीडिया मे घुस आए हैं। इसलिए भोपाल के सभी छोटे-बड़े दैनिक और लोकल चैनल अब पत्रकारिता तो क्या खाक करते, बस ये मालिकों के कारोबारी हितों का मुखौटा भर बन कर रह गए हैं। उनके लिए तेजस्वी नायक या छवि भारद्वाज के बजाय आयुक्त का पद ज्यादा माने रखता है। जब तेजस्वी नायक से उल्लू सीधा नहीं हुआ तो नेताओं की आड़ में उनके खिलाफ हो गए थे।

भोपाल से श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

रवीन्द्र जैन, प्रदीप जोशी, उपमिता वाजपेयी, अनिल माथुर, संगीता प्रणवेन्द्र को श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार

बांसवाडा (राजस्थान)। पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य और समर्पित योगदान के लिए ‘अग्निबाण’ भोपाल के संपादक रवीन्द्र जैन, प्रदीप जोशी, उपमिता वाजपेयी, संगीता प्रणवेन्द्र, अनिल माथुर को प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार 2015 देने की घोषणा हुई है। यह पुरस्कार पूज्य मुनि श्री पूज्यसागर महाराज की प्रेरणा से धार्मिक श्रीफल परिवार ट्रस्ट द्वारा प्रति वर्ष प्रदान किया जाता है। 

धार्मिक श्रीफल परिवार के पुरस्कार संयोजक भरत जैन इन्दौर ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि इस बार श्री भट्टारक चारुकीर्ती श्रवणबेलागोला की स्मृति में श्रीफल जैन पत्रकारिता पुरस्कार अग्निबाण भोपाल के संपादक रवीन्द्र जैन को प्रदान किया जाएगा। उनके अलावा कर्पूर चंद्र कुलिश स्मृति पुरस्कार सूरत में राजस्थान पत्रिका के संपादक प्रदीप जोशी को, भगवान बाहुबली स्मृति पुरस्कार दैनिक भास्कर के नेशनल रूम में कार्यरत उपमिता वाजपेयी को, उल्लेखनीय पत्रकारिता पुरस्कार इंडिया न्यूज जयपुर की संवाददाता श्रीमती संगीता प्रणवेन्द्र को, आचार्य अभिनंदन सागर स्मृति पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार अनिल माथुर को दिया जाएगा। सम्मान समारोह 23 अगस्त को बांसवाड़ा राजस्थान में उपाध्याय श्री अनुभव सागर जी महाराज एवं मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा। पुरस्कार समारोह में सम्मानित होने वाले पत्रकारों को शॉल, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि उत्कृष्ट और समर्पित पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। पूर्व में हिन्दी और अंग्रेजी के अनेक जाने-माने पत्रकार और फोटो पत्रकार यह सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। पुरस्कार का निर्णय पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के आधार पर श्रीफल परिवार और वरिष्ठ पत्रकारों की टीम करती है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पुष्पेन्द्र पाल के माखनलाल विश्वविद्यालय से जाने से छात्रों में गहरी टीस, वीसी से नफरत

पुष्पेन्द्र पाल  सिंह  के बच्चों  की दुनिया  और  क्लास रूम से दूर चले जाने को सिर्फ वही  समझ सकता है, जो उनसे पढ़ा हो या जो उनको करीब से जानता हो। रवीश कुमार जब अपने लेख ‘कभी रवीश कुमार मत  बनना’ में मीडिया और कम्युनिकेशन शिक्षा के दुर्गति की बात करते हैं तो अनायास ही आँखों के सामने अपना माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय घूमने लगता है। कैसे एक कुलपति (कुलनाशपति) किसी अच्छे शैक्षणिक संस्थान को बर्बाद करता है, इसको हम लोगों ने बड़े क़रीब से देखा है। 

रवीश  कुमार जब लिखते हैं कि देश में मीडिया और कम्युनिकेशन के बहुत कम अच्छे शिक्षक हैं तो आँखों के सामने पुष्पेन्द्र सर और आनंद प्रधान सर का चेहरा और उनकी वर्तमान स्थिति बेचैन करने लगती है। आज के समय में भी पुष्पेन्द्र सर के दो-ढाई घंटे के क्लास को बच्चे पूरी तन्मयता के साथ करते हैं। उनकी  पढ़ाई हुई  चीजें  चाहे वो लिस्निंग हो  या  कम्युनिकेशन के सिद्धांत या उस आदमी का भी भला करो जो आपका बुरा सोच रहा है, कभी भूलती नहीं हैं। वे खुद अपने आप में एक चलते-फिरते क्लास रूम हैं।

पुष्पेन्द्र  सर का  क्लास रूम से दूर चले जाना बच्चों  का वो नुकसान है, जिसका वो अंदाजा भी नहीं लगा पायेंगे। कुलपति ने पुष्पेन्द्र सर को ठिकाने लगा के विश्वविद्यालय की रही सही कसर भी पूरी कर दी। आनन्द प्रधान सर की स्थिति भी किसी से छुपी नहीं है। उनका जाना किसी व्यक्ति या विचारधारा की जीत नहीं, बच्चों  की हार  है। जानने और करने के बाद लगा की कम्युनिकेशन क्या फिल्ड है  और उसे जानने के लिए पुष्पेन्द्र सर जैसे शिक्षकों की जरुरत वैसे ही है, जैसे शरीर में खून की। नई दुनिया, धर्मयुग के स्वर्णिम दौर से लेकर भास्कर के उदय की कहानी से होते हुए विदेशी विवि के जर्नलिज्म विभागों की आँखों देखी कहानी अब वैसे कोई नहीं बताएगा।  

सबकी कहानियाँ मोटा मोटी  एक सी ही हैं। माखनलाल के कुलपति के कारनामों पे अगर किताब लिखी जाये तो वो 600 पेज भी पार कर जाये। राज्य सभा जाने का ख्वाब देखने वाले कुलपति कुठियाला के खासमखास हो या उसके द्वारा फर्जी भर्ती किये गए गुर्गो का गिरोह हो, उनको एक बात याद रखनी चाहिए। किसी लकीर को छोटा करने के लिए उससे बड़ी लकीर खींचनी पड़ेगी। उसको मिटा के छोटा करने के लिए तो चम्पुओं चापलूसों की उम्र भी छोटी पड़ेगी।

प्रशांत मिश्र (इस साल माखनलाल से पासआऊट छात्र) से संपर्क : 9826181687

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आडियो टेप से खुला प्रभु झिंगरन की भर्ती का राज, बैकडेट में दिया इस्तीफा

भोपाल/लखनऊ : अपराध करने के बाद सरकारी अफसर किस तरह से अपनी पीठ थप-थपाते हैं, यदि यह जानना है तो केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान के संयुक्त निदेशक आरबी शिवगुड़े की बातचीत का आडियो टेप सुनना होगा। इस आडियो टेप से पता चलता है कि डेढ़ साल पहले उन्होंने किस तरह से रिश्वत लेने के मामले में आरोपी को संस्थान में नियुक्त कर दिया था। जब इस बात की पोल खुली तो उन्होंने बैकडेट में इस्तीफा लेकर मामले को दबा दिया। डेढ़ साल बाद अपनी पीठ थप-थपा रहे अधिकारी का आडियो टेप हाथ लगा है।

दरअसल कोई डेढ़ साल पहले केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान में संविदा भर्तियां हुई थीं, जिसमें मीडिया परामर्शदाता, असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसमें अनेक आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनकर्ताओं में से एक लखनऊ के प्रभु झिंगरन का आवेदन भी शामिल था। जिस दिन आवेदनकर्ताओं को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया, उस दिन प्रभु झिंगरन भोपाल नहीं आ सके। साक्षात्कार लेने वाली समिति ने संयुक्त निदेशक आरबी शिवगुड़े के निर्देश पर साक्षात्कार निरस्त कर दिए। 

निरस्त करने का कारण बताया कि एक भी आवेदनकर्ता पद के लिए उपयुक्त नहीं था। पुन: साक्षात्कार हुआ और प्रभु झिंगरम की नियुक्ति कर दी गई। प्रभु झिंगरन तीन दिन संस्थान में कार्य करते हुए दिखाई दिए। इसके बाद वह लखनऊ चले गए। जब वह कई दिनों तक संस्थान में कार्यस्थल पर दिखाई नहीं दिए तो संयुक्त निदेशक से उनके संबंध में पूछा गया। निदेशक ने कहा कि प्रभु लखनऊ से ही काम कर रहे हैं। 

इसके बाद जब यह खबर सामने आई कि 10 साल पहले एक मामले में प्रभु झिंगरन को सीबीआई विशेष न्यायालय ने सजा सुना दी है, तब आनन-फानन में संयुक्त निदेशक आरबी शिवगुड़े ने उनसे बैकडेट में इस्तीफा ले लिया। इस इस्तीफे में प्रभु ने वेतन नहीं देने की भी बात लिखी। इसकी जानकारी मुख्यालय एनसीआरटीई को नहीं दी गई। इस जानकारी को छुपा कर अवैध नियुक्ति मामले में उस समय संयुक्त निदेशक शिवगुड़े ने लाभ लिया।

एक आडियो टेप में संयुक्त निदेशक आरबी शिवगुड़े अपनी करतूत खुद ही बयान कर रहे हैं। उन्होंने बताया है कि एक अखबार में प्रकाशित खबर के बाद उन्होंने तत्काल प्रभु झिंगरन को फोन लगाया। उस समय तक उनकी जमानत हो गई थी। फोन पर संयुक्त निदेशक ने कहा कि वह उनकी नियुक्ति के मामले में उलझ गए हैं, क्या किया जाए, तब प्रभु ने उधर से कहा कि डोंट-वरी मैं बैकडेट में अपना इस्तीफा आपको भेज देता हूं, जिसमें मैं, वेतन नहीं चाहिए भी लिखता हूं। इसी बैक डेट के इस्तीफे की वजह से संयुक्त निदेशक आरबी शिवगुड़े उस समय बच गए थे।

संयुक्त निदेशक शिवगुड़े के साथ प्रभु झिंगरन अपने संबधों के कारण नियुक्ति के प्रति इस सीमा तक आश्वस्त थे कि केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान द्वारा उनकी मीडिया परामर्शदाता के रूप में नियुक्ति के पूर्व, संस्थान द्वारा आयोजित उनकी पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने मंच से खुलकर बोला कि वे संस्थान में भविष्य में क्या-क्या करेंगे। 

आखिर, संयुक्त निदेशक रिश्वत लेने वाले प्रभु झिंगरन पर इतने मेहरबान क्यों थे? यदि संस्थान को मीडिया परामर्शदाता के रूप में प्रभु की ही नियुक्ति करना थी तो पद का विज्ञापन और साक्षात्कार क्यों लिए गए। दरअसल संयुक्त निदेशक आरबी शिवगुड़े और सीबीआई द्वारा रिश्वत के आरेाप में गिरफ्तार किए प्रभु झिंगरन के बीच गहरी दोस्ती है। दोनों एनआईटीटीईआर भोपाल में एक साथ दो-तीन साल पदस्थ थे। दोनों के बीच नजदीकी संबध होने के बाद भी संयुक्त निदेशक शिवगुड़े को प्रभु के रिश्वत मामले की जानकारी कैसे नहीं हो सकती?

एक सजायाफ्ता अपराधी और सरकारी अफसर की सांठगांठ देखिए कि बैक डेट में इस्तीफा देने पर प्रभु को ये अफसर भला आदमी बता रहा है। आरबी शिवगुड़े इस ऑडियो टेप में यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि प्रभु बहुत भला आदमी है। उसने बैकडेट में इस्तीफा दिया और वेतन भी नहीं लेने को लिखा। 

आरबी शिवगुड़े भर्तियों के मामले में नियमों का पालन नहीं करते हैं। उनकी भूमिका शुरू से ही संदिग्ध रही है। हाल ही में इसी पद मीडिया परामर्शदाता के लिए साक्षात्कार के लिए चयन हुए आवेदनकर्ताओं के नामों में साक्षात्कार के ठीक पहले चंद्रिका पांडे नाम जोड़ा गया। जबकि चयन सूची में यह नाम नहीं था।

वर्ष 2004 में प्रभु झिंगरन लखनऊ दूरदर्शन केंद्र के निदेशक थे, इस दौरान उन्होंने धारावाहिक निर्माता विशाल चतुर्वेदी से चैनल पर उनका धारावाहिक प्रसारित करने के लिए दो लाख रुपए रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत विशाल चतुर्वेदी ने सीबीआई से की थी। विशाल की शिकायत पर सीबीआई ने प्रभु झिंगरन को उनको डालीबाग कालोनी स्थित उनके आवास से दो लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इस मामले में ही प्रभु को 17 फरवरी 2014 को सीबीआई की विशेष आदालत ने तीन साल की सजा और एक लाख दस हजार जुर्माना अर्थदंड का फैसला सुनाया था। इस दौरान ही प्रभु झिंगरन भोपाल स्थित केन्द्रीय व्यवसायिक शिक्षा संस्थान में पदस्थ थे और बकौल संस्थान के संयुक्त निदेशक, वह लखनऊ में रहकर काम कर रहे थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल कुष्ण छिब्बर कहते हैं कि सीबीआई जैसी जांच ऐजेसी द्वारा रिश्वत के इतने बड़े मामले में गिरफ्तारी के बाद नियुक्ति असंवैधानिक है। इस तरह के आरोपी की किसी सरकारी संस्था में नियुक्ति नहीं की जा सकती।

लेखक श्रवण मवई से संपर्क : shrawanmavai@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया को लेकर वन-टू-वन चर्चा करेगा मध्य प्रदेश श्रम विभाग

भोपाल : सुप्रीम कोर्ट के 28 अप्रैल के आदेश के बाद मध्यप्रदेश श्रम विभाग मजीठिया को लेकर रिपोर्ट तैयार करने में लगा हुआ है। 

इसी क्रम में विगत दिवस इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) नई दिल्ली से संबद्ध भोपाल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष सलमान खान के साथ एक प्रतिनिधिमंडल ने विगत दिवस इंदौर में श्रम आयुक्त केसी गुप्ता से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने श्रम आयुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें बताया गया कि प्रदेश के प्रमुख अखबार दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया/ नवदुनिया, दैनिक जागरण एवं अन्य किसी भी अखबार में मजीठिया की अनुशंसाएं लागू नहीं की गई हैं। इसके अलावा यहां मजीठिया की मांग करने वालों पर प्रताड़ना की कार्रवाई जारी है। 

यूनियन ने मजीठिया की वास्तविक स्थिति को लेकर अब तक पत्रकार और गैर पत्रकार साथियों का पक्ष विभाग द्वारा नहीं सुने जाने पर भी अपनी नाराजगी दर्ज कराई, जिस पर उन्होंने आने वाले दिनों में मजीठिया को लेकर कर्मचारियों से वन-टू-वन चर्चा करने का आश्वासन दिया है। श्रमायुक्त से हुई लंबी चर्चा के दौरान इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए याचिकाकर्ताओं ने भी अपना पक्ष उनके समक्ष रखा।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सीएम शिवराज ने किया ‘सुबह सवेरे’ के नव-कलेवर अंक का विमोचन

भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को भोपाल में दैनिक ‘सुबह सवेरे’ के नव-कलेवर अंक का विमोचन किया। मुख्‍यमंत्री ने कहा कि कुछ सनसनीखेज बनाने की होड़ में रचनात्मक और सकारात्मक पत्रकारिता कहीं पीछे छूट गई है। जबकि रचनात्‍मक और सकारात्‍मक पत्रकारिता के माध्यम से ही देश, प्रदेश और समाज की सेवा की जा सकती है।

‘सुबह सवेरे’ के नव-कलेवर अंक का विमोचन करते मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह एवं अन्य

उन्‍होंने कहा कि पत्रकारिता रहस्‍य, रोमांच, सस्‍पेंस इससे थोड़ा हटकर हो और जो वास्‍तव में खबर है, वो लोगों तक पहुंचे। खबर के साथ साथ यह सोच भी हो कि हम पत्रकारिता के माध्‍यम से अपने प्रदेश, देश और जनता की भलाई में क्‍या योगदान कर सकते हैं। मीडिया ओपीनियन मेकर है। लोग खबरें पढ़कर अपना दिमाग भी बनाते हैं, अगर एक धारा ऐसी पैदा हो, जो समाज को रचनात्‍मक दिशा में ले जाए तो मैं समझता हूं कि देश और समाज के लिए यह सबसे बड़ी सेवा, बड़ा योगदान होगा। मुझे पूरा विश्‍वास है कि उमेश त्रिवेदी और उनकी पूरी टीम मिलकर इस अखबार को उस दिशा में ले जाएगी, जो दिशा केवल अखबार के लिए नहीं होगी, जनता के लिए भी होगी, प्रदेश के लिए भी होगी, मानवता के लिए भी होगी। खबरें देना तो अखबार का काम है, लेकिन जो खबर है, वह तथ्‍यों के साथ दी जानी चाहिए। 

सुबह सवेरे में हम खबरों के साथ जाने माने लेखकों के विचारों से भी अवगत होंगे और एक विचार मंथन का प्रवाह भी ये अखबार प्रारंभ करेगा। विचारधाराओं का अंतर हो सकता है। लेकिन अपने विचार प्रामाणिकता के साथ अगर कोई लिखता है और उस दिशा में तथ्‍यों और प्रामाणिकता के साथ यदि कोई लिखता है तो वो विचार सच में क्रांति ला सकता है। आप सर्कुलेशन की दौड़ में मत पड़िए। आप तो गुणवत्‍ता की दौड़ में सबसे आगे निकलिए। उसमें यदि आगे निकले तो समाज की बेहतरी का रास्‍ता खोल सकते हैं। मैं अखबर को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

मुख्‍यमंत्री ने अखबार की वेबसाइट subahsaverenews.com को भी लांच किया। इस अवसर पर जनसंपर्क एवं खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल और आयुक्त जनंसपर्क अनुपम राजन भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सुबह सवेरे के प्रधान सम्पादक उमेश त्रिवेदी ने समाचार-पत्र के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर समाचार-पत्र के राज्‍य संपादक गिरीश उपाध्‍याय, वरिष्‍ठ संपादक अजय बोकिल, स्थानीय संपादक पंकज शुक्ला, इंदौर के प्रभारी हेमंत पाल एवं सुबह सवेरे परिवार के सदस्‍य मौजूद थे। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

नई शैली का नया अखबार ‘सुबह सवेरे’ जल्द ही भोपाल से

अपनी तरह की नई शैली की पत्रकारिता वाले हिंदी अख़बार ‘सुबह सवेरे’ की भोपाल में री-लॉन्चिंग की तैयारी है। 2003 से भोपाल से प्रकाशित हो रहे इस अख़बार को अब जाने-माने पत्रकार उमेश त्रिवेदी अपने बैनर पर पाठकों के सामने ला रहे हैं। 

करीब चार दशकों तक ‘नईदुनिया’ से जुड़े रहे और संपादक रहे त्रिवेदी अपने राजनीतिक लेखन और विशेष तरह की साक्षात्कार शैली के लिए लोकप्रिय रहे हैं। ‘सुबह सवेरे’ को भी वे नए रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव अख़बार के मास्टहेड को लेकर किया जा रहा है, जो वर्टिकल है। संभवतः ‘सुबह सवेरे’ देश का पहला ऐसा दैनिक अखबार होगा जिसका मास्टहेड वर्टिकल है। कंटेंट को लेकर भी ख़ास रणनीति बनाई गई है। अखबार में राजनीतिक और प्रशासनिक ख़बरों को प्राथमिकता के साथ समीक्षा रूप में छापने का फैसला किया गया है। इस कारण इसे अन्य अखबारों से कुछ अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। 12 पेज के ‘सुबह सवेरे’ का लक्ष्य ऐसे पाठकों की अखबारीय भूख की पूर्ति करना है, जो रोजमर्रा की ख़बरों से अलग कुछ नया पढ़ना चाहते हैं। यही कारण है कि ‘सुबह सवेरे’ को ‘ए डेली न्यूज़ मैगज़ीन’ टैग लाइन के साथ प्रकाशित किया जा रहा है। भोपाल के बाद इसे इंदौर और कुछ जिलों से भी प्रकाशित किए जाने की तैयारी है।  

इस अखबार से जुड़ने वाले ज्यादातर लोग वहीं हैं, जो उमेश त्रिवेदी के साथ ‘नईदुनिया समूह’ में पहले काम कर चुके हैं। गिरीश उपाध्याय (नवदुनिया भोपाल के रेसीडेंट एडिटर), अजय बोकिल (नवदुनिया के एसोसिएट एडीटर), अरुण पटेल (नवदुनिया के पॉलिटिकल एडीटर), पंकज शुक्ला (नवदुनिया के सिटी एडीटर), हेमंत पाल (नईदुनिया इंदौर के एसोसिएट एडीटर) और भानू चौबे (नईदुनिया इंदौर के जॉइंट एडीटर) रहे हैं। ये सभी अब ‘सुबह सवेरे’ की टीम में शामिल हैं। जिलों के ज्यादातर संवाददाता भी नईदुनिया और नईदुनिया से जुड़े रहे पत्रकार हैं।  

‘सुबह सवेरे’ का स्वरूप और कंटेंट ही नया नही है, इसमें कॉलम लिखने वाले भी अपने क्षेत्र की दिग्गज हस्तियां हैं। ऐसे कुछ नाम ये है : सीताराम येचुरी (जनरल सेक्रेटरी, भाकपा-एम), केएन गोविंदाचार्य (विचारक), योगेन्द्र यादव (सामाजिक कार्यकर्त्ता), हर्ष मंदर (लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता), ज्यां द्रेज़ (वरिष्ठ अर्थशास्त्री), अनुपम मिश्र (गांधीवादी पर्यावरणविद्), देविन्दर शर्मा (खाद्य और कृषि विशेषज्ञ), रिचर्ड महापात्र (संपादक-रिचर्ड महापात्र), अनु आनंद (वरिष्ठ पत्रकार-बीबीसी) के अलावा कॉलमिस्ट राजकुमार केसवानी, एनके सिंह, महेश श्रीवास्तव, दिनेश जुगरान, प्रकाश पुरोहित, डाॅ. प्रभु जोशी, चिन्मय मिश्र, बादल सरोज, राकेश दीवान, सचिन जैन भी ‘सुबह सवेरे’ के लिए नियमित लिखेंगे!

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भोपाल हरिभूमि के संपादक बने प्रमोद भारद्वाज

भोपाल : शाम के लीडिंग अग्निबाण समाचार पत्र समूह में इंदौर के संपादक प्रमोद भारद्वाज ने चार साल की लंबी पारी के बाद इस्तीफा दे दिया है। वे चार महीने पहले ही पूरे ग्रुप की कमान संभालने के लिए भोपाल से इंदौर कॉरपोरेट आफिस भेजे गए थे। पर उनका मन नहीं रमा। वे सुबह के अखबार में वापसी चाहते थे। अग्निबाण को उन्होंने ही भोपाल में एक ब्रांड के रूप में स्थापित किया था।

हाल में उन्होंने हरिभूमि समूह ज्वाइन कर लिया। वे भोपाल संस्करण के रेजीडेंट एडिटर बनाए गए हैं। वे प्रबंध संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी को रिपोर्ट करेंगे। इससे पहले प्रमोद ने जनसत्ता सहित दैनिक भास्कर और अमर उजाला में कई बड़ी सीनियर पोजीशन पर काम किया था। भास्कर और अमर उजाला में वे कई संस्करणों के संपादक और स्टेट हैड तक रहे। उनकी अब तक अपनी एक किताब और संपादित छह पुस्तकें आ चुकी हैं। मप्र सरकार का पत्रकारिता का एक बड़ा राष्ट्रीय पुरस्कार और कहानी लेखन में भी उनको दिल्ली का स्व. प्रेमचंद राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। मप्र सरकार ने उन्हें दीनदयाल पत्रकारिता पुरस्कार से भी नवाजा है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भोपाल के सांध्य दैनिक ‘प्रदेश टुडे’ के मालिक दीक्षित बंधुओं में दरार !

भोपाल : आर्थिक संकट से जूझ रहे यहां के सांध्य दैनिक ‘प्रदेश टुडे’ में इन दिनों मालिक भाइयों अवधेश दिक्षित और हृदेश दीक्षित के बीच दरार पड़ने की खबर है। पता चला है कि इसके पीछे अखबार के सर्वेसर्वा सतीश पिंपले हैं। पिंपले की अखबार में हर जगह दखल है। मन-मर्जी के अलावा पिंपले खुद की कमाई का कोई मौका भी नहीं छोड़ता! 

‘प्रदेश टुडे’ के एक डायरेक्टर और इंदौर के बड़े कारोबारी राकेश मेहता ने अखबार में और धन लगाने से मना कर दिया! क्योंकि अखबार की करोड़ों की रिकवरी अटकी है। राकेश की बात को अवधेश ने भी सही माना और पिंपले की कार्यशैली पर ऊंगली उठाई। अवधेश के रिकवरी का आदेश देने के बाद खबर है कि हृदेश दीक्षित की अपने बड़े भाई से कहा सुनी भी हुई है।  चर्चा ये भी है कि पिंपले ने अपनी एक फर्म बना रखी है, जो ‘प्रदेश टुडे’ को कागज सप्लाई का काम करती थी। यह मामला भी उजागर हो गया! फिलहाल हृदेश ऑफिस नही आ रहे हैं! दोनों भाइयों में दरार की खबर अखबार द्वारा दो महीने पहले लगाए गए ‘ऑटोमोबाइल शो’ के समय भी सामने आई थी। 

भोपाल और अन्य शहरों में ‘प्रदेश टुडे’ की पहचान अखबार की बजाए ब्लेक मैलिंग के हथियार के रुप में ज्यादा है। पिछले दिनों रैनाल्ट मोटर्स के भोपाल शो रुम पर ‘प्रदेश टुडे’ के कुछ गुंडों ने उत्पात मचाया और सर्विसेज को लेकर कंपनी पर ऊंगली उठाई थी! बात बढने पर अपना प्रभाव दिखाते हुए रेनॉल्ट कंपनी के एमपी हेड संजय सोनी के खिलाफ मामला भी पुलिस में दर्ज कराया। 

इसके पीछे की कहानी ये है कि ‘प्रदेश टुडे’ ने रेनाल्ट के विज्ञापन बगैर किसी अनुमति और आरओ (रिलीस आर्डर) के छापकर बिल कंपनी को भेज दिए थे। संजय सोनी, जो कि पूर्व में दैनिक भास्कर और नईदुनिया के मार्केटिंग हेड रहे हैं, उन्होंने इस पर आपत्ति ली! जब ऐसे विज्ञापनों का पैमेंट अटका तो बात बिगड़ गई। एक और मामला इंदौर के एक बिल्डर की आत्महत्या के मामले में आरोपी बने बिल्डर अश्विन मेहता को लेकर है। आत्महत्या करने वाले बिल्डर ने अपने सुसाइड नोट में मेहता का नाम लिखा है। अश्विन मेहता का पैसा भी ‘प्रदेश टुडे’ में लगा है, पर उसे भी अखबार से कोई मदद नहीं मिली! 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सप्रे संग्रहालय को महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल : माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल को ’महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठतम उपलब्धियों एवं योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से यह सम्मान स्थापित किया है। महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान के अंतर्गत दो लाख रुपये सम्मान निधि, प्रशस्ति एवं सम्मान पट्टिका प्रदान की जाती है। संस्कृति विभाग की संचालक सुश्री रेनू तिवारी ने वर्ष 2012-13 के सम्मान के लिए सप्रे संग्रहालय के चयन की सूचना दी है। 

उच्चस्तरीय निर्णायक मंडल ने साहित्यकारों, पत्रकारों, शोधार्थियों और छात्रों को दुर्लभ संदर्भ उपलब्ध कराने में माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के अभूतपूर्व योगदान को रेखांकित किया है। निर्णायक मंडल ने माना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पुस्तकों और पत्रिकाओं के संग्रहण के लिए सप्रे संग्रहालय पूरे देश में अपने ढंग का अनूठा और एकमात्र संग्रहालय है। 

उल्लेखनीय है कि सप्रे संग्रहालय में 24,500 शीर्षक समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं की फाइलें, एक लाख से अधिक पुस्तकें, 734 पाण्डुलिपियाँ, 144 गजेटियर्स, 406 शब्दकोश, 274 अभिनन्दन ग्रंथ, साहित्यकारों, पत्रकारों आदि 4190 विशिष्टजनों के 25,000 से अधिक पत्र, अत्यंत महत्वपूर्ण 863 रिपोर्ट और विभिन्न विषयों, प्रसंगों एवं व्यक्तियों से संबंधित 4,605 संदर्भ फाइलें संग्रहीत हैं। यह विपुल शब्द सम्पदा दो करोड़ से अधिक पृष्ठों में विद्यमान है। इसमें हाल ही में सौ साल पुराने चिरंजीव पुस्तकालय आगरा से आए हजारों ग्रंथों और पत्रिकाओं की फाइलों का इजाफा हुआ है। यह संदर्भ सामग्री मुख्यतः हिन्दी और उसकी सहोदर लोक भाषाओं, अँगरेजी, संस्कृत, उर्दू , मराठी, गुजराती तथा अन्य भारतीय भाषाओं में है। सप्रे संग्रहालय की संदर्भ सामग्री का लाभ उठाते हुए विभिन्न विश्वविद्यालयों के 900 से अधिक शोध छात्रों ने विविध विषयों में अपने शोध प्रबंध पूरे किए हैं। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेतनमान : भोपाल के पत्रकार भी बुलंदी से उतरे मैदान में

भोपाल में आज मजीठिया इम्प्लीमेंटेशन समिति की मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें पत्रिका, दैनिक भास्कर और नवदुनिया के कर्मचारियों ने सैकड़ों की संख्या में भागीदारी की। मीटिंग में याचिकाकर्ताओं के साथ साथ ही उन कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया जिन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की है। 

पत्रिका से ऐसे कर्मचारियों की संख्या अधिक थी क्योंकि पत्रिका में हाल ही में जो इन्क्रिमेंट लगाया गया, उससे कर्मचारियों में नाराजगी थी। सबसे मजेदार बात तो यह रही कि पत्रिका मैनेजमेंट ने जिन कर्मचारियों को मीटिंग में जासूसी करने के लिए भेजा था उन कर्मचारियों का भी ह्रदय परिवर्तन वकीलों द्वारा तथ्यों के साथ दी गई दलीलों से हो गया और उन्होंने मंच पर खड़े होकर प्रतिज्ञा ली कि वे सच्चाई का साथ देंगे। 

जब पत्रिका के याचिकाकर्ताओं ने पूछा कि आप ऑफिस में अधिकारियों को क्या जवाब देंगे तो वे बोले कि हम कह देंगे कि हमारे पहुंचने से पहले ही मीटिंग खत्म हो गई थी। मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट परमानंद पांडे, कॉलिन गॉन्जालविज के साथ इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ साथियों ने सम्बोधित किया।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के कार्यालय में तोडफ़ोड़

भोपाल : वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के कार्यालय एफ-88/19, तुलसी नगर, सेकेण्ड स्टॉप में कुछ अज्ञात बदमाशों ने रात्रि साढ़े 10 बजे घुसकर तोड़फ़ोड़ की। 

घटना के समय संगठन के अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा हैदराबाद प्रवास पर थे। उनके निवास पर उनका पुत्र ललित शारदा सपरिवार थे लेकिन किसी कारणवश वे ऑफिस से घर के अंदर गये, तभी अचानक पांच अज्ञात बदमाश ऑफिस में घुस गये। ऑफिस में घुसकर उन्होंने तोडफ़ोड़ शुरू कर दी। पुत्र घर से बाहर की तरफ दौड़कर पहुंचा लेकिन चार लोग भागते हुए दिखे।

ललित शारदा ने तुरंत ऑफिस में अंदर जाकर देखा तो टेबिल का कांच टूटा हुआ था, कुर्सियां बिखरी पड़ी हुई थीं और कम्प्यूटर भी गिरा पड़ा था। उसने पूरे घटनाक्रम के फोटो खींचे। राधावल्लभ शारदा से फोन पर बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। भोपाल लौटकर उन्होंने कार्यालय का जायजा लेने के बाद थाना टी.टी. नगर में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

स्थायी कर्मचारियों को परेशान कर रहा दूरदर्शन न्यूज भोपाल

Bhopal : I want to inform you that the contractual employees at Doordarshan News Bhopal are being harassed and exploited by Permanent staff, Employees say. They are repeatedly threatened to be sacked and are being given mental torture.

Employees say, Due to which we are suffering from mental trauma. Salary of contractual employees  is not given from 2 months and are forced to work. Comments on Caste and  Gender  are also being made by Permanent staff to contractual staff.  Permanent staff repeatedly abuses and misbehave with contractual  employees without any reason even after giving  full output. 

Employees say, We are treated like downtrodden and the thing to satisfy the ego of officials.Moreover the officials also demand money to regularize and threaten to terminate if not given money. 

एक मेडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

28वीं राष्ट्रीय समकालीन कला प्रदर्शनी 17 से भारत भवन भोपाल में

भोपाल : भारत भवन में शुक्रवार, 17 से 26 अप्रैल तक भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ‘दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर की 28वीं राष्ट्रीय समकालीन कला प्रदर्शनी शुरू होने जा रही है। 

प्रदर्शनी की आयोजन सूचना प्रसारित करते केआर सुबन्ना, पियूष कुमर और मनोज श्रीवास्तव

उल्लेखनीय है कि केंद्र पिछले 27 वर्षों से राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है।  इस दर्शनीय और वृहद राष्ट्रीय प्रदर्शनी में विभिन्न विधाओं की कला अभिव्यक्ति जैसे पेन्टिंग, ग्राफिक्स, स्कल्पचर, टेराकोटा, ड्राइंग, फोटो, मिक्स मीडिया आदि की श्रेष्ठ कलाकृतियां देखी जा सकेंगी। उद्घाटन दिवस, 17 अप्रैल सायं 6 बजे दो श्रेणियों में होगा। इसमें 18 कलाकारों को कुल 17 लाख रुपये के राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिए जायेंगे, जिनका चयन ख्यातिप्राप्त कलाकारों, रघु राय, जतिन दास और लक्ष्मा गौड़ द्वारा किया गया है।

मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, संस्कृति विभाग, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर के निदेशक डॉ. पीयूष कुमार और प्रदर्शनी के मुख्य समन्वयक और ‘ललित कला अकादमी’ के पूर्व अध्यक्ष के.आर. सुब्बन्ना ने संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में बताया कि संस्कृति विभाग, मप्र और भारत भवन न्यास द्वारा संयोजित इस प्रदर्शनी में पश्चिम बंगाल के अखिलचंद्र दास (स्कारपियन), चंडीगढ़ के भीम मल्होत्रा, तेलंगाना के चिप्पा सुधाकर और दिल्ली के राधाकृष्ण राव को सीनियर केटेगिरी में दो-दो लाख रुपए का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जायेगा। भोपाल में जन्मी और वर्तमान में मध्यप्रदेष के रतलाम शहर की रहवासी दिव्या एम. पटवा को जूनियर कैटेगिरी में ‘डेलीब्रेटली सायलेंस’ शीर्षक उनकी ग्राफिक्स पेन्टिंग हेतु एक लाख रुपए का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। 

इस वर्ग में महाराष्ट्र के मंगेश हरिश्चंद्र कापसे, आंध्रप्रदेश के सुमन्ता चैधुरी और पंजाब के  विशाल भटनागर को भी एक-एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया जायेगा। ज्ञातव्य है कि उक्त पुरस्कारों को राष्ट्रीय पुरस्कार का दर्जा प्राप्त है, जो कलाकार को उनके जीवन में एक ही बार दिया जाता है।

इसके अलावा दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर द्वारा देश के 10 युवा कलाकारों को प्रोत्साहन एवं संरक्षण देने के उद्देश्य से प्रत्येक कलाकार को 50-50 हजार रुपए का अनुदान भी दिया जायेगा ताकि वे एक वर्ष के दौरान देश के किसी भी स्थान पर अपनी एकल प्रदर्शनी आयोजित कर सकें। प्रायोजन पुरस्कार पाने वालों में उत्तरप्रदेश के योगेन्द्र कुमार मौर्य, संतूकुमार चैबे, नेहा जायसवाल, सोनल वार्ष्णेय, गुजरात के रीतेश महादेव उमाटे, अवधेश ताम्रकार, उत्तराखंड के अतुल दीक्षित, बिहार के अभिजीत कुमार पाठक, दिल्ली के लक्ष्मण प्रसाद और छत्तीसगढ़ की विजया हैं। 

दोपहर 12 से रात 8 बजे तक आयोजित इस दस दिवसीय प्रदर्शनी में देश के ख्याति प्राप्त कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है जिनमें अमूर्त कलाकार एवं ‘काला घोड़ा फेस्टिवल’ की निदेशक’ ब्रिन्दा मिल्लर, दिल्ली की कला इतिहासकार डा. अल्का पांडे, जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल की निदेशक नमिता गोखले, कलाकार एवं क्यूरेटर सुरेश जयराम, अमूर्त कलाकार कविता जायसवाल, ‘टेकआन आर्ट’ पत्रिका की संपादक भावना कक्कर, प्रख्यात फोटोग्राफर एवं अध्यक्ष चंडीगढ़ ‘ललित कला अकादमी’ दीवान मन्ना, प्रख्यात शिक्षाशास्त्री प्रो. शर्मिष्ठा पांजा, कला समीक्षक पूनम गोयल तथा ग्राफिक एवं बुक डिजाइनर गुंजन एहलावत आदि प्रमुख विद्वान होंगे। देश की सबसे बड़ी कला प्रदर्शनियों में प्रमुख इस 28वीं राष्ट्रीय समकालीन कला प्रदर्शनी में ललित कला अकादमी, दिल्ली, प्रकाशन विभाग, दिल्ली तथा पंचकुला, चंडीगढ़ के आधार प्रकाशन की कला विषयक पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। साथ ही 18 से 26 अप्रेल तक दोपहर 3 बजे से प्रदर्शनकारी कलाओं के ख्यातिप्राप्त कलाकारों पर केन्द्रित उत्कृष्ट कला फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जायेगा। इसी तारतम्य में 17 से 26 अप्रेल के दरम्यान शाम 6 से रात्रि 8 बजे तक कला सम्बंधी पावर पाइंट प्रस्तुति भी होगी जिनमें केंद्र को देश के 1695 कलाकारों से पुरस्कार हेतु प्राप्त सभी 5085 कलाकृतियों को देखा जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि इस वृहद कला प्रदर्शनी में शामिल पेन्टिंग्स, स्कल्पचर्स, फोटोग्राफ्स आदि देश भर से प्राप्त 5085 प्रविष्टियों से चयनित किए गए हैं, जिन्हें दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर द्वारा गत अगस्त 2014 में आमंत्रित किया गया था। वरिष्ठ कलाकारों द्वारा चयनित 226 कलाकृतियों में 214 कलाकृतियों को प्रदर्शनी में शामिल किया गया है, जो मूल रूप से केंद्र को प्राप्त हुईं।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पत्रकार मदनमोहन जोशी और श्यामलाल यादव को ‘गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान’

भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्व विद्यालय में गत दिनो आयोजित एक समारोह में वर्ष 2012 का ‘गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान’ वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन जोशी को एवं वर्ष 2013 का सम्मान युवा पत्रकार श्यामलाल यादव को प्रदान किया गया। साथ ही, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतिभा-2015 का पुरस्कार वितरण भी किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मंचासीन अतिथियों ने साकेत दुबे की पुस्तक ‘डॉ.धर्मवीर भारती: पत्रकारिता के सिद्धान्त’ एवं मनोज चतुर्वेदी की पुस्तक ‘महात्मा गांधी और संवाद कला’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है। उसने देश की राजनीति को नई दिशा दी है। पत्रकारिता नहीं होती तो आज देश की राजनीति की दिशा-दशा कुछ और होती। दादा माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन हमारे लिए आज भी प्रकाश पुंज है। 

पत्रकार मदनमोहन जोशी और श्यामलाल यादव को सम्मानित करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

 

साकेत दुबे और मनोज चतुर्वेदी की पुस्तकों के प्रकाशनोत्सव की एक झलक

मुख्यमंत्री ने कहा कि मदन मोहन जोशी केवल पत्रकार नहीं, सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति हैं। श्यामलाल यादव ने कम उम्र में पत्रकारिता में बड़ी ऊंचाइयाँ हासिल की हैं, जो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। युवा पत्रकारों से उन्होंने सामाजिक सरोकार वाली पत्रकारिता करने का आह्वान किया। 

मदन मोहन जोशी ने कहा कि ऐसी पत्रकारिता का संकल्प लेना चाहिए जिससे व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र का भला हो सके। श्यामलाल यादव ने कहा कि मेहनत करके पत्रकारिता में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। हिमाचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी ने कहा कि पत्रकारिता के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती मूल्यों के संरक्षण की है। सनसनीपूर्ण पत्रकारिता का बोलबाला है। पत्रकारिता में ऐसे प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे मूल्यों एवं संवेदनाओं का संरक्षण हो सके। 

माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान के अंतर्गत वैदिक मिशन ट्रस्ट के स्वामी धर्मबंधु ने कहा कि विद्यार्थी पांच संकल्प लें। प्राचीन साहित्य का अध्ययन, अपनी संस्कृति का सम्मान, राष्ट्र के प्रति प्रेम का भाव, आदर्श स्थापित करने का प्रयास कर एवं अन्याय-अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएँ। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने विश्वविद्यालय की आगामी योजनाओं के बारे में चर्चा करते हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।

समारोह में विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। विद्यार्थियों के दल ने समाज में व्याप्त बुराइयों पर केन्द्रित लघु नाटिका ‘पागलों की दुनिया’ प्रस्तुत की। छात्राओं के कालबेलिया नृत्य पर लोग झूम उठे। विश्वविद्यालय बैण्ड ने भी मन मोहन लिया। इस दौरान प्रतिभा-2015 के दौरान सम्पन्न निबंध प्रतियोगिता, फीचर लेखन प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता, एनीमेशन, पोस्टर, कार्टून, पावर पाइंट निर्माण प्रतियोगिता, नाट्य प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता तथा क्विज़ प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरित किए गए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला, हिमालच विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा, रमेश शर्मा एवं वरिष्ठ साहित्यकार कैलाशचन्द्र पंत उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें –  

Journalism has given new direction to country’s politics: Shivraj Singh Chouhan : Lecture of Swami Dharmbandhu of Vedi Mission Trust was organised during Makhanlal Chaturvedi Memorial Lecture by Journalism University

Bhopal : Journalism is essential for democracy. Journalism has given a new direction to the country’s politics. Had journalism not been there, the political scenario would have been entirely different in the country. Life of Makhanlal Chaturvedi even today, is a great source of inspiration for us. These views were expressed by Chief Minister Shri Shivraj Singh Chouhan while addressing the Makhanlal Chaturvedi Memorial lecture and Ganesh Shankar Vidyarthi Award ceremony organised by Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication in Bhopal on Tuesday.

The Ganesh Shankar Vidyarthi award for the year 2012 was conferred upon senior journalist, Shri Madan Mohan Joshi while award for the year 2013 was conferred upon young journalist, Shri Shyamlal Yadav. On this occasion, Chief Minister said that Madan Mohan Joshi is not only a journalist but also a social worker. About Shyamlal Yadav, Chouhan said that he has reached a great height in the field of journalism at a very young age which is a great source of inspiration for the youths. He called upon the student to work hard and do not escape from working hard and should keep their goals big. He said that there is no bigger service than serving others and no bigger sin than harming others. Youths should practice journalism in such a way that they shine in the sky like stars. Giving four sutras of success to the students, he said that they should have ‘Paon Mein Chakkar’, ‘Muh Mein Shakkar’, ‘Sine Mein Aag’ and ‘Mathe Pe Barf’ and exhorted them to practice journalism which is in the interest of the society.

Speaking on the occasion, Madan Mohan Joshi said that journalism should take resolution to be in a kind of journalism that is in the interest of individual, society and nation. Shyamlal Yadav, in his address, said that anything could be achieved in journalism by dint of hard work and the young generation should not refrain from hard work. VC of Himachal University, Prof. ADN Bajpayee said that the biggest challenge before the journalism today is to preserve the journalistic values. There is the need to encourage efforts which could help in preservation of values and sensitivity. The vice-chancellor of the university, Prof. Brij Kishore Kuthiala, on this occasion talked about the upcoming programmes of the university and expressed gratitude towards the guests. The entire programme was coordinated by head of the Mass Communication Department, Sanjay Dwivedi.

Sufferings could be fought by increasing capabilities: Swami Dharmbandhu

The biggest characteristics of the human life is humanity. When there is lack of capability in humans, they will have mroe jealousy. Today people are not unhappy because of their own inefficiencies but because of efficiencies of others. To be able to get rid of their sufferings, people should become more capable. Today, there is need to emphasize on internal purification. We should focus on purity of body, mind, soul and conscience. Stregnths could be increased by creating knowledge. These views were expressed by the founder of Vedic Mission Trust, Swami Dharmbandhu.

He said that the problems of the modern age were determined by the heads of different countries of the world in 2005 wherein they said that world should come out of wars and give stress on better management. Today, the biggest problem before the humab beings is the problem of character. Today, even those nations which are ruling the international platforms too seem to be admitting this fact that development is not possible without peace. He said that the renowned educationist of the country, BS Kothari advocated of an education system which could promote the spirity of humanity. Quoting the great philosopher, Russeau, he Dharmbandhu said that everything given to us by the nature is sacred but it is destroyed when it reaches the hands of the human beings. Knowledge should be taken and learnt even from the enemies. Giving knowledge is the biggest charity. Today the G-8 nations consititute 19 per cent of the total population of the world while they have 75 per cent of the world resources in under their possession.

In his addres, Swami Dharmbandhu mentioned about 5 resolutions that students should take. First, studying the ancient literature, second: respecting our culture, third: feeling of affection towards the nation, fourth: try to establish ideals and fifth: raising voice against injustice and atrocities. He exhorted the student to live a hard working life and said that those not doing hard works in their lives do not have the right to pray to the almighty. Similarly, those who do not perspire should not have the right to relax. He said that a person is known by his thoughts and to be able role model for others it is important that one becomes patient, stay away from greed and should bring humility in one’s behaviour. Talking about the books authored by the great souls of the world, he appealed the students to go through them.

Students enjoy cultural activities, cheer prize winners

Prize distribution for cultural and sports event Pratibha-2015 : The prize distribution ceremony for annual cultural and sports fest Pratibha-2015 was also organised during the function. Students also presented cultural activities like skit titled, ‘Paagalon Ki Duniya’ to highlight the corruptions and irregularities prevailing in the society. The folk dance, Kalbeliya, presented by the students also enthralled the audience. The Universiy Band too mesmerised the audience with their musical instruments. During this, the winners of different competitions like essay, feature writing, debate, extempore, animation, cartoon, poster, powerpoint presentation, play, dance, quiz and others were also given away felicitated with prizes. Vice-Chancellor of the university, Prof. Brij Kishore Kuthiala, VC of Himachal University, Prof. ADN Bajpayee, senior journalist Radheshyam Sharma and senior litterteur, Kailashchandra Pant were present to give away the prizes to the winners of the competitions.

During the function, two books published by the Publication Department of the University were released by Chief Minister Shivraj Singh Chouhan and other dignitaries present on the dais. The book authored by Saket Dubey, ‘Dharmvir Bharti: Patrakarita Ke Siddhant’ and ‘Mahatma Gandhi Aur Samvad Kala’ written by Manoj Chaturvedi were released on  the occasion.  

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मीडिया विमर्श : माखनलाल जयंती पर ‘मैं भारत हूं’ का प्रकाशनोत्सव

भोपाल : अपने देश को हमें हीन भावना से प्रस्तुत नहीं करना चाहिए। अपने लेखन में भारतीय वाग्ंमय और भारतीय उदाहरणों को प्रस्तुत करना चाहिए। ताकि प्रत्येक भारतवासी को अपने देश पर गौरव हो और दुनिया भी जाने की भारत एक महान देश है। यह पुरानी कहावत है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। लेकिन, धन और बाजारवाद का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे ये दर्पण कुछ दरक गया है। इस कारण बिम्ब कुछ धुंधले बन रहे हैं। साहित्यकारों को भारत के उजले पक्ष को दिखाना चाहिए। ये विचार प्रख्यात कवि और वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने व्यक्त किए। 

वे युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह के काव्य संग्रह ‘मैं भारत हूं’ के विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। समारोह का आयोजन पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती प्रसंग पर मीडिया विमर्श पत्रिका के तत्वावधान में किया गया। समारोह की अध्यक्षता माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की। वरिष्ठ पत्रकार श्री अक्षत शर्मा भी बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।

श्रीवास्तव ने कहा कि जब मैं कहता हूं कि मैं भारत हूं तो हमारे भीतर गंगा की पवित्रता, हिमालय की गर्वोन्नति और हिन्द महासागर की गहराई एवं विशालता दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुभव की अभिव्यक्ति है साहित्य। पत्रकारिता भी साहित्य है लेकिन इसमें अनुभव का इस्तेमाल कम होता है। ‘मैं भारत हूं काव्य संग्रह की बेटि को समर्पित एक कविता का जिक्र करते हुए कहा कि आज समाज में बेटियों की अस्वीकारता है लेकिन कवि किस तरह से अपनी बेटियों को सम्मान देता है, यह सबको जानना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक हम अपने देश की हवा, मिट्टी, पानी को आत्मसात नहीं करेंगे तब तक देश का कल्याण नहीं होगा। विमोचित काव्य संग्रह में कवि ने इसी हवा, मिट्टी और पानी को आत्मसात कर लेखन किया है। शोधपत्रों का उदाहरण देकर उन्होंने बताया कि उज्जैन में स्थित महाकाल के शिवलिंग को केन्द्र मानकर खगोल की गणना की जाती थी। ज्यामिति, गणित, चिकित्सा इन सबका विकास कहाँ हुआ? अपनी लेखनी से हमें यह बताना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि लाखों वर्षों की संकल्पनाओं का समावेश ‘भारत’ शब्द में है। उसे व्यक्त करना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। ‘एक भारतीय आत्मा’ के नाम से ख्यात महान कवि पं. माखनलाल चतुर्वेदी की आज जयंती है। उनको याद करना भारतीय परम्पराओं को याद करना है। हमें यह जानना चाहिए कि उन्होंने इतना सकारात्मक लेखन करने के लिए क्या-क्या अध्ययन किया। विद्वान कहते हैं कि एक हजार शब्द पढऩे के बाद एक शब्द लिखना चाहिए। हमारे शास्त्र मनन की बात करते हैं। हमें अध्ययन के बाद मनन करना चाहिए, तब जो शब्द निकलेगा वह ब्रह्म होगा। वरना शब्द तो भ्रम भी होता है। इसलिए हमें अध्ययन में भी सावधानी बरतनी चाहिए। गलत दिशा में अध्ययन से श्रेष्ठ अभिव्यक्ति नहीं हो सकती। भाव की मजबूती के लिए बौद्धिकता की जरूरत होती है। 

उन्होंने कहा कि आसान काम नहीं था, जब माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता और लेखन कार्य किया। उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत का दौर था। लेकिन, समाज के लिए समर्पित जीवन से उन्होंने वह कर दिखाया था। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री अक्षत शर्मा ने कहा कि ‘मैं भारत हूं’ काव्य संग्रह में शामिल सब कविताएं अपनी माटी के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि संग्रह में शामिल कविताएं उज्ज्वल और गौरवशाली भारत की तस्वीर दिखाती हैं। अपने देश पर गर्व करने की प्रेरणा देती हैं। इससे पूर्व पुस्तक का परिचय लेखक एवं कवि लोकेन्द्र सिंह ने दिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए देश कोई भूगोल नहीं है बल्कि एक जीता-जागता देवता है। अपने इस देवता की स्तुति में ही उन्होंने कविताएं और गीत रचे हैं। उन्होंने कहा कि देश, समाज और प्रकृति के साथ-साथ संग्रह में शामिल कई कविताएं मानवीय रिश्तों के इर्द-गिर्द भी रची गई हैं। 

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया। इस मौके पर कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, कुलसचिव श्री चंदर सोनाने, जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय, सुनील शुक्ला, प्रवीण दुबे, शैलेन्द्र तिवारी, मध्यप्रदेश सूचना आयुक्त आत्मदीप, सामाजिक कार्यकर्त्ता सतीश पिम्पलीकर, हेमन्त मुक्तिबोध, डॉ. मयंक चतुर्वेदी और शहर के गणमान्य नागरिकों सहित विद्यार्थी भी मौजूद रहे।

संजय द्विवेदी के फेसबुक वॉल से

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

व्यापमं घोटाले में नाम आने के बाद सीएम शिवराज ने मीडिया से दूरी बनाई

भोपाल : अपना और अपने परिजनों का नाम व्यापमं घोटाले में आने के बाद से ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से दूरी बना ली है। अब यूएनआई, पीटीआई और एएलआई के माध्यम से उनकी सूचनाएं मीडिया तक पहुंच रही हैं। 

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एवं जनसंपर्क आयुक्त एस के मिश्रा पहले एजेंसी के प्रतिनिधियों से प्रश्नोत्तरी तैयार करवाते हैं, फिर प्रश्नों की कांट -छांट के बाद मुख्यमंत्री से साक्षात्कार करवाते हैं। खुद ही कई तरह के विवादों में घिरे रहे एस. के. मिश्रा यह तय करते हैं कि मुख्यमंत्री से क्या सवाल पूछे जाएं और क्या नहीं। हाल ही में मुख्यमंत्री निवास में एजेंसी के कुछ पत्रकारों को जनसंपर्क विभाग ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रदेश दौरे पर आने एवं ओला प्रभावित क्षेत्रों में दौरे को लेकर मुख्यमंत्री की राय लेने को बुलाया था। 

ए.एन.आई. के पत्रकार की प्रश्नावली से व्यापमं मामले से जुड़े प्रश्न को आयुक्त जनसंपर्क ने हटवा दिया। इस संबंध में उन्होंने कहा कि व्यापमं का प्रश्न अभी आप मत पूछो क्योंकि एक सप्ताह के भीतर सरकार व्यापमं मामले में बड़ा धमाका करेगी। ए.एन.आई. के पत्रकार ने आयुक्त द्वारा प्रश्नों पर की गई सेंसरशिप को स्वीाकर लिया लेकिन अन्य एजेंसी के पत्रकारों ने अपने हिसाब से ही मुख्यमंत्री से प्रश्न किए।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हरिभूमि भोपाल में आंतरिक बदलाव

भोपाल (म.प्र.) : हरिभूमि के मैनेजिंग एडिटर डॉ.हिमांशु द्विवेदी ने अखबार के भोपाल संस्करण में आंतरिक बदलाव किए हैं। अब तक अखबार में डिप्टी न्यूज एडिटर का दायित्व निभा रहे भोजराज उच्चसरे को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देते हुए सेंट्ल डेस्क इंचार्ज बना दिया गया है। वह बतौर रिजनल इंचार्ज का भी दायित्व निभाते रहेंगे। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

कलेक्टर ने निरस्त की भोपाल पत्रकार भवन की लीज

भोपाल : जिला कलेक्टर निशान्त बरवडे ने पत्रकार भवन समिति की शिकायत पर ‘पत्रकार भवन, भोपाल’ की लीज निरस्त कर दी है। इससे पूर्व कलेक्टर ने पत्रकार भवन में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पत्रकार भवन प्रबंधन को एक नोटिस दिया था।

सन् 1969 में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल नाम की पत्रकारों की प्रतिष्ठित संस्था थी। इसी संस्था को म.प्र. सरकार ने कलेक्टर सीहोर के माध्यम से राजधानी परियोजना के मालवीय नगर स्थित प्लाट नम्बर एक पर 27007 वर्ग फिट भूमि इस शर्त पर आवंटित की थी कि यूनियन पत्रकारों के सामाजिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक उत्थान व गतिविधियों के लिये इमारत का निर्माण व उसका सुचारू संचालन करेगी। उस समय मुख्य मंत्री पं श्यामाचरण शुक्ल थे।

उसी समय दिल्ली में सक्रिय आईएफडब्लूजे विभिन्न प्रान्तों में पत्रकार संगठनों को सम्बद्धता दे रहा था। इसके अध्यक्ष उस समय स्व.रामाराव थे। आईएफडब्लूजे ने वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल को सम्बद्धता दे दी थी। शर्त ये थी कि सम्बद्धता दोनों में से कोई भी एक पक्ष समाप्त कर सकता था। रामाराव की मृत्यु के बाद अध्यक्ष बदले, फिर उनके पुत्र के विक्रमराव ने विरासत सम्हाली, जो अद्यतन अध्यक्ष हैं। 

पत्रकार भवन की इमारत के निर्माण के लिये स्व. धन्नालाल शाह, स्व. प्रेम श्रीवास्तव, स्व.नितिन मेहता आदि नामचीन पत्रकारों ने अपनी झोली फैलाकर एक एक पाई संचित कर पत्रकारों का स्वप्न महल खड़ा कर दिया। इमारत बनने के बाद इसकी विशालता व भव्यता के चर्चे देश विदेश में होने लगे। इसके बाद आपस में आरोपों प्रत्यारोपों का दौर शुरू हुआ। उस समय पत्रकार भवन समिति के अध्यक्ष लज्जा शंकर हरदेनिया ने पत्रकार भवन को शादी विवाह समारोह आदि के लिये देने का प्रस्ताव पारित करा लिया। खींचतान और बढ़ गई। 

बाद में इसे संचालित करने वाले संबंधित संगठन का नाम बदल कर श्रमजीवी पत्रकार संघ कर लिया गया। शलभ भदौरिया ने 1992 में म.प्र.श्रमजीवी पत्रकार संघ नाम से अपना अलग पंजीयन करा लिया। पिछले साल पत्रकार भवन समिति के अध्यक्ष एन पी अग्रवाल और वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष अवधेश भार्गव बने।

इसी बीच शासन से भार्गव को नोटिस दिया गया कि संस्था आवंटित भूमि का दुरुपयोग कर रही है। इसके बाद संस्था की बैठक में पत्रकारों के हित में पुनः लीज स्वीकारने का प्रस्ताव पारित कर पदाधिकारी आयुक्त एस के मिश्रा एवं मुख्यमंत्री से मिले। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पर अमल का आश्वासन दिया। उधर, कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई के दौरान शलभ भदौरिया ने अपने दो प्रतिनिधियों के माध्यम से दावा किया कि वे ही सर्वे सर्वा हैं। विक्रमराव की ओर से जवाहर सिंह ने दावा किया कि बिना विक्रमराव से चर्चा किये कोई निर्णय न लिया जाये, किन्तु कलेक्टर ने भार्गव के दावे को मानते हुए लीज निरस्त कर 2 फरवरी 2015 को कब्जा वापस सौंपने के आदेश पारित कर दिए। आगामी 18 मार्च को कब्जा वापस सौंपने का निर्णय लिया गया है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘दैनिक नवजीवन’ संपत्ति चोरी प्रकरण : पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज, केस नये सिरे से शुरू, नामजद आरोपियों के खिलाफ वारंट

Sanjay Chaturvedi : ‘नेशनल हेराल्ड’ के हिंदी संस्करण ‘दैनिक नवजीवन’ की संपत्ति चोरी हो जाने के मामले में भोपाल कोर्ट ने पुलिस की खात्मा रिपोर्ट को खारिज कर केस को नये सिरे से शुरू कर नामजद आरोपी एनके मित्तल और महेन्द्र सिंह बग्गा के खिलाफ पांच पांच हजार रूपये के जमानती वारण्ट जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी। नवजीवन की मशीन और अन्य सामान चोरी जाने की घटना 18-19 नवम्बर 2007 में हुई थी एमपी नगर थाना पुलिस ने काफी दवाब के बाद 9 जनवरी 2008 को धारा 380 के तहत नामजद प्रकरण दर्ज किया।

इस मामले में नवजीवन के प्रकाशन समूह एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के चेयरमैन मोतीलाल वोरा के पत्र पर पुलिस ने एफआईआर में धारा 405 का इजाफा कर दिया। प्रकरण दर्ज होने के दो साल बाद भी पुलिस की विवेचना आगे नहीं बढ़ी। पुलिस के रवैये के खिलाफ फरियादी मो सईद ने 2010 में पुलिस थाने में एफआईआर की दूसरी वर्षगांठ मनाते हुए केक काटकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन से बौखलाई पुलिस ने आनन फानन खात्मा डाल दिया। कोर्ट ने पुलिस की खात्मा रिपोर्ट को खारिज कर नये सिरे से शुरू किया। कोर्ट ने धारा 380 के बजाय धारा 406 का मामला मानते हुए आरोपियों के खिलाफ जमानती वारण्ट जारी किए हैं। मामले में फरियादी की ओर से अधिवक्ता भरत चतुर्वेदी ने पैरवी की।

भोपाल के पत्रकार संजय चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

ब्रजेश राजपूत को मिला यशवंत अरगरे हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार

भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव ने एबीपी न्यूज के विषेप संवाददाता ब्रजेश राजपूत को ‘यशवंत अरगरे हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार’ से सम्मानित किया। मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की ओर से हिन्दी भवन में हुये सम्मान समारोह में ये पुरस्कार प्रदान किया गया।

brajesh rajput

चयनकर्ताओं ने ब्रजेश राजपूत को इलेक्टॉनिक मीडिया के साथ-साथ अखबारों में लिखने और हाल के विधानसभा चुनावों पर आयी उनकी किताब ‘चुनाव राजनीति और रिपोर्टिंग’ के माध्यम से सहज और सरल हिंदी को बढ़ावा देने के लिये चुना। पुरस्कार में अभिनंदन पत्र के साथ पांच हजार रूपये की नगद राशी भी दी गयी।

इस मौके पर मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ओर पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा भी मौजूद थे। इलेक्टॉनिक मीडिया में लंबे समय से सक्रिय ब्रजेश राजपूत की विधानसभा चुनावों पर लिखी चर्चित किताब ‘चुनाव राजनीति और रिपोर्टिंग’ का दूसरा संस्करण भी आ रहा है। ब्रजेश राजपूत मध्यप्रदेश विधानसभा पत्रकार सलाहकार समिति और प्रदेश स्तरीय अधिमान्यता कमेटी के सदस्य भी है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अजय वर्मा पिटाई प्रकरण में भोपाल के कथित वरिष्ठ पत्रकारों की घटिया भूमिका

Ashish Maharishi : पुलि‍स के गुंडे भोपाल में एक युवा पत्रकार अजय वर्मा को जमकर पी‍टते हैं। अजय की गलती बस इतनी थी कि वह पुलि‍सि‍या अकड़ के आगे झुकने को तैयार नहीं थे। अजय अभी अस्‍पताल में भर्ती हैं। अजय के कुछ चुनिंदा साथी उससे मि‍लने कभी कभार अस्‍पताल पहुंच जाते हैं। अजय अपनी लड़ाई अकेला ही लड़ रहा है।

भोपाल के कथि‍त वरि‍ष्‍ठ पत्रकार इस पूरे मामले में खामोश हैं। कुछ तो सरकार के तलुए चांटने में व्‍यस्‍त हैं तो कुछ अफसरों की दलाली करने में। कुछ वरि‍ष्‍ठ पत्रकार तो अजय पर लगातार समझौता करने का दबाव डाल रहे हैं। ये ऐसे पत्रकार हैं जो खुद को मप्र का दि‍ग्‍गज पत्रकार समझते हैं। कुछ पत्रकार तो दारू की एक बोतल के लि‍ए पुलि‍स के खि‍लाफ कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

भास्कर से जुड़े पत्रकार आशीष महर्षि के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: