नई दिल्ली / पटना। चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एक अहम घोषणा की है। आयोग ने कहा है कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सभी राजनीतिक दलों को दूरदर्शन और आकाशवाणी पर मुफ्त प्रसारण और टेलीकास्ट का अवसर दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य चुनाव के दौरान सभी दलों को सरकारी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर समान अवसर और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
यह सुविधा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 39A के तहत दी जा रही है। चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी — यानी अब मैनुअल वाउचर सिस्टम की जगह आईटी आधारित डिजिटल टाइम वाउचर जारी किए जाएंगे।
कब और कैसे होगा प्रसारण?

चुनाव आयोग के अनुसार-
- प्रसारण का समय उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद से लेकर मतदान की तारीख से दो दिन पहले तक रहेगा।
- इस अवधि में प्रत्येक राजनीतिक दल को दूरदर्शन और आकाशवाणी दोनों पर 45 मिनट का मुफ्त प्रसारण समय मिलेगा।
- इसके अलावा, पिछले बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टियों के प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है।
प्रसारण का समय लॉटरी प्रणाली के ज़रिए तय किया जाएगा, जिसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
रिकॉर्डिंग और कंटेंट दिशानिर्देश
राजनीतिक दलों को अपने भाषणों की स्क्रिप्ट और रिकॉर्डिंग पहले से जमा करनी होगी। यह सामग्री चुनाव आयोग और प्रसार भारती के सभी दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए। रिकॉर्डिंग का कार्य दूरदर्शन/आकाशवाणी केंद्रों में या ऐसे स्टूडियो में किया जा सकेगा जो प्रसार भारती के तकनीकी मानकों पर खरे उतरते हों।
पैनल डिस्कशन और डिबेट्स भी होंगे
प्रसार भारती चुनाव अवधि के दौरान दो विशेष पैनल चर्चाओं (Debates) का भी आयोजन करेगी। इनमें प्रत्येक योग्य राजनीतिक दल का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। इन चर्चाओं का संचालन एक स्वतंत्र और मान्यताप्राप्त मॉडरेटर द्वारा किया जाएगा ताकि चर्चाएं संतुलित, तथ्यात्मक और निष्पक्ष रहें।
डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में कदम
चुनाव आयोग ने कहा कि यह कदम चुनावी संवाद में डिजिटल पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।
“डिजिटल वाउचर प्रणाली से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, कुशल और समयबद्ध बनेगी। इसका उद्देश्य है कि हर मान्यता प्राप्त दल की आवाज सरकारी मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचे,” — चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।



