मुनेंद्र गंगवार-
बीजेपी में भी ऐसे नेता हैं जो सर्वमान्य हैं। ऐसे ही एक विधायक बरेली से हैं, नाम है डॉ राघवेन्द्र शर्मा। बेहद सीधे और सच्चे इंसान। कल एक बेहद दुखद घटना हुई, उनके पिता के साथ। पिता जी, बदायूं में शाम को घर के बाहर टहल रहे थे। एक नाबालिग बच्चा उनको स्कूटी से टक्कर मार गया।
विधायक के पिता जी को काफी चोट आई। उनको बरेली लाया गया। डॉ. राघवेन्द्र खुद योग्य और कुशल डाक्टर हैं, अपनी देखरेख में पिता जी का इलाज किया।
अचानक पिता जी उनका साथ छोड़ गए। सबने टक्कर मारने वाले को ही दोषी माना। दोषी के मां बाप भी रोते गिड़गिड़ाते आ गए। ये भी समझ चुके थे कि सत्ताधारी दल के विधायक के पिता की जान जाना कितना बड़ा मामला है।

विधायक डॉ राघवेन्द्र शर्मा ने बिना एक पल गवाएं, ये जान लिया कि उनका एक भी एक्शन इस नाबालिग बच्चे की जिंदगी और उसके परिवार को तबाह कर देगा। सत्ता की ताकत के साथ कानून बहुत कुछ कर सकता था, पर विधायक डॉ राघवेन्द्र ने बच्चे को क्षमा कर दिया।
दोस्त आपके लिए ये फैसला आसान नहीं रहा होगा। हमने आपको एक बेहतरीन इंसान के रूप में जाना मगर आज से मेरी निगाह में आपका दर्जा और भी ऊंचा हो गया। दुख की इस घड़ी में भी आपने शक्ति और विवेक के संतुलन को बनाये रखना।
इस दुखद घड़ी में हम सब आपके साथ खड़े हैं और रहेंगे। ईश्वर, परम पूज्य पिता जी को अपने श्री चरणों में स्थान दें।
पवन सक्सेना-

जब पढ़ता था तब का एक श्लोक याद है – क्षमा बलमशक्तानाम् शक्तानाम् भूषणम् क्षमा:। इसका अर्थ है क्षमा करना यानी माफ करना निर्बलों – कमजोरों की शक्ति है और शक्तिशाली का आभूषण। मेरे भाई जैसे मित्र हैं डा. राघवेन्द्र शर्मा। सालों साल से।
अब बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। उनके पिता जी का दुखद निधन हो गया। बाबू जी करीब 88 वर्ष के थे। दो दिन पहले बदायूं में शाम को सड़क पर चहलकदमी करते वक्त कोई एक छोटा सा लड़का स्कूटी से उनको टक्कर मार गया। लड़के की उम्र रही होगी यही कोई तेरह – चौदह साल।
ना डीएल था, ना कोई कागज, उम्र भी नाबालिग। कानून बहुत कुछ कर सकता था। सत्ता की ताकत भी। भाई डा. राघवेन्द्र जी ने दूर का सोचा और इस बच्चे को क्षमा कर दिया। मैं समझ सकता हूं – यह फैसला आसान नहीं रहा होगा – उनके लिए भी, उनके परिवार के लिए भी।
बाबू जी को काफी चोट आई। उनको बरेली लाया गया। डॉ. राघवेन्द्र जी खुद योग्य और कुशल डाक्टर हैं। अपनी देखरेख में पिता जी का इलाज किया। कल रात तक फिजीकल पैरामीटर काफी ठीक ठाक हो चले थे। सुबह सबेरे अचानक कायनात ने अपना फैसला सुना दिया – बाबू जी साथ छोड़ गए। सब सन्न रह गए।
बाबू जी (स्वर्गीय श्री कौशल किशोर शर्मा जी) राजस्थान में अध्यापक व प्रिंसिपल रहे थे। रहते मथुरा वृंदावन में थे। अद्भुत कृष्ण भक्त। रोज भगवान गिरिराज जी की परिक्रमा करते थे। परिवार को सफलता और संस्कार ऐसे मिले, जैसे ईश्वरीय प्रसाद हो।



Sheela
May 30, 2025 at 1:20 pm
उचित फैसला है। राजनीति में सक्रिय रहना है तो यह जरूरी था। दूसरी बात है नाबालिग को कोई सजा तो थी नहीं। स्कूटी जप्त होती मां-बाप को भी 14 दिन सजा हो जाती । लेकिन राजनीतिक तौर से कितना नुकसान होता है वह अच्छी तरीके से जानते हैं।