ज़ी समूह के पार्ट ज़ी बिजनेस से एक बेहद असंवेदनशील मामला सामने आया है. यहां एक पत्रकार को जबरन नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. वह साल 2022 से यहां कार्यरत है. नौकरी जाने के बाद पीड़ित को सबसे अधिक अपना लोन चुकाने और जिस घर में वह रह रहा है उसका किराया कैसे चुकाएगा…इसकी आफत उसके सामने मुँह बाए खड़ी है.
भड़ास4मीडिया से हुई बातचीत में पीड़ित ने बताया, “सर मैं ज़ी बिजनेस में था. जुलाई 2022 में ज्वाइन किया था. इससे पहले दैनिक भास्कर में था. पिछले साल छंटनी में भी बहुत लोगों की जॉब गई. ऑफिस के लोगों को पता था कि मेरा एक ईएमआई चलता है 15 हजार का और घर का किराया 10 हजार. इसके बाद भी इन्होंने ये फैसला करने से पहले नहीं सोचा. अपने घर में कमाने वाला मैं अकेला हूं. मेरे पापा चार साल से बीमार थे उनका तीन बार ऑपरेशन हुआ था, उनके इलाज के लिए मैने 8 लाख का लोन लिया था अभी उसकी हर महीने 15 हजार रुपये ईएमआई जाती है.
पिछले साल मेरे पापा की डेथ हो गई. दो छोटे भाई हैं और मां. भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं उनका खर्चा भी मुझे देखना पड़ता है. अब जॉब नहीं रही, मैं लोन नहीं ले पाउंगा, इससे मेरी समस्याएं और बढ़ेंगी यह तय है.
अब मेरी टेंशन ये है कि जॉब जाने के बाद मेरी ईएमआई कहां से जाएगी और रूम का रेंट कहां से दूंगा. मेरे पास अब घर जाने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा. अब तो मुझे जीने का भी कुछ मतलब दिखाई नहीं देता.
पीड़ित बताता है कि, 29 अप्रैल को मुझे अचानक से एचआर गरिमा कंबोज का कॉल आया, उसने मुझे केबिन में बुलाया. एचआर ने मुझसे कंपनी के लॉस में जाने की बात कही, मैने उनसे कहा कि मेरी ईएमआई और रूम का रेंट… जिस पर उन्होंने साफ कहा कि, “मुझे नहीं मालूम.” इसके बाद मुझे लैपटॉप जमा करने के लिए कहा गया. 2 साल बाद लैपटॉप का बैग जमा कराने के लिए कहा. ये हाल तब है जब फाइनेंसियल ईयर मैं टॉप पर था.”
हर साल कोई न कोई उपर नीचे रहता है, लेकिन मैं पूरे फाइनेंसियल ईयर इस लिस्ट में टॉप फाइव में रहा. यहां बस उसकी नौकरी नहीं जाएगी जो बॉस की चमचागिरी करता है. मुझसे ये सब होता नहीं. सारे के सारे चमचे भरे हैं यहां.
इन सभी दिक्कतों के बावजूद कल एचआर का जो रेजिग्नेशन अक्सेप्टेंस लेटर आया उसमें बेस्ट ऑफ लक बोला जा रहा है, हद थोड़ी सी भी शर्म नहीं है इनको.


