अखिलेश यादव-
आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम। हमने तो पहले ही कहा था :
- सवाल ये नहीं है कि शेयर बाज़ार रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा।
- जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगी।
- हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बँटे बीस) का बजट मानते हैं क्योंकि वो 5% लोगों के लिए होता है।
- भाजपा का बजट, अपने कमीशन और अपने लोगों को सेट करने का बजट होता है।
- भाजपा का बजट, भाजपाई भ्रष्टाचार की अदृश्य खाता-बही होता है।
- इस बजट में न आम जनता का ज़िक्र है न फ़िक्र।
- महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को टैक्स में छूट न देना, ‘टैक्स-शोषण’ है।
- अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं लेकिन बेकारी-बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है।
निराशाजनक, निंदनीय बजट!
प्रियंका भारती-
बजट के बाद शेयर बाजार ऐतिहासिक रूप से गोता लगा रही है। देश का बंटाधार करने वाला बजट पेश किया गया, सिर्फ करप्ट लोगों के लिए व्हाइट मनी करने के तरीके पेश हुए है!
डॉ संदीप-
बजट (Budget) का भाषण खत्म हुआ और शेयर बाज़ार ने ऐसा गोता लगाया कि निवेशकों की चाय तक ठंडी हो गई। सुबह तक मुनाफे के सपने थे, दोपहर होते-होते पोर्टफोलियो डाइट पर चला गया। आम निवेशक सोच रहा है कि बजट विकास का था या उसकी बचत पर सर्जिकल स्ट्राइक। बड़े खिलाड़ी निकल गए, छोटे निवेशक फिर फँस गए। हर साल उम्मीदों का रॉकेट उड़ता है और बाज़ार धड़ाम से गिर जाता है। सवाल वही है आखिर कब तक आम निवेशक सपनों में कमाए और हकीकत में लुटता रहेगा?
विकसित भारत का बजट इतना शानदार था कि शेयर मार्केट क्रैश हो गया। 9 लाख करोड़ डूबे। -सौमित्र राय
नवल कांत सिन्हा-
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में क्या सस्ता, क्या महंगा? जानिए –
केंद्रीय बजट 2026-27 (1 फरवरी 2026 को पेश) में मुख्य रूप से कस्टम्स ड्यूटी, एक्साइज और अन्य कर बदलावों से कुछ वस्तुओं के दाम प्रभावित हुए हैं। ये बदलाव “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने, घरेलू उत्पादन को सपोर्ट करने और स्वास्थ्य/पर्यावरण क्षेत्रों पर फोकस के कारण हैं। ध्यान दें कि ये बदलाव तुरंत या कुछ समय बाद प्रभावी होते हैं, और बाजार में असर कुछ हफ्तों में दिख सकता है।
क्या सस्ता हुआ (कीमतें कम होने की संभावना):
दवाइयां: डायबिटीज, कैंसर और कुछ दुर्लभ बीमारियों की दवाइयां सस्ती हुई हैं। जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं पर कस्टम्स ड्यूटी में छूट या कमी से ये अधिक सुलभ होंगी।
खेल का सामान: खेल उपकरण (स्पोर्ट्स इक्विपमेंट) सस्ते होंगे, खासकर खेलो इंडिया मिशन के तहत फोकस के कारण।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV): लिथियम-आयन बैटरी और संबंधित कच्चे माल पर कस्टम्स ड्यूटी कम होने से EV बैटरी, इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारें सस्ती हो सकती हैं।
मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल कंपोनेंट्स (जैसे कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले, PCBA) पर ड्यूटी में कमी से भारत में असेंबल स्मार्टफोन, टैबलेट और संबंधित गैजेट्स सस्ते होंगे।
सोलर पैनल और रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़ी चीजें: सोलर पैनल और संबंधित सामग्री सस्ती होंगी।
माइक्रोवेव ओवन और कुछ घरेलू उपकरण: माइक्रोवेव ओवन के पार्ट्स पर ड्यूटी छूट से ये सस्ते हो सकते हैं।
चमड़ा/फुटवियर और कुछ अन्य: लेदर उत्पाद और फुटवियर से जुड़े निर्यात/उत्पादन को सपोर्ट से अप्रत्यक्ष रूप से सस्ता प्रभाव।
स्वास्थ्य बीमा: सेक्शन 80D में विस्तार से स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर अप्रत्यक्ष राहत (थोड़ा सस्ता)।
क्या महंगा हुआ (कीमतें बढ़ने की संभावना):
शराब और टोबैको उत्पाद: शराब, सिगरेट, पान मसाला, गुटखा आदि पर एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस बढ़ने से ये महंगे हो गए हैं (कुछ बदलाव 1 फरवरी से प्रभावी)।
लक्जरी आयातित सामान: हाई-एंड वॉच, डिजाइनर कपड़े, जूते, लग्जरी कारें, ज्वेलरी और अन्य आयातित लग्जरी आइटम्स पर कस्टम्स ड्यूटी बढ़ने या संरचना बदलने से महंगे हो सकते हैं।
कुछ अन्य: कुछ प्रोसेस्ड फूड या अन्य “सिन” गुड्स पर बढ़े टैक्स से अप्रत्यक्ष महंगाई।
ये बदलाव मुख्य रूप से कस्टम्स ड्यूटी रेशनलाइजेशन, एक्साइज और अप्रत्यक्ष टैक्स से आए हैं। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए सैलरीड क्लास को डायरेक्ट टैक्स राहत नहीं मिली। कुल मिलाकर, बजट ने स्वास्थ्य, ग्रीन एनर्जी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सस्ता बनाने पर जोर दिया है, जबकि लग्जरी और हानिकारक उत्पादों को महंगा किया है। वास्तविक बाजार प्रभाव समय और सप्लाई चेन पर निर्भर करेगा।


