रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क विभाग को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों से पता चला है कि राज्य का जनसंपर्क विभाग बड़े पैमाने पर दूसरे प्रदेशों के अखबारों, पोर्टलों और मीडिया संस्थानों को हर महीने हजारों-लाखों रुपये के सरकारी विज्ञापन दे रहा है।
आरटीआई दस्तावेज़ों में जिन शहरों और राज्यों के मीडिया संस्थानों के नाम सामने आए हैं, उनमें रीवा, सतना, भोपाल, कोयम्बटूर, नोएडा, मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर और जालंधर जैसे शहर शामिल हैं। यानी छत्तीसगढ़ के करदाताओं के पैसों से चलने वाला जनसंपर्क विभाग देशभर की मीडिया को विज्ञापन देकर ‘उपकृत’ कर रहा है।
दस्तावेज़ों में कई बड़े मीडिया हाउसों के नाम भी दर्ज हैं, जिनमें बेनट कोलमैन एंड कंपनी (टाइम्स ग्रुप), दैनिक भास्कर, जागरण पब्लिकेशन, इंडिया डॉट कॉम, कोवई मीडिया, मोहल्ला टेक प्राइवेट लिमिटेड (द क्विंट) जैसे संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों को लाखों रुपये की राशि नियमित रूप से ट्रांसफर की गई है।
स्थानीय मीडिया की अनदेखी
स्थानीय पत्रकारों और मीडिया संगठनों का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की सरकार अपने ही राज्य के मीडिया को पर्याप्त विज्ञापन नहीं दे रही, जबकि बाहर के संस्थानों को मोटी रकम दी जा रही है। इससे न सिर्फ स्थानीय मीडिया कमजोर हो रही है, बल्कि राज्य में मीडिया की आत्मनिर्भरता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नीति या नेटवर्क?
जानकारों का मानना है कि यह मामला सिर्फ विज्ञापन नीति का नहीं, बल्कि पावर नेटवर्किंग और ‘अनुकूल कवरेज’ हासिल करने की रणनीति का भी हो सकता है। बड़े राष्ट्रीय मीडिया समूहों को विज्ञापन देकर सरकार अपने पक्ष में नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है।
जनहित का सवाल
यह पूरा मामला सीधे तौर पर जनहित से जुड़ा है, क्योंकि यह पैसा छत्तीसगढ़ की जनता के टैक्स से आता है। सवाल यह है कि क्या यह पैसा छत्तीसगढ़ की जनता की सूचना जरूरतों पर खर्च हो रहा है या बाहरी मीडिया की तिजोरी भरने में?
अब निगाहें इस पर हैं कि राज्य सरकार और जनसंपर्क विभाग इस आरटीआई खुलासे पर क्या जवाब देते हैं और क्या विज्ञापन नीति की निष्पक्ष समीक्षा होगी या नहीं।
कुणाल शुक्ला-
RTI से निकाला हुआ ये दस्तावेज देखिए, छत्तीसगढ़ का जनसंपर्क दूसरे प्रदेशों के पत्र पत्रिकाओं को बड़े पैमाने पर उपकृत कर रहा है। रीवा, सतना, भोपाल, कोयम्बटूर, नोएडा, मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, जालंधर, के लोग आ कर इनसे हज़ारों लाखों का विज्ञापन प्रतिमाह ले जा रहे हैं।
सवाल ये है की क्या किसी छत्तीसगढ़ी को किसी दूसरे प्रदेश के जनसंपर्क ने कभी विज्ञापन दे कर उपकृत किया है? जवाब है ..नहीं। तो फिर छत्तीसगढ़ का जनसंपर्क बाहरी राज्यों के पत्र पत्रिकाओं को क्यों और कैसे उपकृत कर रहा है?




