
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में दिल्ली में चुनाव की घोषणा ही बड़ी खबर है और ज्यादातर अखबारों में वही लीड है। तिब्बत में भूकंप के साथ, इंटरपोल से ज्यादा मजबूत होगा भारतपोल आटे में नमक बराबर है लेकिन असली खेल दिल्ली चुनाव ही है जिसे समझने की जरूरत है और इस्तीफा देकर ज्यादा लोकप्रिय होकर उभरने का अरविन्द केजरीवाल का दांव है तो भाजपा मुद्दों के नाम पर ठन-ठन गोपाल से ज्यादा नहीं है। ऐसे में आज इंडियन एक्सप्रेस ने आज कमजोर विनिर्माण और निवेश के कारण चार साल में 6.4% के सबसे कम विकास अनुमान की खबर को लीड बनाया है। फ्लैग शीर्षक है, जीडीपी : पहली छमाही की मंदी पूरे साल के विकास पर भारी है। यह खबर द हिन्दू में सेकेंड लीड है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर तीन कॉलम में है। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी यह सेकेंड लीड है। दि एशियन एज में यह सिंगल कॉलम में है। द टेलीग्राफ में यह बिजनेस पेज पर लीड है। हिन्दी के मेरे दोनों अखबारों, नवोदय टाइम्स और अमर उजाला में यह पहले पन्ने पर नहीं है।
इनमें कुछ अखबारों ने शीशमहल पर भाजपा के आरोपों को महत्व दिया है जबकि इसमें झूठ भी है। भाजपा का झूठ अब पहले के मुकाबले बेशर्म और बेहद नंगा होता जा रहा है और शायद इसीलिये मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है, महिलाओं के खिलाफ गंदे कमेंट नहीं किये जाने चाहिये। इसकी जितनी निन्दा की जाये कम है। लाइन क्रॉस होगी तो हम कार्रवाई करेंगे। कहने की जरूरत नहीं है कि लाइन संसद-विधानसभा में पार की जाये तो चुनाव आयोग का काम नहीं होगा और चुनाव के समय की जाये तो आयोग संबंधित पार्टी के अध्यक्षों से अपेक्षा करेगा कि वे काम करें और तब तक चुनाव प्रचार पूरा हो जायेगा। यह सब हम देख चुके हैं हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त के कहने का मतलब यह भी हो सकता है कि अभी लाइन क्रॉस नहीं की गई है। पर वह अलग मुद्दा है।
आज का मुद्दा तो शीश महल यानी दिल्ली के मुख्यमंत्री का निवास 6 फ्लैग स्टाफ रोड, दिल्ली है। आप जानते हैं कि अरविन्द केजरीवाल इसमें रह रहे थे और बताया जाता है कि इसके पुनरुद्धार पर भारी खर्च की गई है। मोटे तौर पर यह 40 करोड़ से कम है फिर भी तथ्य यह है कि अरविन्द केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया है और अब उसमें मौजूदा मुख्यमंत्री अतिशी रह रही हैं (थीं)। मुख्यमंत्री बदलने और उसमें रहने वाले के बदलने के दौरान पर्याप्त विवाद हुआ था और अखबारों में खबर-फोटो छपी थी कि मुख्यमंत्री को अपना सामान वहां से हटाना पड़ा। इन सबके बावजूद हिन्दुस्तान टाइम्स में आज की एक खबर का शीर्षक है, बंगले की कहानी में ट्विस्ट : अतिशी ने कहा, निकाला गया; (रहने के लिए) पहुंची ही नहीं : भाजपा। दि एशियन एज में यह खबर चार कॉलम में है, “अतिशी ने कहा, तीन महीने में दो बार खाली कराया गया”। उपशीर्षक में दो बाते हैं, 1) केंद्र पर आरोप और 2) मुख्य मंत्री झूठ बोल रही हैं, वे कब्जा लेने में नाकाम रहीं : भाजपा। हाईलाइट किया हुआ अंश है, अतिशी (दिल्ली की मुख्यमंत्री) ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास को छीन लिया है और इसके लिए तीन महीने में दूसरी बार आवंटन रद्द कर दिया है। दूसरी खबरों में इस मुख्य बात को प्रमुखता से नहीं कहा गया है जबकि जाहिर तौर पर केंद्र सरकार की इस तरह की कार्रवाई मुख्यमंत्री को अपना काम करने में बाधा डालने की तरह है। भाजपा यह सब तब कर रही है जब एक निर्वाचित और स्पष्ट बहुमत वाले मुख्यमंत्री को पहली बार जेल में रखा जा चुका है और पर्याप्त सबूत नहीं होने के बावजूद सत्ता की ताकत से जेल में रखने की हर संभव कोशिश की गई। यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरविंद केजरीवाल को ‘अनुभवी चोर’ भी कहा है। आप जानते हैं कि राहुल गांधी ने क्या कहा था और क्या मुकदमा था जिसके लिए उन्हें सजा हो गई और संसद सदस्यता चली गई थी।
मुख्यमंत्री ने इसके बावजूद दोबारा जनादेश लेने का नैतिक साहस दिखाया है और इस्तीफा देकर चुनाव लड़ रहे हैं तो यह भी साबित करने का प्रयास किया है कि भाजपा किसी तरह चुनाव जीतने के अपने तमाम प्रयासों में मतदाता सूची से खिलवाड़ भी कर रही है। यह अलग बात है कि चुनाव आयोग ने इसे नहीं माना पर वह अलग मुद्दा है। शीश महल की खबर आज नवोदय टाइम्स में चार कॉलम में है। दो कॉलम की दो खबरें आमने-सामने। मुख्य शीर्षक है, अब मुख्यमंत्री आवास को लेकर विवाद। दो कॉलम की दो खबरों में एक का शीर्षक है, भाजपा ने अतिशी को फिर से मुख्यमंत्री आवास ले निकाला : अरविन्द केजरीवाल। दूसरी खबर का शीर्षक है, अतिशी बंगला विवाद के जरिये जनहित के मुद्दे से भटकाना चाहती हैं ध्यान : भाजपा। आप जानते हैं कि बंगला विवाद को प्रधानमंत्री ने नये सिरे से उठाया था और आम आदमी पार्टी इसमें झेलने और जवाब देने के अलावा कुछ नहीं कर सकती है। आज की खबरों से लगता है कि ऐन चुनाव से पहले इसे मुद्दा बनाये रखने के लिए भाजपा ने आवंटन फिर रद्द कर दिया है और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेव ने कहा है जो नवोदय टाइम्स में छपा है, अतिशी मार्लेना की समस्या है कि उन्हें बंगला विवाद को जिन्दा रखना है। अगर वे 6 फ्लैग स्टाफ रोड बंगले में जायेंगी तो आप संयोजक व पूर्व सीएम अरविन्द केजरीवाल नाराज होंगे और अगर 17 एबी मथुरा रोड छोड़ेंगी तो वहां रह रहे रिश्तेदार बिगड़ जायेंगे। यही नहीं, सचदेव ने यह भी कहा है कि …. मुख्यमंत्री ने बंगला विवाद छेड़ दिया है। आप जानते हैं कि चुनाव से पहले शीश महल की चर्चा प्रधानमंत्री ने शुरू की थी और भाजपा सिर्फ जवाब दे रही है। आज भी अतिशी का जो कहा है वह भाजपा (सरकार) का ही किया-धरा है। 31 दिन पहले आवंटन रद्द करने का मतलब आप समझ सकते हैं। और अगर यह गलत है तो भाजपा को सीधे कहना चाहिये कि अतिशी झूठ बोल रही हैं।
भाजपा ने ऐसा कुछ नहीं कहा है और जाहिर है अतिशी सही बोल रही हैं। भाजपा चाहती है कि आम आदमी पार्टी बंगला विवाद और बंगले में भी घिरी रहे ताकि वह खेल कर सके। आइये बंगला विवाद से जुड़ी कुछ खबरें और तारीखें बताऊं। एक मार्च 2015 की इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार यह घर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का निवास स्थान होना था। तब लोक निर्माण विभाग से कहा गया था कि अगर जरूरत हुई तो वह किसी बदलाव या नये निर्माण के लिए तैयार रहे।
https://indianexpress.com/article/cities/delhi/6-flagstaff-road-to-be-kejriwals-new-residence
जनसत्ता की 6 जनवरी 2025 की खबर के अनुसार, शीशमहल के इस विवाद की शुरुआत 2020 में कोविड महामारी और लॉकडाउन के दौरान हुई थी जब सीएम आवास की छत टूट गई थी। 1942 में निर्मित, लोक निर्माण विभाग के स्वामित्व वाली इस संपत्ति में तब पांच बेडरूम थे और एक अलग कार्यालय स्थान था। 2015 में केजरीवाल अपनी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के साथ इस घर में रहने आये थे। जब बंगले की छत की मरम्मत का काम चल रहा था, तो एक शौंचालय की छत भी ढह गई थी। इस कारण पूरे घर की संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट और उसके बाद नवीनीकरण की आवश्यकता महसूस की गई थी। कोविड के दौरान निर्माण की कई शिकायतों के बीच सरकार और नौकरशाही में गतिरोध के दौरान मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण में अनियमितताओं की सीमा को पूर्व मुख्य सचिव नरेश कुमार ने रेखांकित किया था। इस मामले में सितंबर 2023 में सीबीआई ने प्रारंभिक जांच दर्ज की। अगस्त 2024 में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने 6, फ्लैग स्टाफ रोड पर निर्माण से संबंधित गड़बड़ी में उनकी कथित भूमिका के लिए तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया।
खबर के अनुसार, केजरीवाल ने जब घर खाली कर दिया तो पीडब्ल्यूडी ने घर पर कब्ज़ा कर लिया और इसके अंदर की वस्तुओं की सूची बनाने पर जोर दिया। केजरीवाल से सीएम का पद संभालने वाली आतिशी घर में नहीं गईं। 11 दिसंबर को इस मुद्दे पर केजरीवाल पर हमला तेज करते हुए बीजेपी ने घर के अंदरूनी हिस्सों के कई कथित “टूर वीडियो” जारी किए, साथ ही दिल्ली का करोड़पति शीर्षक वाला एक रैप गीत भी जारी किया। बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए आप ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रीय राजधानी में ‘कानून व्यवस्था की खराब स्थिति को उजागर करने के केजरीवाल के प्रयास से ध्यान हटाने के लिए उन पर निशाना साध रही है। पुराने घर की “जर्जर” स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, आप नेता संजय सिंह और राघव चड्ढा ने इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार को उचित ठहराने की कोशिश की और बताया कि केजरीवाल के बुजुर्ग माता-पिता के साथ उनके बच्चे भी इसमें रहते थे। आप ने यह भी कहा था कि यह मकान केजरीवाल की “निजी” संपत्ति नहीं है और मुख्यमंत्री के आवास के रूप में इसे भविष्य में दूसरों को आवंटित कर दिया जाएगा। घर की मरम्मत और नवीनीकरण के ऑडिट का विवरण देने वाली सीएजी रिपोर्ट से पता चलता है कि 7.91 करोड़ रुपये के प्रारंभिक अनुमान से, 2022 में काम समाप्त होने तक काम की कुल लागत 33.66 करोड़ रुपये हो गई।
इस खबर और आरोपों से स्पष्ट है कि बंगले के पुनरुद्धार पर 33.66 करोड़ रुपये खर्च किये जाने का आरोप है और इसी को ज्यादा कहा जा रहा है और इसी बड़ी या भारी राशि के कारण इसे शीश महल नाम दिया गया है। यहां बुनियादी तथ्य यह है कि बंगला अगर बड़ी भूमि पर हो तो चारदीवारी बनाने का खर्च भी ज्यादा आयेगा। सुरक्षा कारणों से यह ऊंची और मजबूत बनानी होगी, कैमरे लगाने पड़ सकते हैं और संतरी के रहने की व्यवस्था भी करनी पड़ सकती है। पांच कमरे का बंगला बहुत छोटी जमीन में होगा तो यह खर्च बहुत कम होगा और बड़ी जमीन पर ज्यादा होगा। इसका संबंध उसमें रहने वाले उपलब्ध धन से नहीं है। इस तरह पांच कमरे का मुख्यमंत्री का निवास तो बहुत बड़ा नहीं हुआ और शायद ही कोई मुख्यमंत्री इससे कम बेडरूम के घर में रहता हो। अगर यहां कमरे बड़े हैं या महंगे हैं तो उसका कारण बड़ा प्लाट और दिल्ली में होना भी हो सकता है। इन सबके बावजूद भ्रष्टाचार की गुंजइश है ही। पर मुद्दा यह है कि क्या मुख्य मंत्री को इतनी भी आजादी नहीं है और इसे तय कौन करेगा या जो कर रहा है वह नाम लिखा सूट उपहार में ले चुका है। नाम लिखा सूट उपहार में लेना और सरकारी पैसा अपने लिये कुछ ज्यादा खर्च कर देना – कौन बड़ा भ्रष्टाचार है और किसपर कार्रवाई होनी चाहिये इसका फैसला बहुमत से होगा या अखबारों की खबरों से? जो भी हो, मुझे लगता है कि यह मुद्दा नहीं है और भाजपा ने अगर इसे मुद्दा बनाया है तो इसीलिए कि उसके पास इससे बेहतर मु्द्दा नहीं है।
अगर ए1 के 20,000 करोड़ रुपये और उन्हें मिले संरक्षण को देखा जाये तो अभी तक कितने 36 करोड़ हर महीने के ब्याज से ज्यादा होंगे जिसे कायदे से जब्त कर लिया जाना चाहिये था। और नहीं तो जिनलोगों ने कार्रवाई नहीं की उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये थी। अगर पुनरुद्धार में ज्यादा पैसे खर्च कर दिये जाने की बात है तो मैंने कल भी लिखा था गुजरात का पुल पांच साल में बेकार हो गया और तोड़ने पर 36 करोड़ से ज्यादा खर्च होने हैं। इसलिए मेरा मानना है कि भाजपा मुद्दा बनाये तो बनाये अखबार क्यों साथ दे रहे हैं और दे रहे हैं तो भाजपा के खिलाफ जो मुद्दे हैं उनकी चर्चा कभी क्यों नहीं होती है। जो भी हो भाजपा और नरेन्द्र मोदी अगर 1947 और इमरजेंसी के समय के मामले उठाते है और अपने अंदाज में पेश करते हैं तो शीश महल का मामला पुराना नहीं है और याद होना चाहिये। फिर झूठे आरोपों को क्यों हवा दी जा रही है? आज जो आरोप छपे हैं उन्हें सच और झूठ बताने वाली खबरें ये रहीं और इनमें सबसे पुरानी 11 अक्तूबर की है यानी अभी तीन महीने भी नहीं हुए हैं।
1. पीडब्ल्यूडी ने 6 फ्लैग स्टाफ रोड का बंगला दिल्ली की मुख्यमंत्री को ऑफर किया।
इसमें अखबार ने बताया है कि इससे पहले विवाद हुआ था जिसमें उनके सामान हटा दिये गये थे। कथित रूप से भाजपा के दबाव के कारण। विवाद में यह दावा शामिल था कि बंगला भाजपा के नेता को आवंटित किया जाना था।
दि इकनोमिक टाइम्स, 11 अक्तूबर 2024
2. राज निवास ने दिल्ली की मुख्यमंत्री अतिशी को फ्लैग स्टाफ रोड का बंगला सौंपने में (नियमों के) उल्लंघन को रेखांकित किया।
द हिन्दू, 13 अक्तूबर 2024
3. फ्लैग स्टाफ रोड के बंगले के पुनरुद्धार की लागत पर भाजपा और आप में भिड़ंत। तब अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि केंद्र सरकार चाहे तो बंगले को अपने पास रखे। इसके बावजूद दिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेन्द्र सचदेव को इसी खबर में यह कहते हुए लिखा गया था कि केजरीवाल और मुख्यमंत्री चाहते हैं कि इसमें खर्च हुए पैसे (लगे सामानों) के कारण बंगला उनके पास रहे।
हिन्दुस्तान टाइम्स, 21 अक्तूबर 2024
4. केजरीवाल के लिए और मुश्किलें? खुफिया विभाग ने लोक निर्माण विभाग से फ्लैग स्टाफ (रोड बंगले के) खर्च का विवरण मांगा। इससे संबंधित रिपोर्ट पांच दिन में देने के लिए कहा गया था। भाजपा ने 20 नवंबर को इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। तब एलजी वीके सक्सेना ने यह आदेश दिया था। इसमें इस बात की भी पहचान होनी थी कि बंगले में लगे सामान किन लोगों या संस्थाओं ने मुहैया कराये हैं, इनके बदले क्या कोई वित्तीय लेन-देन हुआ है, सरकारी धन पर संभावित प्रभाव और अन्य संबंधित सूचनाएं जिससे इन सामानों से संबंधित स्थितियों को स्पष्ट किया जा सके।
हिन्दुस्तान टाइम्स, 27 दिसंबर 2024
जाहिर है, इसमें अपने पैसे से कोई महंगा और जरूरी या पसंदीदा पर महंगा सामान लगवाने की भी संभावना है पर उसकी बात नहीं है। पीडब्ल्यूडी ने अखबार को मांगने पर कोई विवरण नहीं दिया। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद केजरीवाल ने 04 अक्तूबर को बंगला खाली कर दिया था। कहने की जरूरत नहीं है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से ऐन पहले खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसका मुद्दा उठाया था। फिर अमित शाह और दूसरे भाजपाइयों ने इसे बनाये रखा है। सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री ने खुद इस्तीफा दिया है उनसे किसी ने कहा नहीं है। भाजपा का प्रचार और प्रयास है ही कि केजरीवाल फिर नहीं जीत पायें। अगर केजरीवाल को ऐसी कोई आशंका या संभावना लगती, शीश महल से लगाव होता तो वे इस्तीफा क्यों देते? यही नहीं, हिन्दुस्तान टाइम्स की इस खबर के अनुसार केजरीवाल पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को आवंटित बंगले में रहने चले गये और जाहिर है वे चाहते तो ऐसे ही मुख्यमंत्री निवास में भी रह सकते थे पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है तो बंगले को क्यों रखना और अगर खुद भारी खर्च करके अपनी पंसद का ‘शीश महल’ बनवाया भी था तो उसे सहकर्मी को दे दिया। इसमें जो अच्छाई है वह भले भाजपा नेताओं को नहीं दिखी या उसकी चर्चा नहीं हुई पर उसे नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिये।


