गोरखपुर में सीएमओ कार्यालय परिसर में हुए 15 लाख रुपये के बहुचर्चित ठगी कांड में अब लगातार नई-नई कड़ियाँ जुड़ती जा रही हैं। घटनाक्रम की हर परत खुलने के साथ सीएमओ कार्यालय की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल संचालक का सीधा आरोप है कि मुख्यमंत्री का OSD और सीएमओ बनकर आए ठगों ने उसके अस्पताल पर गठित जांच को “मैनेज” कराने की कीमत 15 लाख रुपये बताई और उसे सीएमओ कार्यालय के प्रांगण में बुलाकर यह रकम वसूल ली।
संचालक का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में सीएमओ गोरखपुर और कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध है। एक तरफ सीएमओ कार्यालय खुद को पूरी तरह निर्दोष बता रहा है, लेकिन दूसरी ओर घटनाक्रम और परिस्थितियाँ सीधे-सीधे सीएमओ कार्यालय की ओर इशारा कर रही हैं। घटनाक्रम की संदिग्ध कड़ियाँ घटना से जुड़े तथ्य कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। मसलन…
- 28 फरवरी : सीएमओ प्रांगण में अस्पताल संचालक से 15 लाख रुपये लिए गए
- उसी दिन : अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया
- उसी दिन : जबकि संचालक ने ठगी की कोई शिकायत नहीं दी थी, फिर भी सीएमओ ने साइबर थाने में ठगी की तहरीर दे दी
- जहाँ रुपये दिए गए वहाँ का CCTV कैमरा “खराब” निकला
- ठगी के मुख्य संदिग्ध “गोल्डन बाबा” के साथ सीएमओ के पुराने संबंधों की चर्चा और गोल्डन बाबा की 15 लाख के सम्बंध में कॉल रिकॉर्डिंग
- सीएमओ कार्यालय में तैनात बाबू रत्नाकर शुक्ला द्वारा ठगी से पहले संचालक को ठगों की बात पर भरोसा दिलाना
थाना कैंट पुलिस की अनोखी शर्त
इन सभी परिस्थितियों का ठगी से ठीक पहले और उसी दिन बनना महज संयोग नहीं हो सकता। यह सवाल अब पूरे मामले की जड़ में खड़ा है। इस मामले में घटना के दूसरे ही दिन पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, लेकिन आरोपियों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हो गया। अब यह चौंकाने वाली बात ही है कि जिस व्यक्ति के 15 लाख रुपये ठगे गए, उसकी तहरीर पर पुलिस ने अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया। जबकि जिन पर ठगी का आरोप लग रहा है, उनकी तहरीर पर पुलिस अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर “हवा में तीर” चला रही है। अस्पताल संचालक का कहना है कि जब उसने इस बात की शिकायत एसएसपी से की तो उन्होंने मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया।
निर्देश के अनुसार तहरीर में आवश्यक संशोधन भी कर दिए गए। लेकिन जब संचालक थाना कैंट पहुँचा तो थानेदार ने एक अनोखी शर्त रख दी कि तहरीर में से सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों और कथित गोल्डन बाबा का नाम निकाल दो… तब मुकदमा लिखा जाएगा। संचालक ने नाम हटाने से इनकार कर दिया और परिणाम यह हुआ कि मुकदमा आज तक दर्ज नहीं हुआ।
दैनिक जागरण के रिपोर्टर की रिकॉर्डिंग ने खोले कई राज
इस पूरे प्रकरण में दैनिक जागरण के पत्रकार दुर्गेश त्रिपाठी का एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह रिकॉर्डिंग न केवल घटना की पुष्टि करती है, बल्कि पत्रकारिता और पुलिसिया कार्यशैली की परतें भी खोलती है। रिकॉर्डिंग में पत्रकार घटना को सही बताता हैं, सीएमओ कार्यालय की भूमिका से इनकार भी नहीं करता,“गोल्डन बाबा” की संलिप्तता की चर्चा भी करता हैं और यह भी कहता हैं कि पूरी मीडिया इस सच्चाई को जानती है। अब सवाल यह है कि अगर सबको सच्चाई पता है, तो फिर अखबारों में इस घटना को संदिग्ध बताने वाली फर्जी खबरें क्यों छप रही हैं? सुने ऑडियो
असली नाराज़गी : सिस्टम वेबसाइट मीडिया
दरअसल अखबारी पत्रकारों की असली नाराज़गी का कारण कुछ और बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार 15 लाख की ठगी का यह पूरा मामला मीडिया के सहयोग से चुपचाप “मैनेज” कर लिया गया था। लेकिन तभी “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने इस मामले का सनसनीखेज खुलासा कर दिया और यहीं से पूरा खेल बिगड़ गया। यह वही वेबसाइट मीडिया है जिसने पहले भी कई “खबर मैनेजमेंट” के खेल उजागर किए,कई पत्रकारों और संपादकों को अदालत तक पहुँचा दिया, और बिना दस्तावेज़ के खबर चलाने की प्रवृत्ति को चुनौती दी। अस्पताल संचालक भी इसी वजह से अपनी पीड़ा लेकर सिस्टम वेबसाइट मीडिया के पास पहुँचा था।
खोजी पत्रकार सत्येंद्र पर पत्रकारों के कारण ही लगाया गया था गैंगस्टर : दैनिक जागरण
दैनिक जागरण का पत्रकार खुद ही रिकॉर्डिंग में संचालक से यह कहते हुए बड़ा खुलासा कर रहा है कि “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” पर गैंगेस्टर पत्रकारों के कारण ही लगाया गया था और आप “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के पास गए इसलिए सब नाराज हैं, और इसलिए गोरखपुर का अखबारी जगत इस पूरे प्रकरण पर “झूठ का पैबंद” लगाने में जुटा हुआ है।


