आखिर विवादास्पद अफसरों को ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों देती है अखिलेश सरकार?

अखिलेश सरकार ने अपने उस विवादास्पद फैसले को सुधार लिया है जिसके चलते एक बदनाम अफसर को प्रदेश की कानून व्यवस्था की कमान सौंप दी गयी थी। वीकएंड टाइम्स में प्रमुख सचिव गृह दीपक सिंघल के कारनामों की खबर प्रकाशित होने के बाद हड़कंप मच गया था। यह खबर सोशल साइट पर बड़ी संख्या में शेयर हुई और दबाव बढ़ता देखकर दीपक सिंघल को प्रमुख सचिव गृह के पद से हटा दिया गया था।

वीकएंड टाइम्स ने विस्तार से छापा था कि दीपक सिंघल की भ्रष्ट छवि के चलते उन्हें कानून व्यवस्था संभालने वाले गृह विभाग की कमान देने से महकमे में अच्छा संदेश नहीं जायेगा। खबर छपी थी कि यू ट्यूब पर दीपक सिंघल और अमर सिंह की विवादास्पद बातचीत के टेप मौजूद हैं जिसमें अमर सिंह दीपक सिंघल से किसी देवेन्द्र सिंह को 97 लाख रुपये देने की मांग कर रहे हैं और दीपक सिंघल इन रुपयों को देने के लिए हामी भर रहे हैं।
 
वीकएंड टाइम्स ने यह भी छापा था कि इन टेपों में विस्तार से बताया गया है कि किस तरह दीपक सिंघल अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए अमर सिंह से अनुरोध कर रहे हैं साथ ही जमीने किस तरह पूंजीपतियों को दी जाये इसकी रणनीति भी अमर सिंह को समझा रहे हैं। जाहिर है ऐसी बातें सरकार के लिए आने वाले समय में परेशानी का सबब बन सकती थीं।

खबर छपने के तुरंत बाद कांग्रेस, भाजपा और बसपा ने भी दीपक सिंघल की तैनाती का भारी विरोध किया था। भाजपा प्रवक्ता चंद्र मोहन ने कहा था कि इस तरह किसी बदनाम अफसर को कानून व्यवस्था की कमान सौंपने के बाद ये उम्मीद करना बेमानी है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक हो जायेगी। कांग्रेस के प्रवक्ता अशोक सिंह ने भी दीपक सिंघल की तैनाती तीखी आलोचना की थी। नौकरशाही में भी दीपक सिंघल की तैनाती की भारी चर्चाएं थीं। नौकरशाह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर दीपक सिंघल में ऐसा क्या हुनर है जो अपनी विवादास्पद छवि के बावजूद इतनी प्राइम पोस्टिंग पा जाते हैं।

जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने भी वीकएंड टाइम्स में खबर छपने के बाद मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि दीपक सिंघल के इन टेपों को लेकर सरकार सफाई दें और अपना नजरिया साफ करें। उन्होंने पत्र में मांग की थी कि दीपक सिंघल को तत्काल उनके पद से हटाया जाये।

मुख्यमंत्री तक वीकएंड टाइम्स की खबर पहुंची और सरकार को समझ में आया कि दीपक सिंघल की तैनाती से सरकार को आने वाले समय में भारी बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा तैनाती के चैदहवें दिन ही दीपक सिंघल को प्रमुख सचिव गृह के पद से हटा दिया गया। मगर मामला इससे शांत नहीं हुआ और विपक्ष इस पर और हमलावर होता रहा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कांत बाजपेई ने सरकार से मांग की कि उन कारणों का उल्लेख किया जाना चाहिए जिसके चलते दीपक सिंघल को पहले प्रमुख सचिव गृह बनाया गया और बाद में हटा दिया गया। इंडिया न्यूज ने भी दीपक सिंघल की तैनाती को लेकर कई स्पेशल बुलेटिन चलाये जिसको लेकर भी सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
 
दीपक सिंघल की तैनाती से अखिलेश सरकार की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में आ गयी है। नौकरशाहों के चयन में लगातार हो रही गलती से सरकार की किरकिरी हो रही है। लोग समझ नहीं पा रहे कि आखिर मुख्यमंत्री ऐसे विवादास्पद अफसरों को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दे रहे हैं। समाचार प्लस चैनल के यूपी के हेड आलोक पांडे का मानना है कि अफसरों की तैनाती से पूरे सरकार की छवि पर असर पड़ता है। लिहाजा सरकार को वही अफसर तैनात करने चाहिए जिनकी छवि अच्छी होती है।

बिजनेस स्टैंर्डड के ब्यूरो चीफ और राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के सचिव सिद्घार्थ कलहंस का कहना है कि यह बात सभी को पता है कि दीपक सिंघल पैसों के मामले को लेकर बदनाम रहे हैं। इन स्थितियों में यह बात सरकार के शीर्ष लोगों को न पता हो यह संभव नहीं है। फिर आखिर ऐसे कौन से लोग हैं जो मुख्यमंत्री पर दबाव डालकर यह फै सला करवा रहे हैं या फिर मुख्यमंत्री खुद ही अपनी सरकार की किरकिरी करवा रहे हैं यह देखने की बात है।

दीपक सिंघल को फिलहाल सिंचाई  महकमे का प्रमुख सचिव बनाये रखा गया है यहां वह पहले भी तैनात थे और प्रमुख सचिव गृह बनने के बावजूद यह पद छोड़ने को राजी नहीं थे क्योंकि यह बेहद मलाईदार पद माना जाता है। दीपक सिंघल भी अब उस घड़ी को कोस रहे होंगे जब वह प्रमुख सचिव गृह के पद पर तैनात हुए क्योंकि उसके बाद ही उनके गड़े मुर्दे निकलकर सामने आये और लोगों को पता चला कि वह अमर सिंह के संग मिलकर प्रदेश में भ्रष्टाचार के कैस- कैसे कारनामे करने में जुटे हुए थे। जाहिर है अभी इस विवाद का अंत नहीं हुआ है।

लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और वीकएंड टाइम्स के संपादक हैं.



 

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