भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार में देश की मीडिया का गजब हाल हो चला है। ये लोग जनता को उल्लू समझकर सरकार की तेल मालिश में डूबे हुए हैं। इन लोगों ने क्या नया कांड किया है, नीचे एक एक कर पढ़ जाइये…
विक्रांत यादव-
बताइए, पढ़ाई लिखाई से दूर दूर तक नाता ना रखने वाले मेनस्ट्रीम के पत्रकार बता रहे हैं, रूस से तेल लेना तो कभी बंद ही नहीं किया था. (सारा ज्ञान व्हाट्सएप पर भेजा गया और same to same उलट दिया गया)
अरे भाई थोड़ा पढ़ा करो, थारे फूफा से कहो कि एक बार खुलकर कह दें, ये ट्रंपवा झूठा है
संदीप देव-
पत्रकार हो तो अध्ययन किया करो भाई। यह ठीक है कि मामाजी के कारण पत्रकारिता कर रहे हो, लेकिन चापलूसी में देश तो मत बेचो। अब आंकड़े लो:-
दिसंबर 2025 रणनीतिक बदलाव: भारत का रूसी तेल आयात 38 महीने के निचले स्तर ($2.7 अरब) पर आ गया। वहीं अमेरिका से आयात में 31% की वृद्धि दर्ज की गई।
जनवरी 2026 ऐतिहासिक गिरावट: रूसी तेल का आयात $1.98 अरब तक गिर गया, जो 44 महीनों में सबसे कम था। बाजार हिस्सेदारी मात्र 19.3% रह गई थी।
फरवरी 2026 व्यापार समझौता (Interim Deal): अमेरिका ने दंडात्मक शुल्क 25% से घटाकर 18% किया। बदले में भारत ने रूसी तेल कम करने की ‘अघोषित’ सहमति दी। रूसी तेल की हिस्सेदारी गिरकर 19.3% से 21.5% के बीच थी।
मार्च: वर्तमान संकट और ‘वेवर’: ईरान-इजरायल तनाव के कारण अमेरिका ने भारत को रूसी तेल के लिए 30 दिन की छूट (Waiver) दी। भारत फिर से रूस से 95 लाख बैरल अतिरिक्त तेल की बात कर रहा है।
पढ़ा-लिखा करो। तुम लोगों ने पत्रकारिता का बेड़ा गर्क कर दिया है दरबारी पट्टा पहनने की होड़ में!
अमीष देवगन, हर्षवर्धन त्रिपाठी के बाद अब चित्रा त्रिपाठी का ट्वीट सेम टू सेम! अर्थात संघी पत्रकारों को हिरेन जोशी से एक समान व्हाट्सएप मिला है आज शेयर करने और शो करने के लिए, क्योंकि आखिर देश से बड़ा इनके लिए मोदी सरकार है, जिनके हर झूठ को इन्हें जस्टिफाई करके जनता को मूर्ख बनाना है!
अच्छा यही बात सरकार खुद अपने बयान में प्रेसवार्ता कर क्यों नहीं अमेरिका को झुठलाने के लिए कह देती, जो अपने बैक चैनल के जरिए जनता को गुमराह कर रही है!


सुप्रिया श्रीनेत-
PMO के चपरासी का WhatsApp क्या आया सारे चरणचुंबक ऐक्टिव हो गए। यह जो crude oil पर ज्ञान दे रहे हैं – इनमें से अधिकतर यह नहीं बता पाएंगे कि Brent Crude क्या है?
इन बेचारों का ना तो दिमाग़ है, ना ज़मीर और ना हैसियत कि यह पूछ लें कि अमेरिका हमें “इजाज़त” देने वाला कौन होता है भाई?
कृष्ण कांत-
लगता है जोशी जी का व्हाट्सएप पहुंच गया है। इन कथित पत्रकारों की इतनी औकात नहीं है कि एक सवाल पूछ लें। इनसे नहीं पूछा जाएगा कि “अमेरिका के बयान में “इजाजत” और “छूट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों हुआ?
छूट किसको देते हैं? जिसको बाँध रखा हो, जिसपर बंधन हो। इजाजत किसको देते हैं? जो आपसे हुक्म लिए बगैर काम न करे।
ये सब भारत को अंतहीन गुलामी में धकेलने के प्रोजेक्ट पर काम करने वाले प्यादे हैं।



