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सुख-दुख

कुछ क्षण के लिए दलाई लामा अपने लौकिक होश के बाहर चले गये थे!

संजय तिवारी-

दलाई लामा कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। जो दलाई लामा चुने जाते हैं उनक बारे में कहा जाता है कि वो बुद्ध की ही शुद्ध चेतना होती है जिसका बचपन में एक विशिष्ट विधि से खोज कर ली जाती है।

दलाई लामा अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। वो तिब्बती बौद्ध संप्रदाय के जीवित देव होते हैं। उनकी एक आज्ञा या इच्छा तिब्बती बौद्धों के लिए दैवीय इच्छा के समान होती है।

लेकिन उन दलाई लामा ने क्या किया? एक नौजवान से लिप लॉक किस किया। वो इतने पर ही नहीं रुके। अपनी जीभ निकाल दिया कि इसे चूसो। वो यह सब एक सभा के दौरान कर रहे थे जिसे देखकर देव माननेवाले तिब्बती बौद्धों की सारी सभा सन्न हो गयी।

मुझे नहीं मालूम तिब्बती बौद्ध इसे किस रूप ले लेंगे क्योंकि वो दलाई लामा की निंदा तो कर नहीं पायेंगे।

जितना मैं समझ रहा हूं कुछ क्षण के लिए ही सही दलाई लामा अपने लौकिक होश के बाहर चले गये थे। या तो बच्चे की तरह कोमल दलाई लामा भौतिक रीति नीति भूल गये या फिर उनके अतिन्द्रिय मन मानस का कोई विकार फूट पड़ा।

इसे किस धरातल पर देखें समझ नहीं आ रहा। हमारे गुरु जी कहते थे परमहंस अवस्था बहुत कठिन होती है। इसमें जीव शिशुवत कोमल हो जाता है। कोई आश्चर्य नहीं कि उसे पेशाब लगे और वह धोती में ही पेशाब कर दे। टट्टी आई तो जहां बैठा है वही टट्टी कर दे। वह शिशुवत कोमल होता है। ऐसा करते हुए उसे बिल्कुल असहज नहीं लगता लेकिन संसार को मन नहीं दिखता। उसे काया दिखती है और काया द्वारा किया गया व्यवहार दिखता है।

दलाई लामा उच्चतर चेतना हैं। फिर भी उनके शरीर ने जो किया वह क्यों किया यह तो वो ही जानें। लेकिन लौकिक रूप से इससे उनकी छवि को को पहली बार गहरा धक्का लगा है।

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