
संजय कुमार सिंह
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन के 40 दिन हो चुके हैं। यह गलतफहमी खत्म हो चुकी है कि उनकी मांग पंजाब सरकार से है या उनकी मांग के सिलसिले में पंजाब सरकार को कुछ करना है। पंजाब सरकार की भूमिका उनके स्वास्थ्य को लेकर थी और अभी तक जो खबरें छपीं हैं वह यही कि बेहतर चिकित्सा के लिए पंजाब सरकार को उन्हें अस्पताल में दाखिल करा देना चाहिये। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है। अभी तक आमतौर पर यही होता रहा है कि अगर सरकार ऐसे किसी आंदोलन के मीडिया कवरेज से परेशान हो जाये तो जबरन संबंधित अनशनकारी को अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है और आमरण अनशन अपने आप खत्म हो जाता है। भाजपा की राजनीति और आंदोलनों से निपटने का उसका तरीका अलग है। मीडिया उसे परेशान करता नहीं है और वह किसानों को दिल्ली आने ही नहीं दे रही है। अब तो जमाना हो चला और इस बार के विधानसभा चुनाव में हरियाणा में मिली अप्रत्याशित सफलता के बाद अब तो डबल इंजन वाले हरियाणा में भी किसानों को घुसने नहीं दिया गया। डल्लेवाल का अनशन पंजाब में चल रहा है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कुछ दिन भ्रम बना रहा। केंद्र सरकार ने अपने वादे के बावजूद कुछ नहीं किया वह मुद्दा ही नहीं बना। खबरों का जो हुआ उसके बारे में मैं बता चुका हूं। संक्षेप में यह कि केंद्र सरकार आंदोलन से किसी दबाव में नहीं है, सुप्रीम कोर्ट में कहा जा चुका है कि मामला पूरे देश का है और केंद्र सरकार छोटे से समूह से बात नहीं करेगी आदि आदि।
ऐसे में आज इंडियन एक्सप्रेस में लीड खबर है कि आमरण अनशन के 40 दिन हो गये, पंजाब सरकार ने कहा है कि ज्यादातर मांगे केंद्र सरकार से संबंधित हैं और वह किसानों से वार्ता शुरू करे। इंडियन एक्सप्रेस की खबर का उपशीर्षक है, पंजाब के मंत्री ने कहा, एमएसपी समेत ज्यादातर मांगें केंद्र के अधिकार में हैं। द हिन्दू में यह सेकेंड लीड है। शीर्षक है, डल्लेवाल ने सभी राज्यों के किसानों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। नवोदय टाइम्स में आज यह खबर पहले पन्ने पर है। यहां बताया गया है कि डल्लेवाल के अनुसार एमएसपी की जरूरत पूरे देश को है। वैसे यह कोई नई बात नहीं है और बच्चा-बच्चा जानता है। फिर भी डल्लेवाल को कहना पड़ा है (और दूसरे अखबारों को पहले पन्ने पर छापने की जरूरत नहीं लगी है) कि केंद्र को यह संदेश दें कि लड़ाई अकेले पंजाब की नहीं है। डल्लेवाल ने यह अपील किसानों की महापंचायत में की जो खनौरी में हुई। खबर के अनुसार, डल्लेवाल ने अन्य राज्यों के किसान संगठनों से अपील की कि वे अपने राज्यों में एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर मजबूती से आंदोलन करें ताकि केंद्र को संदेश दिया जा सके कि यह अकेले पंजाब की लड़ाई नहीं है। मोटे तौर पर आज खबर यह भी है कि किसानों की इस महापंचायत की खबर आज अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है जबकि 11 मिनट के अपने भाषण में डल्लेवाल ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका जीवन किसानों से महत्वपूर्ण नहीं है।
आज के मेरे ज्यादातर अखबारों में यह खबर नहीं है जबकि शीशमहल की खबर इंडियन एक्सप्रेस में टॉप पर पांच कॉलम में है। आपने कल यहां पढ़ा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि उन्होंने अपने लिये घर नहीं बनाया और अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी को जो उपहार दिया वह दुनिया भर के सभी उपहारों में सबसे महंगा था। यही नहीं, आरटीआई से इसकी कीमत जानने की कोशिश की गई थी तो सरकार ने मना कर दिया। संयोग से अमेरिकी सरकार ने उसकी कीमत सार्वजनिक की जिसकी खबर कल द टेलीग्राफ में छपी थी। कहने की जरूरत नहीं है कि शीश महल का खर्च गलत या अनुचित है तो कार्रवाई की जानी चाहिये नहीं है तो उसकी चर्चा का कोई मतलब नहीं है। सबकी अपनी प्राथमिकता होती है और सबका विवेक है। अगर ऐसे खर्चों की आलोचना या प्रशंसा होनी है तो सबकी की जानी चाहिये। यह नहीं हो सकता है कि नरेन्द्र मोदी के खर्चे ठीक मान लिये जायें और बाकी सब बर्बादी है। इस लिहाज से अगर किसी मद में आम आदमी पार्टी का खर्च ज्यादा है तो भाजपा का खर्च भी कई मदों में ज्यादा हो सकता है। लेकिन मीडिया का मकसद अगर खबर देने से ज्यादा भाजपा की सेवा करना हो तो खबरों का चयन बदल जायेगा और यहां मैं उसी को रेखांकित करने की कोशिश करता हूं। भाजपा और मीडिया के समर्थन की हालत यह है कि आज इंडियन एक्सप्रेस में तो यह खबर है ही, हिन्दुस्तान टाइम्स में दिल्ली विधानसभा के लिए भाजपा उम्मीदवारों की सूची जारी किये जाने के साथ यह बताया गया है कि कहां किसका मुकाबला किससे है।
इस खबर के साथ दो कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, “(अमित) शाह ने ‘शीश महल’ पर आप प्रमुख की आलोचना की”। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने संसद में अभद्र भाषा का उपयोग करने वाले और मतदाताओं को नकद बांटते पकड़े गये लोगों को टिकट देने के लिए भाजपा की आलोचना की है। यही नहीं भाजपा के उम्मीदवार प्रवेश वर्मा और कांग्रेस के संदीप दीक्षित वंशवाद से आते हैं उसका भी उल्लेख होना चाहिये पर यह खबर सिंगल कॉलम में है। उम्मीदवारों की सूची टाइम्स ऑफ इंडिया में भी लीड है और यहां शीर्षक में ही कहा गया है, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे प्रवेश का मुकाबला केजरीवाल से होगा। अखबार ने इंट्रो में बताया है कि (भाजपा के गालीबाज उम्मीदवार) विधूड़ी का मुकाबला अतिशी से से होगा। दि एशियन एज की लीड बताती है कि प्रधानमंत्री ने ग्रामीण महोत्सव का उद्घाटन इस मौके पर कहा कि गांव विकसित भारत की कुंजी हैं। इस खबर का मुख्य शीर्षक है, “भारत को बांटने की कोशिश : मोदी ने जाति की राजनीति पर हमला बोला”। इसके साथ शीश महल पर अमितशाह के बयान का शीर्षक है, केजरीवाल ने दिल्ली में संरचना की बजाय शीश महल बनाया। यहां लीड के साथ एक और खबर का शीर्षक है, प्रधानमंत्री आज दिल्ली में कई परियोजनाएं लांच करेंगे।
द टेलीग्राफ में आज छत्तीसगढ़ में पत्रकार की हत्या पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है। कल मैंने लिखा था कि आज की खबर तो यह है। द टेलीग्राफ ने आज इस खबर के हवाले से बताया है कि घटना के बाद देश भर में पत्रकारों की सुरक्षा की मांग की जा रही है। आज सभी अखबारों की लीड अलग है। इंडियन एक्सप्रेस ने किसानों की खबर को बनाया है तो हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया ने दिल्ली विधानसभा चुनाव की खबर को लीड बनाया है। द टेलीग्राफ ने मणिपुर मामले में मोदी को राजधर्म की याद दिलाई है और लिखा है कि मणिपुर में दियासलाई की तीली होने के लिए भाजपा पर उंगली उठ रही है। ये खबरें दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर तो नहीं ही हैं जो हैं उनक चर्चा कर ही चुका हूं। नवोदय टाइम्स की आज की लीड दिल्ली में कोहरे पर है, कोहरा ही कोहरा। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर सेकेंड लीड है। अमर उजाला की आज की लीड का शीर्षक है, सेना का ट्रक खाई में गिरा, 4 जवान बलिदान।


