अमित चतुर्वेदी-

जबलपुर में पिछले दिनों ज़िला प्रशासन, ख़ास तौर पर Collector Jabalpur के द्वारा एक ऐसी कार्यवाही हुई जिसकी दूसरी मिसाल शायद ही पूरे देश में कोई दूसरी मिले। कलेक्टर जबलपुर ने पिछले दिनों पूरे 3 महीने जाँच करके निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फ़ीस वसूली, हर साल की जा रही मनमानी फ़ीस वृद्धि, बच्चों को ज़बरदस्ती सिलेबस के अतिरिक्त ग़ैर ज़रूरी ढेर सारी किताबें ख़रीदने और किताबें भी बिना या फ़र्ज़ी आईएसबीएन नंबर वाली बेचने के आरोप में शहर के सबसे नामी गिरामी स्कूलों और उनके संचालकों एवं अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ FIR करके जेल भेजने का काम किया गया।
2017 में राज्य शासन द्वारा शिक्षा अधिनियम बनाया गया था जिसमें शासन ने निजी स्कूलों के लिए नियम क़ानून और दिशा निर्देश जाती किए थे। इसमें स्कूल की फ़ीस कितनी होगी, हर वर्ष उसमें कितनी वृद्धि की जा सकेगी, बच्चों के स्कूल बैग का वजन उनकी क्लास के अनुसार कितना होगा, किताबें कौन सी होंगी, उनका सिलेबस क्या होना चाहिए जैसी अनेक बातें विस्तार से बताई गईं हैं। लेकिन शहर का कोई भी निजी स्कूल इनका पालन नहीं कर रहा था, सब अपनी मनमानी कर रहे थे।
इनकी मनमानी से जनता त्रस्त थी लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं थी। शिकायतें तो पहले भी हुई होंगी लेकिन इस बार जो कार्यवाही हुई वो अभूतपूर्व है। शहर के बड़े और बहुत रसूखदार स्कूल भी नहीं बचे। हर बड़े स्कूल का नाम इस कार्यवाही की ज़द में है।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस कार्यवाही से ज़िला कलेक्टर ने अभी तक सभी स्कूल प्रशासन से अभिभावकों को 81 करोड़ से भी ज़्यादा की ग़लत ढंग से बढ़ाई हुई फ़ीस वापस करवाने का आदेश जारी कर चुके हैं। लगभग इससे 3 गुना ज़्यादा की राशि अभी भी वापस करवाई जाना शेष है जिसके लीगल नोटिस स्कूलों को दिये जा चुके हैं।
शहर के सबसे नामी गिरामी स्कूलों के प्राचार्य और चेयरमैन समेत 21 लोग जेल भेजे जा चुके हैं, कुल 80 लोग अभी गिरफ़्तार किए जाना बाक़ी हैं।
इस अभूतपूर्व कार्यवाही के लिए पूरा ज़िला प्रशासन बधाई और सम्मान का पात्र है क्योंकि जिस समय ये जाँच शुरू होने की बात हुई थी तो सभी को लग रहा था कि जैसा कि हमारे देश में होता है, जाँच तो होगी लेकिन किसी न किसी लेवल पर मैनेज हो जाएगी, अधिकारी ईमानदार भी होंगे तो ऊपर से दबाव बनवाकर स्कूल संचालक जाँच रफ़ा दफ़ा करवा देंगे और अभिभावक जैसे ठगे जाते रहे हैं आगे भी वैसे ही ठगे जाएँगे।
लेकिन ये अपनी तरह का पहला मामला है जहां ग़लत करने वाले एक दो नहीं पचासों हैं और सब के सब बहुत बड़े और रसूखदार लोग लेकिन न उनका पैसा काम आया और न उनकी पहचान…प्रशासन ने ईमानदारी से जाँच की और नतीजा ये रहा कि आज शहर के बड़े से बड़े स्कूल के 21 ज़िम्मेदार जेल में हैं।
अब यहाँ जबलपुर कलेक्टर श्री दीपक सक्सेना और उनकी पूरी टीम जिसमें तमाम एसडीएम और अन्य अधिकारी जाँच दल में शामिल थे जिन्होंने निष्पक्ष जाँच की, वो सब इस शहर के निरीह अभिभावकों और उन मासूम बच्चों की तरफ़ से बधाई, सम्मान और साधुवाद के पात्र हैं, वहीं एक सवाल ये भी उठता है कि जब आज से लगभग 7 साल पहले शासन इस बारे में नियम और दिशा निर्देश एक अधिनियम के द्वारा बना चुकी है तो इतने सालों से ज़िला शिक्षा अधिकारी जो इन चीज़ों के लिए प्राथमिक रूप से उत्तरदायी हैं वो क्या कर रहे थे, और दूसरा, वो जनप्रतिनिधि भी क्यों चुप थे जिनके क्षेत्र की जनता के साथ हमेशा से अन्याय हो रहा था।
उम्मीद है, कलेक्टर साहब की जाँच में कहीं न कहीं ज़िला शिक्षा अधिकारी और उनके कार्यालय को भी उनकी अकर्मण्यता के लिए सवाल के घेरे में लिया जाएगा।


