हर्षवर्धन त्रिपाठी-
“सरकार तुम्हारी, सिस्टम हमारा”! अब सिस्टम टूट रहा है। यह पहला नहीं है और यह आखिरी भी नहीं होना चाहिए। नेहरू जी और कांग्रेस पार्टी ने अंग्रेज और अंग्रेजी मानसिकता से उस तंत्र को पाल पोसकर बड़ा किया और स्वयं को सत्ता का पर्यायवाची कहते रहे।

अंग्रेजों के बनाए क्लब और उनके नियम भारतीयों को अपमानित करने के लिए बनाए गए थे। दुर्भाग्यवश कांग्रेस ने उसी अंग्रेज इलीट कल्चर को श्रेष्ठ भाव के तौर पर अपना लिया। वही बड़े लोग माने जाने लगे। इसी इलीट क्लब के सदस्यों की शक्ति से कांग्रेस बरसों सत्ता में रहा।
यही इलीट क्लब दिल्ली गैंग के तौर पर स्थापित रहा। इसी को आसान भाषा में समझने के लिए खान मार्केट गैंग कहते हैं। नरेंद्र मोदी ने इसी को तोड़ा है। राघव बहल ने एक बार कहा था कि, इस क्लब से दुश्मनी करके कोई सत्ता में टिक नहीं सकता। नरेंद्र मोदी ने वह करके दिखाया है। दिल्ली के जिमखाना क्लब का भी मामला ऐसा ही है।
कमाल का मूर्खतापूर्ण तर्क दिया जा रहा है कि, जिमखाना ने खेल के क्षेत्र में कमाल किया है और उसी के आगे बताया जा रहा है कि, खुशवंत सिंह आखिरी समय तक यहां टेनिस खेलते रहे। अरे! जिमखाना में खेलकर कोई टेनिस का बड़ा खिलाड़ी
बना क्या? सरकार अधिग्रहण करे, इस पर बहस हो सकती है। भारत में भारतीय परंपरा के लिहाज से क्लब बनें, नए बनें और खूब बनें, इस पर बहस हो सकती है, लेकिन अंग्रेजों की भारतीयों को अपमानित करने की मंशा वाले विचार को तो हर हाल में समाप्त करना ही होगा। नरेंद्र मोदी यह कार्य बखूबी कर रहे हैं।
सिर्फ एक इसी कार्य के लिए मैं नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़ा रह सकता हूं। जहां आलोचना करना होगा, निस्संकोच करता रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। भारतीय भाषा, परिधान को जो क्लब खारिज करे, उसे पूरी तरह से खारिज करना भारत के लिए आवश्यक है। धन्यवाद Narendra Modi!
लेखक हर्षवर्धन त्रिपाठी वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ साथ राइट विंग के थिंकर और एनालिस्ट हैं!
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