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वीरेंद्र बाबू के जाने से दैनिक जागरण का चौखट सूना हो गया!

धर्मेंद्र सिंह-

पने वीरेन्द्र बाबू। दैनिक जागरण समाचार पत्र के निदेशक श्रद्धेय वीरेन्द्र गुप्त जी। कल, ब्रह्म बेला में शरीर त्याग दिया। कम लोग जान पाए होंगे कि इस अखबार की प्रतिष्ठा के पीछे प्रभावी भूमिका किसी की रही तो वह वीरेन्द्र बाबू थे।

1981 से जागरण की वाराणसी यूनिट का प्रकाशन प्रारंभ हुआ, तब से वह स्थानीय संपादक एवं निदेशक के रुप में अपनी भूमिका मिभाते रहे। चार दशक यह दायित्व और इसके पहले बाकी पत्रों का, संचालन यानी कोई सत्तर बरस पत्रकारिता से उनका प्रत्यक्ष जुडाव। दैनिक जागरण की शुरुआत हुई तो बनारस दूसरे बडे अखबार बडी चुनौती थे। पर वीरेन्द्र बाबू नें अपनी गहरी समझ, सूझबूझ से जागरण को नम्बर वन बना दिया।

बिरले व्यक्तित्व के धनी थे। संस्थान की मर्यादा, पत्रकारिता मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहते। 2001 में मेरा जागरण परिवार से रिश्ता जुडा। अपने अभिभावक एवं बिमल बाबू के समधी रहे आदरणीय नरेन्द्र मोहन जी के सानिध्य में मुझे काम करने का मौका मिला। वीरेन्द्र बाबू के साथ चार- पॉच वर्षों तक कार्य करने का सुखद अनुभव जीवन के हर मोड पर साथ चलता रहा। राजनीति में आया तो कुछेक लोगों के अति प्रसन्न होने वालों में वह स्वयं शामिल रहे।

एमएलसी चुने जाने के बाद फोन पर आशीर्वाद दिया। वीरेन्द्र बाबू का जाना जैसे एक युग का अवसान। मुझे लगा कि एक अभिभावक को खो दिया। जागरण दफ्तर में सुबह शाम अपनी उपस्थिति मात्र से संस्थान की महत्ता, गरिमा को ऊंचाई देने वाले वीरेन्द्र बाबू के न होने का अहसास हमें ही नहीं पूरे शहर और खासकर संस्थान को होगा। जागरण का चौखट सूना हो गया। महान पुण्यात्मा को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।

मूल खबर…

दैनिक जागरण वाराणसी के वीरेंद्र कुमार गुप्ता का निधन!

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