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झारखंड

प्रवीण बागी के खिलाफ 2 करोड़ की मानहानि का मुकदमा करने की तैयारी में ‘देश प्राण’

इरादतन झूठ फैलाने का आरोप

रांचीः बीते दिनों पटना के पत्रकार प्रवीण बागी ने अपने साथियों समेत सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जिसमें दावा किया गया कि समाचार पत्र देश प्राण को 31 मार्च 2026 के प्रभाव से बंद कर दिया गया है। हालांकि अगले ही दिन 1 अप्रैल को देश प्राण समूह ने उनके इस दावे को फर्जी बताते हुए एक खंडन जारी कर दिया। संस्थान के सीईओ की तरफ से जारी एक संदेश में बताया गया कि सन् 1991 में पद्मश्री बलबीर दत्त द्वारा रांची में स्थापित देश प्राण समाचार पत्र पूरी तरह सक्रिय है और निर्बाध रूप से प्रकाशित हो रहा है।

संदेश में यह भी बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों से प्रवीण बागी अपने कुछ साथियों समेत पटना से देश प्राण का एक गैर-पंजीकृत और अवैध ई-पेपर चला रहे थे। एक व्यापारी की शह पर चलाए जा रहे इस गोरखधंधे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई। लेकिन फिर भी हठपूर्वक बागी और उनकी टीम खुद को देश प्राण का संपादक बताने और गाहे-बगाहे उसका लाभ लेने से बाज नहीं आते थे। बागी और उनके लोगों द्वारा देश प्राण के नाम पर अवैध रूप से चलाए जा रहे इस नकली ई-पेपर का ही संचालन कानूनी दबाव में बंद करना पड़ा।

इसके बाद प्रवीण बागी ने धूर्तता दिखाते हुए सोशल मीडिया पर अनर्गल प्रचार शुरू कर दिया जिससे यह गलतफहमी फैल सके कि देश प्राण समाचार पत्र बंद हो गया।

बागी की इस हरकत को देश प्राण प्रबंधन ने गंभीरता से लिया है। बताया गया कि प्रबंधन बागी को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी में है जिसमें बागी से उनके भ्रामक दावों से हुए नुकसान पर जवाब मांगा जाएगा। दूसरी तरफ गैर-कानूनी रूप से देश प्राण का नाम इस्तेमाल करने व जानबूझकर झूठे दावों से संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश पर उनके खिलाफ 2 करोड़ की मानहानी का मुकदमा करने की तैयारी भी चल रही है।

यहां पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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