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महाराष्ट्र

एक रसिया राजनेता की अय्याशियों का आसमान!

-निरंजन परिहार

रसिया मिजाज के राजनेता धनंजय मुंडे को श्रंगार रस की कविताएं तो पता नहीं पसंद आती हैं या नहीं, लेकिन श्रंगार करनेवालियां जरूर उन्हें सुहाती हैं। देश ने अब जान लिया है कि मुंडे उनको देखकर मचलते हैं, फिसलते हैं और मसलते भी हैं। दो दिन पहले तक देश के करोड़ों लोगों को धनंजय मुंडे के इस रसिया व्यक्तित्व का तत्वज्ञान नहीं था। लेकिन दबाव बना, तो मुंडे को अपने जीवन के अंतरंग पलों के शाश्वत सत्य के सारे तथ्यों का सार्वजनिक प्रस्तुतिकरण करना पड़ा। अब दुनिया जानने लगी हैं कि मुंडे कैसे नेता हैं। इसीलिए राजनिवासों की राजनीति से लेकर सीधे सादे सांसारिक लोगों के बीच भी उनकी रंगीनियों व अय्याशियों की चर्चा है।

मामला सिर्फ एक पत्नी के होते हुए भी दूसरी महिला से सालों साल तक विवाहेतर संबंध रखने का नहीं है, उस ‘दूसरी’ वाली की बहन से भी सालों साल से चले आ रहे शारीरिक संबंधों ते सिलसिले का है। लोग चटखारे लेकर शरद पवार की पार्टी के इस मंत्री की रंगीनियों के किस्से सुना रहे हैं। मामला मजेदार है, क्योंकि मंत्री की रंगीनमिजाजी कुछ ज्यादा ही जोर मारनेवाली रही है। एक पत्नी, उनके अलावा दूसरी और अब तीसरी भी। मुंडे की रंगीनियों की कहानियों में लोग इसीलिए सुख तलाश रहे हैं।

रेणु शर्मा नामक एक बला की खूबसूरत बाला ने कहा है कि महाराष्ट्र के मंत्री धनंजय मुंडे लालच देकर उनके साथ हनीमून की मुद्रा में कई बार कहां – कहां पता नहीं कैसे – कैसे, क्या – क्या जी चुके हैं। सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे के साथ निश्चित रूप से एक किस्म का यह सामाजिक अन्याय तो नहीं है कि जिस महिला से वर्षों से मुंडे के पत्नी जैसे संबंध हैं, यह रेणु उन्हीं करुणा शर्मा की बहन है। अपने मंत्री की आशिकी और अय्याशी की गाथाओं के प्रकट होते ही शरद पवार परेशान हैं, और उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का सिर शर्म से झुका हुआ है। इसीलिए खदेड़े जाने के डर से मुंडे समर्पणभाव से स्वयं की पोल खोलते दिखे। अपने जीवन के श्रंगार रस के सच को सार्वजनिक करते हुए मुंडे को कहना पड़ा कि उनकी अधिकारिक रूप से एक पत्नी और परिवार होने के बावजूद करुणा शर्मा से कई सालों से उनके पत्नी जैसे रिश्ते हैं और उससे जन्मे दो बच्चों को भी पिता के तौर पर उन्होंने अपना नाम दिया है। वे ही करुणा का भरण पोषण करते रहे हैं और करुणा को घर भी दिलवाने की स्वीकारोक्ति भी उन्होंने की। करुणा की बहन रेणु शर्मा काफी हसीन दिखती हैं, और मुंडे ने तो स्वयं को रसिक बलमा बता ही दिया है । सो, रसिया किस्म के राजनेता मुंडे ने अपनी साली जैसी रेणु पर डोरे नहीं डाले होंगे, यह कोई मानने को तैयार नहीं है।

रेणु गायिका है और यह शायद ही कोई जानता था। लेकिन धनंजय मुंडे की रंगीनियों को प्रकट करके अब वह सितारा बन चुकी है। इस बीच कृष्णा हेगड़े नामक गुमनामी के अंधेरे में जी रहे एक पूर्व विधायक भी सितारा बनने की फिराक में रेणु शर्मा के खिलाफ शिकायत लेकर पुलिस में पहुंच गए। लेकिन कांग्रेस के विधायक रहने और बीजेपी में होने के बावजूद बड़े आश्रय की तलाश में किया गया हेगड़े का यह पराक्रम बीजेपी के उनके जैसे ही कुछ नेताओं की पतित मानसिकता का प्रतीक माना जा रहा है। असल में हेगड़े का यह प्रयास बीजेपी के ही कुछ नेताओं के इशारे पर धनंजय मुंडे से ध्यान हटाने की कोशिश है, क्योंकि हेगड़े का आरोप पहली नजर में उस गायिका को दुष्चरित्र साबित करने का प्रयास प्रतीत होता है। लेकिन इस तरह की कोशिशों से धनंजय मुंडे के पाप कम नहीं हो जाते।

शानदार सामाजिक सरोकारों व राजनीतिक रसूखोंवाले मुंडे अगर इज्जतदार जिंदगी जीते हुए आगे बढ़े होते, तो लोग उनकी इज्जत करते। लेकिन मंत्री जैसे निर्णयकर्ता के पद पर बैठा कोई नेता दुनिया जहान में अय्याशी करता फिरे, और फंसने पर बहुत बेशर्म किस्म की बहादुरी से उसकी बयान बखानी भी करे, तो वह उस पूरे समाज को आहत करता दिखाई देता हैं, जिसे अपने नायकों पर भरोसा होता है। सही मायने में देखें, तो धनंजय मुंडे ने राजनीति और राजनेताओं पर भरोसा करनेवाले भोले लोगों का भरोसा तोड़ा है।

रात की रंगीनियों महीन उजालों में देह प्राप्ति की लालसा में लगे लोगों की ललक जब ज्यादा ही जोर मारने लगती है, तो सरकारें भी सन्न रह जाती हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इसीलिए सन्न है। ऐसे में बीजेपी का एक बहुत बड़ा तबका उद्धव ठाकरे से निपटने के अंदाज में अत्यंत उतावला दिख रहा है। धनंजय मुंडे बरसों तक बीजेपी की मुंडेर पर बैठे थे, पर सत्ता की ललक में अब पवार की पार्टी में हैं। मुंडे ने खुद की इज्जत के साथ क्या किया, यह तो वे ही जानें, लेकिन पार्टी पवार की है, सो इज्जत उनकी उछल रही है। और कृष्णा हेगड़े का क्या, वह तो राजनीतिक आशियाने की अनवरत यात्रा पर हैं। इस तलाश यात्रा में वे भी मुंडे की तरह कल कहीं और थे, आज कहीं और हैं और कल कहां होंगे, कौन जानता है। ऐसे लोगों का कोई सात्विक चरित्र होता होगा, यह कभी नहीं सुना गया। इसीलिए अब मुंडे की बोलती बंद है। बीजेपी के चंद्रकांत दादा पाटिल और किरीट सौमैया भले ही बोल रहे हैं, लेकिन बीजेपी के उन नेताओं की बोलती बंद है, जो बात बेबात पर भी बहुत कुछ बोलने को हर वक्त उतावले देखे जाते हैं। मामला आखिर सिर्फ एक महिला की अस्मत का ही नहीं, महाराष्ट्र के एक तुर्रमखां मंत्री के दुष्चरित्र का भी है। लेकिन फिर भी चाल, चेहरे और चरित्र की राजनीति का दम भरनेवाली बीजेपी के कुछ नेताओं का चरित्र क्यों बदल रहा है, यह भी सबसे बड़ा सवाल है।

(लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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