खुशदीप सहगल-
सूचना और प्रसारण मंत्रालय में मीडिया सलाहकार के पद पर कथित नियुक्ति को लेकर चर्चा में आए दिलीप सी़. मंडल ने कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है.
मंडल दलित एक्टिविस्ट और एडिटर गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं. उनकी और सिंघवी के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ज़ुबानी जंग छिड़ी है.
मंडल ने एक तरह से सिंघवी को धमकाने के लहज़े में लिखा है- अगर सिंघवी ने उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर बोला तो वो सिंघवी की 2012 की सीडी लगा देंगे. मंडल ने चीफ जस्टिस को भी अपनी पोस्ट में सिंघवी का चड्डी दोस्त बताते लपेटे में ले लिया.
जिस सीडी की मंडल बात कर रहे हैं, 12 साल पुराना वाकया है, नया उसमें कुछ नहीं है. कई ने वो देखी भी होगी. कोर्ट ने तब सीडी के किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी.
मौजूदा शुरुआत सिंघवी ने की. सिंघवी ने मंडल की 26 मार्च 2021 की पुरानी पोस्ट शेयर की जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत की आलोचना की गई थी. सिंघवी ने कैप्शन में रोमन में लिखा- “मिलिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के नए मीडिया एडवाइजर से. ये आपके लिए नया भाजपा है. भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए मोए मोए लम्हा”.
मंडल ने उस पुरानी पोस्ट में सुअर के फोटो के साथ कैप्शन में लिखा था- “आरक्षण पर कोर्ट और केंद्र सरकार से लेकर नौकरशाही और यूपीएससी से लेकर यूजीसी जितने हमले कर रहा है, उन सबके पीछे आरएसएस और मोहन भागवत हैं. मनुस्मृति ही उसका लक्ष्य है. उसके बुरे इरादों से आरक्षण और संविधान की रक्षा करना हम सब का कर्तव्य है”. मंडल ने साथ में हैशटैग castiest judiciary और stop lateral entry भी लगाए थे.
अब मंडल ने सिंघवी की पोस्ट के जवाब में एक्स पर लिखा-

“प्रिय सिंघवी जी,
- चीफ जस्टिस होंगे आपके सेंट कोलंबा स्कूल, दिल्ली और सेंट स्टीफ़ंस कॉलेज में साथ पढ़े चड्डी दोस्त, और होंगे आप कांग्रेस के टॉप नेता और सेटिंग करने की कैपिसिटी के कारण सबसे महँगे वकील। पर ये मत समझो कि मुझे चबा जाओगे। गले में फँस जाऊँगा।
- मेरे खिलाफ कूदिए मत वरना आपकी 2012 की सीडी लगा दूँगा। वही जिसमें आप जज बना रहे हो। मर्यादा तो है नहीं। आप तब लॉ की संसदीय कमेटी के चेयरमैन थे। नहीं करना था वो सब।
- आपकी सीडी सार्वजनिक करने पर कोर्ट की रोक है। कंटेप्ट होगा तो मैं भी चंदा करके प्रशांत भूषण की तरह 1 रुपए की फ़ाइन दे दूँगा। यही तो अब कंटेप्ट की फ़ाइन है। प्रशांत भूषण और हमारी फ़ाइन अलग थोड़ी न होगी। है न चंद्रचूड़ साहब?
- मेरा जो स्क्रीन शॉट आप लगाए हैं, वह है भारतीय धर्मों का आंतरिक संघर्ष। इन संघर्षों के बावजूद हमें साथ रहने की आदत है। मेरे निकट परिवार में ब्राह्मण से लेकर दलित रिश्तेदार है। हम लोग आपस में खुश हैं। जो जातियाँ नीचे रह गई हैं वे अधिकार माँगती हैं तो भाषा में कड़वाहट आ जाती है। हम आरती थोड़ी न उतारेंगे। लड़ेंगे ही न। झेलना पड़ेगा। ये धर्म सुधार की चिरंतन प्रक्रिया है। आप नहीं समझ पाओगे। गांधी को पढ़िए। कहा है कि हिंदुओं को ये ग़ुस्सा झेलना पड़ेगा। उनकी किताब चाहिए तो बताना।
- ये फ़ोटो सही नहीं है। तात्कालिक ग़ुस्से का नतीजा है। तो मैंने इसके कुछ समय पहले डिलीट कर दिया। आदमी के विचार ही तो हैं। कोई विदेशी धर्मग्रंथ नहीं कि सुधार की संभावना न हो। हमारे कई महापुरुषों ने समय के साथ अपनी कड़वाहट त्यागी है। हम तो उनके मामूली अनुयायी है। मैंने भी सुधार लिया। आगे भी सुधार जारी रहेंगे। प्रिय मोहम्मद जुबेर इस बीच तुम स्क्रीन शॉट लेते रहना।
कौन से महापुरुषों ने कैसे राय बनाई और बदली जानना है तो मिलिए कभी।
समझ गए? नहीं समझे? समझ जाएंगे। सब समझ जाएँगे।
पूरे सम्मान के साथ, आपका, दिलीप मंडल”
बहरहाल सोशल मीडिया पर सिंघवी के वार पर मंडल के काउंटर की चर्चा है… अब देखना दिलचस्प होगा कि सिंघवी इस पर क्या कदम उठाते हैं?


