दैनिक भास्कर ग्रुप में आपातकाल लागू, कोई भी कानूनी नोटिस, सम्मन नहीं होगा रिसीव

BHASKAR

दैनिक भास्कर समाचार पत्र समूह में आजकल मजीठिया से बचने के लिए इमरजेंसी लागू कर दी गई है। वो भी ज़ुबानी नहीं, बाकायदा लिखित तौर पर। उसका उल्लंघन दंडनीय अपराध करार दिया गया है। इस अखबार समूह के सभी संस्करणों के सभी विभागों को सख्त हिदायत दी गई है कि यदि किसी भी तरह की, कोई भी कानूनी नोटिस, निर्देश, सम्मन आदि आते हैं तो उन्हें किसी भी सूरत में रिसीव न किया जाए। सभी विभागीय प्रधान इस बात को सुनिश्चित करें कि वह कानूनी कागज हर हाल में बैरंग वापस जाए। उसे लाने वाला वाहक-हरकारा ऑफिस का गेट लांघने न पाए। उसे गेट से ही वापस कर दिया जाए। अगर वह वाहक-हरकारा संबंधित कागज डिलीवर करने की जिद भी करे तो भी उसकी अनसुनी की जाए। नहीं माने तो, उससे अगर सख्ती भी करनी पड़े, तो की जाए। बिना परवाह किए, बिना सोचे कि वह व्यक्ति अदालत से आया है और वह अगर अपने साथ हुए बर्ताव की शिकायत कर देगा तो आरोपी-दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इस हिदायत-निर्देश का निहितार्थ यह है कि किसी भी कीमत पर अदालती नोटिस, सम्मन, निर्देश से जुड़े कागजात को ठुकराना-लौटाना है, और यदि कुछ होता है तो हम बाद में देख लेंगे।

कुछ रोज पहले भास्कर के महामहिम मालिकान के इस फरमान को दिल्ली स्थित उनके फाइनेंसियल हेड की ओर से सभी संस्करणों को ई-मेल किया गया है। बताते हैं कि आपातकाल लागू करने के इस आदेश के पीछे मालिकान का छिपा हुआ डर है। उन्हें लगता है कि बेशक, उन्होंने सभी कर्मचारियों से मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों पर अमल से पिंड छुड़ाने के लिए ‘डेक्लेरेशन फार्म’ पर जबरिया-डरा धमकाकर दस्तखत करवा लिए हैं लेकिन फिर भी कोई सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का केस कर सकता है या हाईकोर्ट या उससे निचली अदालतों में इंसाफ पाने के लिए जा सकता है। ऐसे में कोर्ट के नोटिस, सम्मन, निर्देश आदि आ सकते हैं। इन्हें रिसीव करने पर कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने की विवशता-अनिवार्यता होगी। रिसीव नहीं करने पर इस कानूनी पचड़े से बचाव बना रहेगा। लेकिन इन महामहिमों को शायद यह नहीं पता है कि नोटिस, सम्मन आदि से बहुत देर तक नहीं बच पाएंगे। वे अपने कारकूनों-कारिंदों को इसके खिलाफ जितना चाहे जितना चाक-चौबंद कर लें, अंतत: कानून का फंदा उन्हें अपने आगोश में लेगा ही लेगा।

हालांकि यह मानना हमारे जैसों के लिए नादानी की बात होगी कि मालिकान को कानून की जंजीरों का ज्ञान नहीं है। उन्हें बखूबी पता है कि ऐसे कानूनों-नियमों की भरमार है जो कर्मचारियों-कामगारों के हितों की सुरक्षा के लिए बने हैं- बनाए गए हैं। और कर्मचारी जब अपने हक को हासिल करने के लिए कानूनी जंग में उतरेगा तो मालिकों और तथाकथित अन्नदाताओं की सांसें तेजी से ऊपर-नीचे होंगी। दिलों के धडक़ने की रफ्तार इतनी ज्यादा हो जाएगी कि संभव है कि उन्हें काबू में करना असंभव हो जाए। शायद इन जोखिमों से वे वाकिफ हैं इसीलिए सोच रहे हैं कि जंग में न जाना पड़े तो उसके लिए क्यों न पहले से ही तैयारी कर ली जाए। यानी कानून को चकमा देने की उनकी यह शातिराना चाल है।

वैसे भी, दैनिक भास्कर का रुख-रवैया हमेशा से कानून विरोधी-न्यायपालिका विरोधी रहा है। अपने पैसे, पहुंच, पैरवी, पहचान और ताकत के बल पर इस अखबार के मालिकान अपने धंधे-कारोबार की शुरुआत से ही कानून-न्यायपालिका को चकमा देते, धता बताते रहे हैं। इसकी अनेक मिसालें हैं, लेकिन ताजा मिसाल इस अखबार के चंडीगढ़ संस्करण की है। एक सीनियर पत्रकार कर्मचारी को मौजूदा संपादक दीपक धीमान ने अपने ज्वाइन करने के दिन से ही परेशान करना शुरू कर दिया। वह पत्रकार उनसे काफी सीनियर है और एक वक्त ऐसा था जब धीमान साहब उसके सरीखे कई सीनियर पत्रकारों के मातहत स्ट्रिंगर हुआ करते थे। धीमान साहब का लिखना-पढऩा तब भी पता था और अब भी अज्ञात नहीं है। इसीलिए धीमान ने ज्वाइन करते ही उस सीनियर जर्नलिस्ट को निशाने पर ले लिया। इससे परेशान होकर उस जर्नलिस्ट ने अदालत की शरण ले ली। लेकिन उससे संबंधित अदालत से आने वाले किसी भी नोटिस-सम्मन को रिसीव करने से मना कर दिया गया। यह अलग बात है कि अंतत: नोटिस लेना पड़ा और अदालत में हाजिर होना पड़ा।

चलिए, मान लेते हैं कि यह एक छोटा मामला है, लेकिन मजीठिया की संस्तुतियों पर अमल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अपनी कुटिल चालों, साजिशों, षड्यंत्रों, तिकड़मों, करतूतों, धमकियों, पहुंच, पैंतरों से हमेशा-हमेशा के लिए पालन करने से बच जाएंगे या बचे रहेंगे। जानकारों की मानें, तो नहीं। अगर एक भी कर्मचारी खुलकर कानूनी जंग में उतर गया तो सुप्रीम कोर्ट फौरन संज्ञान लेगा और भास्कर के उद्दंड-अहंकारी-मनबढ़ मालकों को उसके आदेश पर अमल करना पड़ेगा। अगर नहीं करेंगे तो दंड के भागीदार होंगे।

बता दें कि–मजीठिया से बेहतर सेलरी-सुविधाएं-भत्ते आदि भास्कर देता है और यह कि ऐसे में मजीठिया की हमें दरकार नहीं है– सरीखी शब्दावली वाले डेक्लेरेशन फार्म पर दस्तखत कराने वाले मैनेजमेंट ने इस पर पूरी चौकसी रखी थी कि कोई भी हस्ताक्षरकर्ता फार्म में तारीख न डाले। फिर भी चंडीगढ़, लुधियाना, जलंधर, अमृतसर, बठिंडा, पटियाला, शिमला आदि संस्करणों के तकरीबन 23-24 कर्मचारियों ने तिथियां दर्ज कर दी थीं। बाद में सर्कल एचआर डिपार्टमेंट चंडीगढ़ को जब पता चला तो उसने इन कर्मचारियों से अपनी निगरानी में दूसरे नए फार्मों पर दस्तखत कराए और इस पर पूरी नजर रखी कि फिर कहीं कोई कर्मचारी तिथि न डाल दे। यह महान-गुरुतर काम, प्रबंधक रमन दीप सिंह राणा की देखरेख में हुआ। इन फार्मों को जिस सुरक्षा-चौकसी-निगरानी में रखा जा रहा है या रखा गया है, वह बेहद दर्शनीय और मनोरंजक है।

ताजातरीन निर्देशानुसार भास्कर संस्करणों के आफिसों के इंट्री प्वाइंटों पर सुरक्षा कर्मियों को बेहद मुस्तैदी से तैनात किया गया है। किसी भी आगंतुक से तैनात सिक्योरिटी गार्ड इस अंदाज में पूछताछ करते हैं कि मानों कि यह अखबार का प्रवेश द्वार नहीं बल्कि किसी खुफिया संस्थान का इंट्री प्वाइंट हो। प्रेस नोट देने आया व्यक्ति भी इस सवाल-जवाब से सहम-झल्ला जाता है। कई बार तो ऐसे लोग गार्ड को डांट भी देते हैं। फिर भी सिक्योरिटी गार्ड क्या करे? वह भी तो नौकरी ही कर रहा है। उसे जो आदेश-निर्देश होगा, वही तो करेगा। साफ है कि भास्कर प्रबंधन मजीठिया से बचने के लिए न्यायपालिका को झांसा देने, अंगूठा दिखाने और उससे जुड़े हर तरह के जुगत-हथकंडों को करने-आजमाने पर आमादा है।

 एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Comments on “दैनिक भास्कर ग्रुप में आपातकाल लागू, कोई भी कानूनी नोटिस, सम्मन नहीं होगा रिसीव

  • दीपिका सिंह says:

    आप भास्कर के पीछे पड़े हैं. मजीठिया लागू करने में अमरउजाला ग्रुप ने भी बहुत धोखाधड़ी की है. आपने अब अमरउजाला की ख़बरें प्रकाशित करनी बंद कर दी हैं. तथाकथित मजीठिया लागू करने के एक माह बाद ही मई माह में करमचारियों/पत्रकारों का प्रोविडेंट फण्ड घटा दिया गया. आपने इस बारे में एक भी शब्द नहीं लिखा.. 8)

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  • Bhaskar me patakar nahi. badhuaa majdoor kaam kar rahe hai. inko majdoor bhi nahi kha sakte. ye to Hijade hai. jo julm sakar maliko ke isaare per logo ko aakhe dikhate hai aur paisa vasul karte hai. Chakke Saale.

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  • वेद्पाल धंखड़ says:

    आप भास्कर के पीछे परे हे इन्डिया टुडे ग्रूप ने भी कोई कसर नही रखी हे उसने तो वर्कर को जबर्दस्तइओ. जबर्दस्ती निकाल दिया और मजेठिया भी नही दिया व्हां की मैनेजमेंट अपने आप को कोर्ट से उपर समझती हे

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  • Ramesh aggrawal says:

    DB CORP RISES ON INCORPORATING WHOLLY OWNED SUBSIDIARY
    DB Corp has incorporated a wholly owned subsidiary (WOS) by the name ‘DB Infomedia’. The registered office of the WOS is situated

    DB Corp is currently trading at Rs. 385.10, up by 1.45 points or 0.38% from its previous closing of Rs. 383.65 on the BSE.

    The scrip opened at Rs. 383.05 and has touched a high and low of Rs. 385.30 and Rs. 383.05 respectively. So far 874 shares were traded on the counter.

    The BSE group ‘A’ stock of face value Rs. 10 has touched a 52 week high of Rs. 422.95 on 01-Jan-2015 and a 52 week low of Rs. 267.70 on 21-May-2014.

    Last one week high and low of the scrip stood at Rs. 405.00 and Rs. 372.00 respectively. The current market cap of the company is Rs. 7051.68 crore.

    The promoters holding in the company stood at 69.97% while Institutions and Non-Institutions held 26.58% and 3.45% respectively.

    DB Corp has incorporated a wholly owned subsidiary (WOS) by the name ‘DB Infomedia’. The registered office of the WOS is situated at Bhopal, Madhya Pradesh.

    DB Corp is the only media conglomerate that enjoys a leadership position in multiple states, in multiple languages and is a dominant player in its all major markets. The company’s other business interests also span the radio segment through the brand – MY FM – radio station with presence in 7 states and 17 cities and a strong online presence in internet portals.

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  • Ramesh aggrawal says:

    मजीठिया से बचने की चाल : भास्कर ने बनाई डीबी इन्फोमीडिया कंपनी
    भास्कर ग्रुप मजीठिया वेजबोर्ड से बचने के लिए नए-नए उपाय कर रहा है। इसके लिए भास्कर ने सबसे पहले शेयर मार्केट में बीएसई और एनएसई
     डीबी कार्प के कम तनख्वाह वालों से लेंगे इस्तीफे, नई कंपनी में करेंगे ट्रांसफर
    भास्कर ग्रुप मजीठिया वेजबोर्ड से बचने के लिए नए-नए उपाय कर रहा है। इसके लिए भास्कर ने सबसे पहले शेयर मार्केट में बीएसई और एनएसई में सूचना पहुंचा दी है और डीबी कॉर्प लिमिटेड का नाम बदलकर डीबी इन्फोमीडिया प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया। इसका कार्यालय भोपाल रहेगा। डीबी कॉर्प के जिन कर्मचारियों का वेतन कम है उनसे रिजाइन लेटर लेकर डीबी इन्फोमीडिया में भेज दिया जाएगा, जो एक प्रकाशन संस्थान न होकर वेब प्रोवाइडर कंपनी है। यानी इस नई कंपनी में मजीठिया वेतनमान नहीं देना होगा क्योंकि यह वेब कंपनी है न कि अखबार प्रकाशन। इसके लिए भास्कर में मार्च महिने में दो लेटर पर साईन करवाने जा रहे हैं, एक रिजाईन लेटर पर और दूसरा कोरे कागज पर।

    बाकी ज्यादा वेतन वाले कर्मचारियों पर पहले से मजीठिया वेजबोर्ड दे रहे होने की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में आगामी सुनवाई में पेश कर दी जाएगी।

    इस प्रकार से भास्कर दो प्रमुख संस्थान को एक साथ धोखा देने जा रहा है- एक सुप्रिम कोर्ट को और दूसरा सेबी को जो शेयर मार्केट का संचालन करता है। कोर्ट में बोल दिया

    जाएगा कि हमारे करकर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया है और सेबी को बताया जाएगा कि अखबार का काम हमारी दूसरी कम्पनी के द्वारा हो रहा है, जिससे भास्कर का शेयर प्राइज कम नहीं होगा। इस प्रकार से भास्कर पूरी ताकत के साथ एक तीर से दो निशाना लगाने में लगा हुआ है।

    कर्मचारियों को इसकी भनक लग गई है जिसके चलते अगले महीने भास्कर में जबरदस्त हंगामा होने के आसार हैं।

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