
संजय कुमार सिंह-
एक जुलाई से नये अपराध कानून लागू होने की खबर अमर उजाला, द हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स में लीड है। मेरे सात में से तीन अखबारों में यह खबर लीड नहीं है- यह भी एक खबर है। ऐसे में इन तीन अखबारों ने जिन खबरों को लीड बनाया है उनकी चर्चा पहले। नवोदय टाइम्स की लीड भारतीय क्रिकेट टीम को बीसीसीआई द्वारा 125 करोड़ रुपये दिये जाने की खबर है।
अखबार ने इस 125 करोड़ का ईनाम और विजेता टीम पर बीसीसीआई की बरसात कहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड मौसम की खबर है। इसके अनुसार इस साल मई-जून का महीना 74 साल में साल का सबसे गर्म था। खबर के अनुसार औसत अधिकतम तापमान पिछले सर्वोच्च तापमान के मुकाबले कम से कम आधा डिग्री ज्यादा रहा। अखबार ने क्रिकेट की खबर को पहले पन्ने से
पहले के अधपन्ने पर छापा है। असली खबर द टेलीग्राफ की लीड है। अखबार ने बताया है कि नई (तीसरी) सरकार की पहली ‘मन की बात’ में नीट की कोई चर्चा नहीं थी। कल यानी इतवार को नई सरकार की ‘मन की बात’ शुरू हुई और इसमें नीट की बात न होना, संसद में चर्चा नहीं होने देने से अलग है। अखबार ने लिखा है कि परीक्षा घोटाला साइलेंट ट्रीटमेंट की मोदी की सूची में शामिल हो गया है। साइलेंट ट्रीटमेंट मोटे तौर पर चुप्पी साध लेना है और नरेन्द्र मोदी की सरकार तमाम मुद्दों पर चुप्पी साधती रही है। इनमें मणिपुर से लेकर नीट तक शामिल हो गया है। अखबार ने इसे फ्लैग शीर्षक बनाया है और मुख्य शीर्षक है, “मन की मिस : लीक्स (जिसे छोड़ने का मन था : प्रश्नपत्र लीक)”।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी आज ‘मन की बात’ की खबर को पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर छापा है। तीन कॉलम की इस खबर का दो लाइन का शीर्ष है, मन की बात में प्रधानमंत्री ने नागरिकों को संविधान में आस्था दिखाने के लिए धन्यवाद दिया। नीट की खबर अखबारों के पहले पन्ने से लगभग गायब है। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने की खबर का शीर्षक है, गोधरा से निजी स्कूल के मालिक को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। यही खबर लगभग इसी शीर्षक से टाइम्स ऑफ इंडिया में है। हिन्दुस्तान टाइम्स में दूसरी परीक्षाओं से संबंधित खबरें हैं। एक खबर है सीयूईटी परीक्षा परिणाम में देरी हो गई है और इससे प्रवेश चक्र में देरी होगी। नए कानूनों से संबिंत खबर को टाइम्स ऑफ इंडिया ने सिंगल कॉलम में छापा है जबकि विज्ञापनों से बचा अमर उजाला का पहला पन्ना नए कानून का प्रचार कर रहा है। अमित शाह ने कहा है और फोटो के साथ छपा है, कानूनों की आत्मा, शरीर और भावना सब भारतीय है। ऐसी भारतीय चीजों या भारतीयता में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे हत्या की विधियों – हलाल और झटका की याद आती है और उसे वध कहना भी। इसमें दिलचस्प यह है कि संस्कारी विधि झटका है जबकि आरी चाहे मशीन से चले या वैसे रेतती ही है पर वह काटने के लिए ही ठीक (या संस्कारी) है। हत्या यानी वध के लिए झटका संस्कारी है। इसमें जो भारतीय है वह क्यों है या क्यों नहीं है अगर है तो किसे फर्क पड़ता है, मैं नहीं जानता। मेरे लिये यह सब मुद्दा नहीं है।
द टेलीग्राफ ने नई दिल्ली डेटलाइन से जेपी यादव की बाईलाइन वाली अपनी आज की लीड में कहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक पर एक शब्द भी नहीं बोला। तमाम गंभीर विषयों पर चुप्पी साधे रखी। इसकी बजाय, तीसरी बार अपनी सरकार बनाने के बाद के अपने इस पहले प्रसारण में उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े चुनाव में भाग लेने और “हमारे संविधान में अटूट विश्वास” दिखाने के लिए लोगों की सराहना की। उन्होंने लोगों को पेड़ लगाने की भी सलाह दी। उन्हें फिर से सत्ता में लाने के लिए उन्होंने न तो सीधे तौर पर देश को धन्यवाद दिया और न ही भाजपा के अपने दम पर बहुमत खोने या वाराणसी से अपनी व्यक्तिगत जीत के अंतर में भारी गिरावट का जिक्र किया। हालांकि, चुनावी राज्य झारखंड के आदिवासी मतदाताओं को एक संदेश जरूर मिला। मोदी ने चुनाव आयोग
और चुनाव संचालन से जुड़े अन्य लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा, “आज मैं देशवासियों को हमारे संविधान और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी अटूट आस्था को दोहराने के लिए धन्यवाद देता हूं। 2024 का चुनाव दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव था।”
चुनाव के दौरान ब्रेक के बाद मोदी का रेडियो संबोधन कल फिर शुरू हुआ। यह समय छात्रों और विपक्ष द्वारा नीट यूजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित धांधली और कई प्रवेश व भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच का है। विपक्ष ने नीट यूजी अनियमितताओं पर तत्काल चर्चा की मांग खारिज होने के बाद शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही ठप कर दी थी।
इससे पहले, कांग्रेस के युवा मोर्चा के प्रदर्शनकारियों ने नीट और नीट परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के कार्यालय पर धावा बोल दिया था। कई अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की शिकायत है। सोमवार को संसद के फिर से खुलने पर इस मुद्दे के फिर से उठने की उम्मीद है। गुरुवार को संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन में पेपर लीक का मुद्दा उठा था। उन्होंने “निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने” के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया था। उन्होंने सभी से इस विषय पर दलगत राजनीति से ऊपर उठने का आग्रह किया था। हालांकि, मोदी इस मामले पर मौन ही रहे हैं।

झारखंड में चुनाव प्रचार
वैसे, उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1855-56 के संथाल विद्रोह के बारे में बात की और इसके नेताओं सिद्धू और कान्हू की प्रशंसा की। मोदी ने अपने प्रसारण में कहा, “30 जून एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। हमारे आदिवासी भाई-बहन इस दिन को हुल दिवस के रूप में मनाते हैं। यह दिन वीर सिद्धू-कान्हू के अदम्य साहस से जुड़ा है, जिन्होंने विदेशी शासकों के अत्याचारों का कड़ा विरोध किया था। झारखंड चुनाव होने वाले हैं। अभी उसका घोषणा नहीं हुई है लेकिन प्रचारकों ने तैयारी शुरू कर दी है। एक मामला तो यह है ही, दूसरा मामला आज सुबह-सुबह फेसबुक पर दिखा। दैनिक भास्कर के धनबाद संस्करण की एक खबर साझा करते हुए संवाददाता प्रदीप पल्लव ने लिखा है, परंपरागत ढेकी और जांता (चक्की) से निर्मित समान बनाने वाली पोड़ैयाहाट प्रखंड के डांडे गांव की महिला समूह से क्यों बात करेंगे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी? पढ़िए दैनिक भास्कर की रिपोर्ट।
पत्रकार मित्र गिरधारी लाल जोशी ने कमेंट में लिखा है, इसलिए बात करेंगे प्रदीप भाई कि झारखंड में अब चुनाव होने वाले है। प्रकाशित खबर का शीर्षक है, परंपरागत जांता-ढेकी से खाद्य सामग्री तैयार करने वाली गोड्डा की महिलाओं के समूह से आज पीएम करेंगे संवाद। छह कॉलम में छपी मुख्य खबर 17 लाइनों में है। इसके साथ अलग शीर्ष से कुल पांच खबरें और दो तस्वीरें हैं। इनमें बताया गया है कि 30 जून को 10 बजे से कार्यक्रम है, भाजपा की ओर से इसकी तैयारी की गई है। दूसरी खबर का शीर्षक है, प्रधानमंत्री के संवाद से भाजपाई उत्साहित। इसमें कहा गया है, प्रधानमंत्री का गोड्डा के एक गांव में ध्यान जाना बताता है कि भले वे दिल्ली में पर उनकी नजर हर जगह पर है। अच्छा काम करने वाले उनकी नजरों के पास रहते हैं।
डबल इंजन वाला बिहार
सरकार का प्रचार करने वाली तमाम खबरों के बीच आज द टेलीग्राफ में बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक टेलीमार्केटिंग कंपनी, डीबीआर यूनिक की अनूठी कहानी है। पहले भी खबर छपी है कि इस कंपनी में काम करने वाली कई महिलाओं को बंधक बना लिया गया था और उनमें से एक जो सबसे पहले छूट पाई थी और जिसने इस मामले को उजागर किया था उसने शिकायत की है कि टेलीमार्केटिंग कंपनी डीबीआर यूनिक द्वारा भर्ती किए जाने के बाद बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ बलात्कार किया गया। तीन बार गर्भपात कराया गया। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसका मोबाइल छीन लिया है और मुख्य आरोपी उसे केस वापस लेने के लिए धमका रहा है।
खबर के अनुसार कंपनी कम से कम 200 युवतियों और 50 युवकों को डीबीआर यूनिक ने भर्ती किया था – जाहिर तौर पर दवाइयां बेचने में मदद करने के लिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों के ज़रिए अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियों का वादा किया गया था। हालांकि, फर्म के अधिकारियों ने कथित तौर पर उनमें से प्रत्येक से उनके “प्रशिक्षण” के लिए 20,500 रुपये की जबरन वसूली की और उन्हें मुजफ्फरपुर, हाजीपुर सहित बिहार के विभिन्न स्थानों पर बंधक बनाकर रखा। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया और उन्हें फ़र्म में शामिल होने के लिए अन्य युवाओं को फ़र्जी कॉल करने के लिए मजबूर किया गया।
मीडिया से बातचीत का यह आयोजन अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ (एआईपीडब्ल्यूए) ने किया था। उसने कहा कि कंपनी द्वारा भर्ती किए गए कई युवक और युवतियों को बंधक बनाकर धोखा दिया गया, प्रताड़ित किया गया और यौन उत्पीड़न किया गया। इसने शक्तिशाली लोगों की संलिप्तता का आरोप लगाया। “हमारी जांच से पता चला है कि यह एक राज्यव्यापी घोटाला है। ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा, राज्य सरकार को न्यायिक जांच शुरू करनी चाहिए।” वह और उसके साथी पीड़ितों को धमका रहा है और उन्हें पैसे (चुप रहने के लिए) देने की पेशकश कर रहा है। पुलिस ने उसका मोबाइल ले लिया है और मुख्य अभियुक्त उसे मामला वापस लेने के लिए धमका रहा है। इस मामले में कंपनी का सीईओ और मुख्य अभियुक्त मनीष सिन्हा अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।


