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एप्सटीन फाइल्स में ‘मोदी ऑन बोर्ड’ का जिक्र: अंबानी कनेक्शन पर नए सवाल!

सुभाष सिंह सुमन-

जिस एक सवाल का जवाब मैं साल भर से खोज रहा, वो तो नहीं मिला, लेकिन खोजने में कुछ-कुछ ऐसी चीजें मिलीं, जिनसे डॉट कनेक्ट किये जा सकते हैं।

2017 में जब ट्रंप पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति बने, उसके बाद 26 जून को मोदीजी अमेरिकी यात्रा पर गये। उसके तुरंत बाद 6 जुलाई को मोदीजी इजरायल गये। इस तरह मोदीजी इजरायल यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।

एप्सटीन-अंबानी की बातचीत से इसकी कहानी कुछ इस तरह बनती है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत सरकार ने नयी अमेरिकी सरकार में पैठ बनाने का प्रयास किया। मोदीजी और भारत सरकार के लिए यह परेशानी की बात थी कि अमेरिका और भारत दोनों के लिए कॉमन खतरा चीन है, फिर भी ट्रंप सरकार में कोई मोदीजी से बात नहीं कर रहा।

इसकी व्यवस्था करने का काम अनिल अंबानी को दिया गया। अनिल अंबानी के शब्दों में- उन्हें इसके लिए ‘लीडरशिप’ द्वारा एप्सटीन से संपर्क करने को कहा गया। ये सब मार्च 2017 की बातें हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के करीब 2 महीने बाद की बातें।

फिर एप्सटीन ने जो कुछ किया, जून में मोदीजी की अमेरिकी यात्रा फिक्स हो गयी। उसके दो सप्ताह में मोदीजी इजरायल भी पहुँच गये। उस साल भारत ने इजरायल से 715 मिलियन डॉलर के हथियार खरीदे। भारत इस तरह इजरायली हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार बन गया।

मोदीजी की इसी इजरायल यात्रा के बारे में एप्सटीन ने नाचने-गाने वाली चर्चित टिप्पणी की। कुछ इस तरह:- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरी सलाह ली। इजरायल में अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए नाचे-गाये।

2019 में जब मोदीजी जबरदस्त तरीके से चुनाव जीते, अनिल अंबानी और एप्सटीन की नयी मुलाकात हुई। इसके बारे में एप्सटीन स्टीव बैनन को एक ईमेल में बता रहा है:- मोदी गुरुवार को मुझसे मिलने किसी को भेज रहे हैं। उस गुरुवार को एप्सटीन और अनिल अंबानी मिले।

इसके बाद एप्सटीन-बैनन-अंबानी के बीच कुछ ईमेल के आदान-प्रदान होते हैं। यह कंक्लूड होता है एक और चर्चित ईमेल से। बैनन को भेजे इस ईमेल में एप्सटीन लिख रहा है:- मोदी ऑन बोर्ड।

एप्सटीन-अंबानी की ईमेल और आईमैसेज चर्चा में और भी बहुत सारी बातें हैं। टॉल स्वीडिश ब्लोन्ड टाइप बातें भी हैं, लेकिन वो सब बातें हमारे मुद्दे से अलग हैं। पढ़ने का मन हो तो यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर सारा माल उपलब्ध है। एक किसी भाई ने जीमेल जैसे जेमेल बना दिया है, जिसमें एप्सटीन से जुड़े सारे वो फाइल ईमेल की तरह उपलब्ध कराये गये हैं, जिन्हें अब तक सार्वजनिक किया जा चुका है।

अब सवाल उठता है कि क्या वास्तव में अनिल अंबानी ही एप्सटीन से ये बातें कर रहे हैं? इसका जवाब है- हाँ। फाइलों की ढेर में ऐसे कई ईमेल हैं, जिनमें रिलायंस ग्रुप चेयरमैन (यानी अनिल अंबानी) के कार्यालय के आधिकारिक ईमेल से कोई सेक्रेटरी एप्सटीन की सेक्रेटरी से मीटिंग फिक्स करने के संबंध में बातें कर रहा/रही है।

दूसरा सवाल उठता है कि अनिल अंबानी को भारत सरकार ने इस तरह के काम के लिए अधिकृत किया था? इसका जवाब है- नहीं। तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल आता है, फिर अनिल अंबानी की बातों से डॉट कैसे कनेक्ट होते हैं और उनकी क्या विश्वसनीयता रह जाती है?

इसका जवाब थोड़ा लंबा हो जायेगा। अनिल अंबानी जब एप्सटीन से ट्रंप सरकार में संपर्क कराने की बातें कर रहे हैं, उसके बाद कुछ ईमेल का आदान-प्रदान होता है, फिर एक ईमेल में मोदीजी की अमेरिकी यात्रा और इजरायल यात्रा का कंफर्मेशन अनिल अंबानी द्वारा एप्सटीन को दिया जाता है। और यह कंफर्मेशन यात्रा की आधिकारिक जानकारी सामने आने से पहले दी जाती है। उसमें जो तारीख बतायी जाती है, उसी तारीख पर यात्रा होती है।

अंबानी यह कंफर्मेशन 31 मार्च को ही दे रहे हैं, जबकि मोदीजी की अमेरिकी यात्रा होती है 26 जून को और इजरायल यात्रा 6 जुलाई को। फिर मोदीजी की इजरायल यात्रा में जो सौदे-समझौते होते हैं, उनमें कई डील जाती है अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को।

अनिल अंबानी की कंपनी उससे पहले भी इजरायल की कंपनियों से डील कर रही थी। लेकिन पहले की एक ही डील मिलती है, जिसमें इजरायल की Rafael Advanced Defence Systems के साथ 2016 में जॉइंट वेंचर बनाने वाली डील है। कुल मिलाकर रिलायंस डिफेंस और इजरायल की अलग-अलग कंपनियों के बीच डील हुई- भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एयर-टू-एयर मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम्स, एयरोस्टैट्स, कलाशनिकोव, कुछ टेक वगैरह बनाने की।

विशेष बात:- इन सब बातों के कई सालों पहले (2008 में ही) एप्सटीन पर नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप साबित हो चुका था। सजा भी हो चुकी थी। स्टीव बैनन कोई मामूली इंसान नहीं हैं। जिस समय की बातें हैं, उस समय बैनन व्हाइट हाउस के मुख्य रणनीतिकार हुआ करते थे। मतलब ट्रंप के बहुत करीब और विश्वस्त।

इसे एक कहानी की तरह पढ़ा हूँ और वैसे ही लिख दिया हूँ, लेकिन इस कहानी में भी निहुर जाने की हद तक ब्लैकमेल होने का कोई उचित कारण नहीं है। अंबानी ने नाम ले लिया और कुछ ईमेल डॉट कनेक्ट करने वाले कर दिये, इतने भर से कोई सामान्य आदमी ब्लैकमेल न हो, भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री क्यों ही होगा!

(बहरहाल इसे लिखने में मैंने जिन स्रोतों की मदद ली, उन्हें पहली टिप्पणी में लगा देता हूँ। फैक्टचेक का मन हो, थोड़ी मेहनत कर सकते हों और जयकारे में बुद्धि कुंद नहीं हुई तो सारे फैक्ट चेक हो जायेंगे। इस पोस्ट से मंदकुंदबुद्धियों को जोर से गालियाँ सकती हैं, तो उसके लिए अनिल अंबानी और मोदीजी का पता गूगल से खोज सकते हैं। एप्सटीन को भी गरिया सकते हैं। क्या जरूरत थी सब ईमेल को बचाकर रखने की? देखकर डिलीट मार दिया होता तो आज मंदकुंदबुद्धियों को जलील नहीं होना पड़ता। तस्वीर मोदीजी की उसी इजरायल यात्रा की है, जिसमें नाचनेगाने की बात एप्सटीन कर रहा है। एक और डिस्क्लेमर जोड़ना जरूरी लग रहा है:- Epstein फाइल्स में बहुत गंदगी है। आप जितना सोच सकते हैं, उससे कई गुना ज्यादा। ज्यादा एक्सप्लोर करने पर मनोस्थिति बिगड़ सकती है। तो यह काम अपने रिस्क पर करें।)

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1 Comment

1 Comment

  1. Nameless

    February 25, 2026 at 3:54 pm

    तुम पत्रकार ही होगे लेकिन तुम‌ लोग इतने मंदबुद्धि हो चुके हो कि अंग्रेजी में कहते हैं beyond redemption. थोड़ा स्टेट क्राफ्ट पढ़ लिया करो। वैसे काम कहां करते हो???

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