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सियासत

एप्सटीन केस : अनिल अंबानी और हरदीप सिंह पुरी, दोनों मोदीजी की आँखों के तारे हैं!

सुभाष सिंह सुमन-

एप्सटीन फाइल्स पर दुनिया भर में हंगामा मचा हुआ है, सिर्फ भारत को छोड़कर। ताजा खबर है- आज (हमारे समय के हिसाब से रात में) बिल क्लिंटन की अमेरिकी संसद में पेशी होगी। बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति रहे हैं। मतलब एक समय दुनिया की सबसे पॉवरफुल कुर्सी पर बैठा है आदमी, लेकिन अब अमेरिकी सांसद उनकी धज्जियाँ उड़ाने वाले हैं। कारण- हैवानियत की नयी परिभाषा बने एप्सटीन से संपर्क निकल आये हैं। एप्सटीन फाइल्स में कई बार नाम आये हैं।

बीती रात उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन की पेशी हुई थी। हिलेरी क्लिंटन कम पॉवरफुल नहीं रही हैं। पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी होने के अलावा वो खुद अमेरिका की विदेश मंत्री रही हैं, कइयों बार सांसद रही हैं और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार भी रही हैं। लेकिन फिर भी संसद के सामने पेशी हुई। कारण एप्सटीन फाइल्स में नाम आये हैं। और ये सिर्फ एक-दो नाम नहीं हैं। नीचे एक दर्जन की लिस्ट लगा देता हूँ। लिस्ट उससे भी बहुत बड़ी है। पूरी लिस्ट तैयार करूँ तो पचासों नाम जुड़ जायेंगे दुनिया भर से। सब नाम बड़े पॉवरफुल हैं। हर तरह के क्षेत्रों से हैं।

अमेरिका-यूरोप-अरब की सरकारों में बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोग हैं, राजघरानों के लोग हैं, दुनिया का पैसा नियंत्रित करने वाली दिग्गज कंपनियों के टॉप अधिकारी लोग हैं, बुद्धिजीवी-वकील-प्रोफेसर लोग हैं। इनमें से कई हटाये गये। कई खुद ही हट गये।

अब आता है हमारा देश। हमारा भारत देश। हमारे भारत से भी कइयों के नाम आये हैं। दो के सबसे अधिक। अनिल अंबानी और हरदीप सिंह पुरी। दोनों पर मैंने अलग-अलग पोस्ट लगाया है। पुरी साहब मोदीजी की आँखों के तारे हैं। अभी पेट्रोलियम मंत्रालय संभाल रहे हैं। 2017 से ही मोदी सरकार में कोई न कोई बढ़िया मंत्रालय संभाल रहे हैं। एप्सटीन फाइल्स में इनके नाम एक-दो बार नहीं, पूरे 430 बार आये हैं। हरदीप पुरी इस बारे में झूठ पर झूठ भी बोल रहे हैं। पुरी साहब का कहना है कि 2-4 बार ईमेल पर बात हुई। अभी तक जितने फाइल्स आये हैं, उनमें 62 ईमेल मिलते हैं। मंत्रीजी की सफाई है 2-4 बार एप्सटीन से मुलाकात हुई, वो भी डेलिगेशन में।

फाइल्स में 14 मुलाकातों के सबूत हैं। इनमें 9 मुलाकातें पर्सनल टाइप की हैं, जो एप्सटीन के घर पर हुई हैं। पुरी का कहना है- उन्हें पता नहीं था, एप्सटीन कौन है। फाइल्स में बातचीत पढ़ने पर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि पुरी साहब अनभिज्ञ थे। जिस समय एप्सटीन पहली बार नाबालिगों के यौन शोषण का दोषी सिद्ध हुआ था, मामला उस समय भी बहुत चर्चित हुआ था और पुरी उस समय अमेरिका में ही थे। पुरी ईमेल में हुई बातचीत में एप्सटीन के एग्जॉटिक आइलैंड की चर्चा कर रहे हैं, व्यक्ति की पहचान करने की एप्सटीन की कला के कायल हो रहे हैं, एप्सटीन के कहने पर किसी महिला के लिए भारत में वीआईपी वीजा का जुगाड़ करवा रहे हैं। इतना सब अनभिज्ञ रहते हुए कैसे किया जा सकता है? पुरी साहब के अलावा और किसी को आती है ऐसी कला तो बतायें?

ये सब लिखते ही आ जाते हैं बुद्धि से अपाहिज लोग। घिसा-पिटा आईटीसेलिया तर्क लेकर, कि सिर्फ फाइल्स में नाम आने से कोई दोषी नहीं हो जाता। बात सही है। फाइल्स में नाम आ जाने से कोई दोषी नहीं हो जाता, लेकिन पुरी साहब का सिर्फ नाम नहीं आ रहा है दोस्त। एप्सटीन से इनका गहरा याराना साबित हो रहा है। और नीचे जो लिस्ट लगा रहा हूँ, उनमें से किसी एक पर भी अभी दोष साबित नहीं हुआ है। कुछ तो ऐसे भी हैं, जिनकी एप्सटीन से अपनी कभी बात नहीं हुई, लेकिन फाइल्स में नाम आ गये तो खुद पद छोड़ दिया या छुड़वा दिया गया। जाँच और बिठा दी गयी। पर हमारे यहाँ ऐसा कुछ शायद ही हो! मुझे उम्मीद नहीं लगती।

वैसे भी अभी देश में अमृतकाल चल रहा है। अमृतकाल वाले भारत में इस्तीफे तो होते नहीं, जाँच की तो कल्पना ही पाप है। अमृतकाल वाले भारत में जो मोदीजी से जुड़ गया, पाक-पवित्तर हो जाता है। हाँ, यदि किसी ने इस अद्भुत-अलौकिक सफाई पर सवाल उठा दिये, तो उसको निश्चित देशद्रोही का प्रमाणपत्र दिया जा सकता है। कोई इसके बारे में लिखे, तो उसे निश्चित सेंसर किया जा सकता है। और मानसिक अपंगों की झुंड से गालियाँ पड़वायी जा सकती हैं।

अब आप लोग लिस्ट देखें:-

पीटर मैंडलसन, ब्रिटेन:- अमेरिका में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत, लेबर पार्टी के सदस्य, हाउस ऑफ लॉर्ड्स (अपने राज्यसभा जैसा) के सदस्य। राजदूत पद से पहले ही हटाये जा चुके थे। एप्सटीन फाइल्स में नाम आने के बाद लेबर पार्टी से 1 फरवरी को इस्तीफा दिया। हाउस ऑफ लॉर्ड्स से 3 फरवरी को इस्तीफा दिया। गिरफ्तारी भी हुई (23 फरवरी को)। बाद में जमानत पर रिहा। सरकारी पद के दुरुपयोग (misconduct in public office) के संदेह में जाँच चल रही है।

एंड्र्यू माउंटबेटन-विंडसर, ब्रिटेन:- राजघराने से हैं, पूर्व राजकुमार (Prince Andrew)। फाइल्स में नाम आने के बाद गिरफ्तारी हुई (19 फरवरी को)। घर-दफ्तर पर छापे पड़े। अब आगे जाँच चल रही है। सरकारी पद के दुरुपयोग (misconduct in public office) के संदेह में, जहाँ कथित तौर पर गोपनीय ट्रेड रिपोर्ट्स एपस्टीन को शेयर की गयीं।

थॉर्बजॉर्न जगलैंड, नॉर्वे:- पूर्व प्रधानमंत्री, नोबेल कमिटी के पूर्व चेयर। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगे (फरवरी 2026 में)। घर की तलाशी हुई। 10 साल तक की सजा संभव। जाँच में एपस्टीन के घरों में ठहरने और वित्तीय मदद यानी पैसे लेने का मामला है।

मोना जूल, नॉर्वे:- जॉर्डन और इराक में राजदूत। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद फरवरी 2026 में इस्तीफा दिया। भ्रष्टाचार की जाँच में सस्पेंड। विदेश मंत्रालय में काम और एपस्टीन से संपर्क पर जाँच।

जैक लैंग, फ्रांस:- अरब वर्ल्ड इंस्टीट्यूट के हेड, पूर्व कल्चर मिनिस्टर। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद फरवरी 2026 में इस्तीफा दिया। फाइनेंशियल रिश्तों और संपर्क पर जाँच चल रही है।

मिरोस्लाव लाज्चाक, स्लोवाकिया:- नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद 31 जनवरी 2026 को इस्तीफा दिया। एपस्टीन से मीटिंग्स और फोटोज पर स्क्रूटनी चल रही है।

जोआना रूबिनस्टीन, स्वीडन:- UNHCR स्वीडन की हेड। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद फरवरी 2026 में इस्तीफा दिया। एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड विजिट (2012) पर स्क्रूटनी।

बॉर्जे ब्रेंडे, नॉर्वे:- वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के प्रेसिडेंट। एपस्टीन फाइल्स में मीटिंग्स और कम्युनिकेशन पर स्क्रूटनी के बाद फरवरी 2026 में इस्तीफा दिया।

सुल्तान अहमद बिन सुलेम, यूएई:- डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन/सीईओ। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद 13 फरवरी 2026 को पद से हटाया गया।

लैरी समर्स, अमेरिका:- अमेरिका के पूर्व वित्त मंत्री। अभी हार्वर्ड में प्रोफेसर। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद हार्वर्ड से टीचिंग ड्यूटीज पर लीव लिया। चैटजीपीटी वाली कंपनी ओपनएआई के बोर्ड से इस्तीफा दिया। यूनिवर्सिटी में जाँच चल रही है।

थॉमस प्रिट्जकर, अमेरिका:- हयात होटल्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद 16-17 फरवरी 2026 को तुरंत रिटायरमेंट घोषित किया। बोर्ड री-इलेक्शन नहीं लेंगे।

कैथरीन रुएमलर, अमेरिका:- गोल्डमैन सैक्स की चीफ लीगल ऑफिसर। एपस्टीन फाइल्स में पता चला कि उसे दोषी पाये जाने के बाद भी ईमेल पर बात हो रही थी। इसके चलते इसी महीने इस्तीफे का ऐलान किया।

संक्षेप में एप्सटीन के बारे में भी बता देता हूँ। जेफरी एप्सटीन अभी दुनिया का सबसे घिनौना नाम है। पैसे से बहुत ताकतवर आदमी था। अपने दो आइलैंड थे इसके। इसके अलावा न्यूयॉर्क से लेकर पेरिस तक आलीशान घर कई सारे। दुनिया के तमाम नेता-मंत्री-बिजनेसमैन एप्सटीन के मित्र (या ग्राहक) थे। उसके ऊपर नाबालिगों के यौन शोषण और नाबालिग लड़कियों के सेक्स ट्रैफिकिंग के दोष साबित हुए।

एप्सटीन दुनिया के कई देशों से (खासकर गरीब परिवारों से) नाबालिग लड़कियों को शिकार बनाता था। खुद उनका यौन शोषण करता था। उन्हें नेता-मंत्री-अरबपति मित्रों के सामने परोसता था। आरोप इस बात के भी हैं कि इतना सब करने के बाद कई बच्चे-बच्चियों को एप्सटीन और उसके साथी लिटरली खाते भी थे। लड़कियों को इस जाल में फंसाने के लिए बड़ा नेक्सस काम करता था, जिसमें कई हॉलीवुड के दिग्गज, मॉडलिंग एजेंसी, डिजाइनर वगैरह भी शामिल थे।

इससे अधिक जानने का मन हो तो Virginia Giuffre को पढ़ लीजिये। ऐसे घृणित अपराधी के साथ हमारे मंत्रीजी के दोस्ताना संबंध रहे हैं। और इसे भी कुछ लोग डिफेंड करने आ जाते हैं। पिछले पोस्ट पर एक कमेंट का रिप्लाई किया था मैंने, उसे यहाँ भी दोहरा देता हूँ:- एप्सटीन जैसे व्यक्ति के साथ गहरे संबंध जिन्हें सामान्य लगते हों, उन्हें तुरंत मनोचिकित्सा की जरूरत है।

(कॉपी-पेस्ट-शेयर के लिए पूछने की जरूरत नहीं है। क्रेडिट देने की भी कोई बाध्यता नहीं है। मैं तो कहूँगा कि इस विषय पर ज्यादा-से-ज्यादा बातें होनी चाहिए, तो कॉपी-पेस्ट-शेयर करिये। विपक्ष नहीं कर पा रहा, हमारे बड़े पत्रकार साथी नहीं कर पा रहे, लेकिन हम-आप तो जरूर करें। लोग कम-से-कम जानें तो कि कैसे-कैसे लोग नीति-नियंता बने बैठे हैं।)

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