ईटीवी भारत में रुक नहीं रहा टार्चर, सुनिए एक ट्रेनी कंटेंट एडिटर की आपबीती!

सबसे पहले मैं ये बता दूँ कि अब मैं etv bharat की कर्मचारी नहीं हूँ। मैंने छोड़ दिया। ज्वाइनिंग के हफ्ते भर बाद ही। Sorry, अपना नाम नहीं बता सकती क्योंकि मेरे पिता की इज्जत मुझसे जुड़ी है। पर वो सब बताऊंगी जो मेरे साथ घटित हुआ। ये 13 नवम्बर 2018 की बात है जब जयपुर से हम चार लोग रवाना हुए थे etv bharat के लिए। चारों क्लासमेट थे। लिहाजा हम सबने रूम भी एक साथ ढूंढा। हमारी 3 की जोइनिंग 15 को होनी थी। हमने महज एक दिन में रूम ढूंढ लिया। और समान जमा दिया।

Interview और रिटन एक्जाम में इतने अच्छे नम्बर से पास हुए। हमारी जोइनिंग पक्की थी। लेकिन हमें नही पता था आगे उबलती पानी की नदी को तैरकर जाना पड़ेगा। जी हां कुछ ऐसा ही हुआ। हैदराबाद में मकान मालिक रूम देने से पहले ही 2 महीने का किराया एडवांस मांग लेता है। तो हमने 2 रूम ले लिए। एक थर्ड फ्लोर पे था जिसमे हम 2 लड़कियां रहने लगी। 4th फ्लोर पर 2 लड़के जो हमारे साथ आये थे। 15 को हमारी ज्वाइनिंग थी। तो हम HR में बैठ गए।

लेकिन ठीक उसी वक्त एक अधेड़ आयु का ठकला शख्श जिसका नाम शायद संजीव था। उसने हमारे ग्रुप के एक लड़के को बुलाया और पूछताछ करने लगा। ये बाल लंबे क्यों है। ये सिनेमा हॉल है क्या। ये इतनी सारी अंगूठियां क्यों पहन रखी है। उतारो इनको। कल से जीन्स में नही पैंट में आना।

इसके बाद तो कहानी अब शुरू होती है। उस लड़के से पूछताछ करते हुए उसने कई सारे पर्सनल सवाल पूछे। वो लड़का भोला था तो उसने बोल दिया कि हमने एक ही मकान में 2 कमरे लिए है। 7000 का हमारा ओर 7000 उनका। पैसे एडवांस दे दिए। क्योंकि पैसे दिए बिना कोई रूम देता नहीं है।

बस ये सुनकर तो उसकी आंखे ऐसे चौड़ी हुई जैसे चन्द्रयान पृथ्वी के बाहरी कक्ष में होता है। उसने तत्काल महान महान लोगों को मीटिंग बुला ली। इनमें से एक महान थे दिलीप खिलरानी जी। दूसरे महान आये संजय त्रिपाठी जी। और, फिर हम दोनों को एक ऐसे रूम में लेकर गए जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है। उसका दरवाजा बंद करके हमसे 5 घण्टे इस तरह पूछताछ की गई जैसे पुलिस रिमांड में अपराधी से की जाती है। नवंबर की हल्की सर्दी थी। मैंने जर्सी पहन रखी थी। उसके बावजूद उसने मेरे पहनावे पर कमेंट किया कि सलवार सूट पहनकर क्यों नहीं आयी, बता तुम्हारा इस लड़के से क्या रिश्ता है?

हम बार बार गिड़गिड़ा रहे थे कि सर हम कॉलेज के दोस्त है, एक साथ पढ़ते हैं, क्लासमेट है। इन संकीर्ण मानसिकता वाले लोगों को समझाते हुए 5 घण्टे खत्म हो गए लेकिन इनके दिमाग मे पूरा पाषाणकालीन युग का कीड़ा भरा हुआ था तो कहाँ समझते। इन्होंने मेरे पापा को कॉल कर दिया कि आपकी बेटी तो अय्यासी करने आई है, गुल खिलाने आयी है। अब बताइए जरा। लिंग भेद व सामाजिक बुराइयों का अंत करने के लिए पैदा हुए एक प्रतिष्टित मीडिया हाउस में ऐसे अधिकारी पड़े हैं जो ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो अक्षम्य है।

उस दिन मेरा पूरा परिवार रोया था। मैं खून के आंसू बहा रही थी। बेवजह। बिना गलती के मैं साक्षी मिश्रा बनी हुई थी। मैंने पापा की आंखों में कभी आंसू नहीं देखा। पर पहली बार वो इन लोगों की वजह से रोये थे।

पापा को तो मुझ पर विश्वास था इसलिए उन्होंने मेरे लिए कुछ ऐसा नही सोचा। 5 घंटे टॉर्चर करने के बाद उन्होंने हमसे कहा कि ज्वाइनिंग इस शर्त पर देंगे कि तुम लोग अलग मकान में रहोगे और तुम कल सलवार सूट पहनकर आओगी। वाह रे संजीववा। किस ग्रह के प्राणी हैं आप? मैंने वही किया। सलवार सूट पहनकर आयी। 16 को हमारी ज्वाइनिंग हुई। लेकिन खेद मैं ये सब नहीं भुला पा रही थी। हमें राजस्थान डेस्क दी गई। वहाँ के डेस्क इंचार्ज काफी अच्छे थे। अच्छा बिहेवियर था, इसलिए 7 दिन टिक पाई। लेकिन जुल्म की दास्तान को भुला नहीं पा रही थी। यहां उन लोगों के बीच नौकरी करना एक नारकीय जिंदगी जीने जैसा था। इसलिए छोड़ना पड़ा।

23 नवम्बर को मैने हैदराबाद को अलविदा कहा। बिना हुसेन सागर लेक देखे। बिना बिरला मंदिर देखे। बिना रामोजी फ़िल्म सिटी की सैर करे। मैं वापस रूखे मन से आ गई अपनी गुलाबी नगरी में। जो भी न्यू ज्वाइनिंग वहाँ जा रहे हैं, उनको बस ये संदेश दे रही हूँ। Etv Bharat HR संजीव सर् और और उनके ऑफिस के साथियों को महिलाओं की निजी जिंदगी में दखल नहीं देना चाहिए। ये अधिकार आपको किसने दिया जरा बताइए, क्यों etv bharat को मटमैला करने में लगे हो। बिना कैमरे के बंद कमरे और बाहर भी डरा, धमकाने व अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, इसके अलावा आपने मेरे घर पर फोन करके मेरे बारे मनगढ़ंत अश्लील कहानी बतायी गयी, मेरे लिए गंदे गंदे शब्दों को इस्तेमाल किया गया, मेरे चरित्र हनन करने की कोशिश की गई, जिससे मैंने स्वयं को असहाय और मानसिक रूप से कमजोर महसूस किया।

मुझे अपने घर परिवार से लगभग 2000 km की दूर की दूरी तय करके etv bharat से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त जरूर हुआ, लेकिन HR संजीव सर्, आप जैसे आपके साथी कर्मचारियों ने मुझे बहुत निराश और आहत किया, इस तरह का रवैया आपकी घटिया मानसिकता को दर्शाता है। महिला सम्मान के प्रति तुच्छ सोच को परे रखकर आप अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल करके etv bharat के शुद्ध प्रगति की ओर केंद्रित करना सीखें।

(एक युवा महिला पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.)

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Comments on “ईटीवी भारत में रुक नहीं रहा टार्चर, सुनिए एक ट्रेनी कंटेंट एडिटर की आपबीती!

  • Prashant kumar says:

    समझ नही आता ऐसे घटिया, लोगों HR बना कौन देता है, माना HR बना भी दिया, लेकिन सवाल फिर वही इन घटिया लोगो संस्था से बेदख़ल क्यों नही किया जाता, किसी भी कर्मचारी की अपनी खुद की निजी जिंदगी होती है, वह पता नही किस परीस्थिति में काम कर रहा है या रही है, कम से कम ऐसे लोगो को महिला सम्मान करना आना चाहिए जो इतने बड़े संस्थान को चलाते, रामोजी से निवेदन है, पहले भी ऐसे लोगो की शिकायते आ चुकी है, कृपया इन दो कौड़ी की सोच वालो को मीडिया में जगह ना दे, ये सोच मास मीडिया के लिए घातक है। सच में नाम etv bharat का है, नाम eenadu का , और ये लोग संस्था को डूबोने में लगे है, इन लोगो को जानता कौन है, जो HR बनकर, खुद को राजा समझ रहे है, आज विरोध हुआ है कल लोग थूकेंगे, भविष्य मीडिया प्रधान को ही तय करना है, शर्म करो intern करने वाले बच्चो का शोषण करते है..

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    • Harish nath says:

      ETV bharat me aise aise mahan log bhar liye gaye hain jisase ye media company nishchit doobegi. Ramoji rao sir ka jitna bada naam hai us naam ko mitti me milane ke liye kuch bewkoof log yahan maujood hai. inme sabse pahla naam hai Sanjay tripathi ka jo prasenjit roy ka bahut bada pichlaggu hai aur unki tel lagata hai… is vyakti ko na to news ki samajh hai aur na hi Operation ki… pata nahi kahan kahan se utha ke le aaye hain. iske alawa HR Sanjeev se etv bharat ka poora staff pareshan hai… madam aapne bilkul sahi kaha yahan join karna yani jail me band hona barabar ki baat hai…

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