नीरेंद्र नागर-
जब किसी अभियुक्त को किसी और देश को सौंपा जाता है जहाँ उसके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला चल रहा हो तो उस प्रक्रिया को Extradition कहा जाता है।
इस Extradition के लिए हिंदी में दो शब्दरूप देखने को मिलते हैं – प्रत्यर्पण और प्रत्यार्पण।
आज की शब्दचर्चा 56 में हम यही जानेंगे कि Extradition के लिए सही शब्द क्या है।
सही शब्द है प्रत्यर्पण। कारण वही है जो अभ्यर्थी और अभ्यार्थी के मामले में बताया था (पढ़ें- शब्दचर्चा 52 )। अभ्यर्थी में अभि और अर्थी की संधि हो रही थी, प्रत्यर्पण में प्रति और अर्पण की संधि हो रही है।
यानी दोनों शब्दों में ‘इ’ और ‘अ’ मिलकर ‘य’ बना रहे हैं। इसीलिए अभ्यर्थी की तरह ही प्रत्यर्पण सही है, न कि प्रत्यार्पण। प्रत्यार्पण का संधि विच्छेद करेंगे तो होगा प्रति+आर्पण। लेकिन आर्पण तो कुछ होता नहीं। इसलिए प्रत्यार्पण ग़लत है।
कुछ साल पहले तक हिंदी मीडिया में प्रत्यार्पण बहुत चलता था लेकिन लगता है कि हाल के दिनों में हिंदी के पत्रकारों में इस शब्द को लेकर जागरूकता आई है और बहुत कम ताज़ा ख़बरों में मुझे प्रत्यार्पण मिला। हालाँकि जिन वेबसाइटों में मुझे प्रत्यार्पण मिला, वे कोई छोटी-मोटी साइटें नहीं, नई दुनिया, जागरण और नवभारत टाइम्स जैसी नामी साइटें हैं।
हिंदी मीडिया में इन दिनों भले प्रत्यार्पण बहुत कम दिखता हो लेकिन सोशल मीडिया में इसे सही मानने वालों की संख्या अच्छी-ख़ासी है। पिछले साल मैंने फ़ेसबुक पर एक पोल किया था तो पता चला कि कोई 43% लोग प्रत्यार्पण को सही समझते हैं।
इस शब्द पर खोजबीन कर रहा था तो मुझे लोकमत और बीबीसी मराठी जैसी वेबसाइटों पर प्रत्यार्पण लिखा मिला। गूगल ट्रांसलेट में भी Extradition का मराठी अनुवाद प्रत्यार्पण दिखा रहा है।
ऐसा क्यों? क्या मराठी में अर्पण को आर्पण कहा जाता है या वहाँ भी वैसी ही अराजकता है जैसी हिंदी में है?
पिछली शब्दचर्चा…
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