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राजस्थान

बिना छपे सरकारी विज्ञापन डकारने वाले सांध्य ज्योति पर FIR, जांच की कतार में तीन दर्जन अखबार

महेश झालानी-

मीडिया माफिया द्वारा फर्जी सर्कुलेशन दिखाकर हो रही लूटपाट की चपेट में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई अधिकारी भी आने वाले है। गहलोत के अलावा तत्कालीन डीआईपीआर और मुख्यमंत्री के तथाकथित निकटतम रिश्तेदार पुरुषोत्तम शर्मा, ओएसडी देवाराम सैनी, शशिकांत और अनुराग वाजपेयी के गले मे फंदा कसे जाने की संभावना है।

गहलोत जब मुख्यमंत्री थे, तब इनके गिरोह ने ऐसे समाचार पत्रों और भोंपू चैनलों को करोड़ों रुपये के विज्ञापन दिए जो या तो अधिस्वीकृत ही नहीं थे और न ही कोई प्रसार व प्रसारण संख्या थी। कांग्रेस के लिए प्रचार और सर्वे का काम देखने वाली डिजाइन बॉक्स को भी गहलोत ने डीआईपीआर से भुगतान करवाकर अपने गांधीवादी चेहरे पर कालिख पोत दी।

लूटपाट के इस गिरोह का मुख्य सरगना पुरुषोत्तम शर्मा है जिसके कुकृत्यों की गूंज सीकर में भी सुनाई देती है। यह अपने आपको मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बहनोई बताता है। मजे की बात यह है कि एसीबी ने इसके भ्रष्ट क्रियाकलापों को देखते हुए पीई दर्ज करली। एसीबी इसके खिलाफ नियमित मुकदमा दर्ज करना चाहती है। इसके लिए विभाग ने 17ए के अंतर्गत स्वीकृति मांगी है। पता चला है कि साले साहब ने जीजाजी के खिलाफ जांच की स्वीकृति प्रदान नहीं की है। यह है एक निर्वाचित मुख्यमंत्री की करनी और कथनी में अंतर।

ज्ञात हुआ है कि करीब तीन दर्जन से ज्यादा अखबार और न्यूज चैनल सीबीआई के राडार पर हैं। फिलहाल सीबीआई ने अलवर और भरतपुर से प्रकाशित सांध्य ज्योति दर्पण के खिलाफ धोखाधड़ी द्वारा राजकोष को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का आरोप है। इसी तरह तीन दर्जन अखबार जिनमे मुख्य रूप से समाचार जगत, दैनिक नवज्योति, सच बेधड़क, यंग लीडर, भोर, राजपुताना टाइम्स, हुक्मनामा, अरुण प्रभा, विराट वैभव, राजस्थान स्टेटमेंट, महानगर टाइम्स शामिल हैं।

सभी समाचार पत्रों की प्रेस, कागज और स्याही की खरीद, वितरण, प्रसारण, प्रिंटिंग प्रेस की क्षमता, प्रकाशन स्थल से सम्बंधित मालिकाना हक और सीए सर्टिफिकेट की जांच की जा रही है। सांध्य ज्योति में निदेशक के अलावा फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने वाले सीए को भी अभियुक्त बनाया गया है। अगर जांच में फर्जीवाड़ा पाया गया तो सीए की डिग्री निरस्त हो सकती है।

ज्ञातव्य है कि मीडिया में फैली गंदगी और फर्जीवाड़े को लेकर मैंने करीब तीन साल पहले पीएमओ को मय प्रमाण शिकायत की थी। पीएमओ ने यह शिकायत मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) को अग्रेषित की। सीवीसी के निर्देश पर सीबीआई ने कई अखबारों के खिलाफ पीई दर्ज कर बयान दर्ज लेना प्रारम्भ किया। जांच में पाया गया कि पूरे कुएं में भांग डली हुई है। लोगों ने फर्जी संस्करण के नाम पर अधिकारियों की मिलीभगत से जबरदस्त लूट मचाकर अरबों रुपये का घपला किया है।

ज्ञात हुआ है एक राजनेता से जुड़े अखबार में जबरदस्त गड़बड़ी प्रमाणित हो चुकी है। वस्तुत यह अखबार अलवर से कभी प्रकाशित नहीं हुआ लेकिन जांच हुई तो फर्जी हॉकर बैठाए गए, प्रिंटिंग प्रेस और कार्यालय दिखाया गया। इस राजनेता के तमाम घपलों की पत्रावली पीएमओ को अगले निर्देश के लिए अग्रेषित कर दी गई है। वहां से निर्देश मिलते ही सीबीआई और एसीबी यथोचित कार्रवाई करेगी। इस अखबार की गड़बड़ियों के लिए भाजपा के एक बहुत बड़े नेता ने पीएमओ को लिखा है।

इस हकीकत से कोई इनकार नही कर सकता कि पूरे राजस्थान में कुल मिलाकर 1.86 करोड़ अखबार प्रतिदिन प्रकाशित होते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि कुल 6 लाख से ज्यादा अखबार प्रकाशित होते ही नहीं। देश में इससे बड़ा कोई घोटाला और कोई हो नहीं सकता। ये फर्जी अखबार कई तरह से सरकार और लोगों को मूर्ख बनाते हैं। जब कर्मचारियों को आयोग के अनुसार वेतन देने की बात आती है तो इनके मालिकों को सांप सूंघ जाता है। लेकिन जब बारी आती है कर्मचारियों को वेतन देने की तो इनकी नानी मर जाती है। यही वजह है कि पत्रकार होते हुए भी कई श्रमजीवी ठेके पर सिक्योरिटी गार्ड बने हुए हैं।

भजनलाल एक ईमानदार और कर्मठ मुख्यमंत्री हैं। सरकारी खजाने को लुटाने वाले तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत, सच बेधड़क जिसने अजित डोभाल तक को मूर्ख बना दिया, उसकी और एक कांग्रेसी नेता की सांठगांठ, तथाकथित बहनोई पुरुषोत्तम शर्मा तथा अखबार की आड़ में सरकारी खजाने को लूटने वालों की व्यापक जांच कराई जाए।

सांध्य ज्योति के खिलाफ एफआईआर पहली किश्त है। ऐसी क्रिया अभी और देखने को मिलेगी। हो सकता है कि एक साथ कई अखबारों के खिलाफ एक ही एफआईआर दर्ज की जाए। बहरहाल प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब जेल में जाने का वक्त आ गया है। मेरे बयान और राज्य सरकार द्वारा 17ए की इजाजत के बाद नया एपिसोड दिखाई देगा।

देखें एफआईआर कॉपी व अन्य संबंधित सरकारी दस्तावेज…

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