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तेजी से खाने की आदत बढ़ा सकती है गैस्ट्राइटिस का खतरा – कोरियन शोध में खुलासा

अगर आप बहुत तेजी से खाना खाते हैं, तो सावधान हो जाइए! एक शोध में पाया गया है कि तेजी से खाने वालों में गैस्ट्राइटिस (पेट की सूजन) का खतरा 1.7 गुना बढ़ जाता है।

क्या कहती है रिसर्च?

दक्षिण कोरिया में कोरिया यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन में खाने की गति और इरोसिव गैस्ट्राइटिस (एंडोस्कोपी पर आधारित) के बीच संबंध की जांच की गई।

• यह अध्ययन 2007 से 2009 के बीच 10,893 वयस्कों पर किया गया, जिनका एक सामान्य स्वास्थ्य जांच के दौरान एंडोस्कोपी किया गया।

• शोधकर्ताओं ने इन मरीजों को दो समूहों में बांटा – गैस्ट्राइटिस से ग्रसित (EEG ग्रुप) और गैस्ट्राइटिस मुक्त (EEG-फ्री ग्रुप)।

• फिर टी-टेस्ट और ची-स्क्वायर टेस्ट का उपयोग करके दोनों समूहों के बीच अंतर का विश्लेषण किया गया।

• इसके बाद, मल्टीपल लॉजिस्टिक रिग्रेशन एनालिसिस का उपयोग करके यह जांचा गया कि खाने की गति और गैस्ट्राइटिस के बीच सीधा संबंध है या नहीं।

मुख्य निष्कर्ष

• जो लोग 5 मिनट से कम समय में खाना खत्म करते थे, उनमें गैस्ट्राइटिस होने की संभावना 1.7 गुना अधिक थी।

• जो लोग 15 मिनट या उससे अधिक समय लेते थे, उनमें यह जोखिम काफी कम था।

• तेजी से खाने वाले लोगों में बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अधिक पाया गया, जिससे उनके अधिक खाने की प्रवृत्ति उजागर होती है।

• धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन भी तेज खाने वालों में अधिक पाया गया, जो गैस्ट्राइटिस के अन्य कारण हो सकते हैं।

तेजी से खाने से गैस्ट्राइटिस कैसे होता है?

1. कम चबाना, ज्यादा एसिड का संपर्क

• जो लोग तेजी से खाते हैं, वे भोजन को कम चबाते हैं, जिससे पेट में खाना लंबे समय तक रहता है।

• इससे गैस्ट्रिक एसिड का संपर्क भोजन के साथ अधिक समय तक बना रहता है, जिससे पेट की परत (म्यूकोसा) को नुकसान हो सकता है।

2. अधिक खाने की संभावना

• तेजी से खाने वाले लोग अक्सर मनोवैज्ञानिक तनाव में रहते हैं, जिससे शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) बढ़ जाता है।

• कोर्टिसोल मेटाबोलिज्म को प्रभावित करता है और व्यक्ति ज्यादा खा लेता है।

3. देर से तृप्ति (संतुष्टि) महसूस होना

• धीरे खाने से स्वाद, गंध और देखने की इंद्रियां भोजन का आनंद लेती हैं, जिससे जल्दी संतुष्टि मिलती है।

• लेकिन तेजी से खाने से यह प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे व्यक्ति अधिक खाना खा लेता है।

4. भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन पर असर

• धीरे खाने से पेप्टाइड YY और ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड 1 (GLP-1) जैसे हार्मोन सक्रिय होते हैं, जो भूख को नियंत्रित करते हैं।

• तेजी से खाने से इन हार्मोन्स की क्रिया धीमी हो सकती है, जिससे व्यक्ति को भूख जल्दी नहीं मिटती और वह अधिक खा लेता है।

गैस्ट्राइटिस से जुड़े अन्य निष्कर्ष

• तेजी से खाने वाले लोगों में अन्य पाचन समस्याएं भी पाई गईं, जैसे एसिड रिफ्लक्स, डुओडेनाइटिस, गैस्ट्रिक अल्सर और डुओडेनल अल्सर।

• हालांकि, इन लोगों में H. pylori बैक्टीरिया का संक्रमण अपेक्षाकृत कम पाया गया।

• अध्ययन के अनुसार, H. pylori संक्रमण और गैस्ट्राइटिस का सीधा संबंध स्पष्ट नहीं है।

कैसे बच सकते हैं गैस्ट्राइटिस से?

विशेषज्ञों का कहना है कि हर भोजन में कम से कम 15 मिनट का समय लगाएं। धीरे-धीरे और ठीक से चबाकर खाने से पेट की सुरक्षा बढ़ती है और गैस्ट्राइटिस का खतरा कम हो सकता है।

निष्कर्ष

तेजी से खाने की आदत गैस्ट्राइटिस और अन्य पेट संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए, धीरे-धीरे खाना खाने की आदत डालें और अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखें।

(स्रोत: कोरिया यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन, प्रकाशित – 20 नवंबर 2015, DOI: https://doi.org/10.4082/kjfm.2015.36.6.300)

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