नई दिल्ली। Supreme Court of India ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए फिल्म निर्माता V Ganesan के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी (cheating) का आपराधिक केस रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि किसी फिल्म का फ्लॉप हो जाना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि फिल्म निर्माण एक जोखिम भरा व्यवसाय है, जहां मुनाफा या नुकसान पहले से तय नहीं किया जा सकता। ऐसे में निवेशक अगर मुनाफे की उम्मीद में पैसा लगाता है, तो उसे नुकसान की संभावना भी स्वीकार करनी होगी।
क्या था पूरा मामला?
मामला एक फिल्म प्रोजेक्ट में निवेश से जुड़ा था, जिसमें शिकायतकर्ता ने प्रोड्यूसर V Ganesan को करीब 19.6 लाख रुपये दिए थे। इसके बदले उसे फिल्म से होने वाले मुनाफे में हिस्सेदारी का वादा किया गया था। बाद में निवेशक ने अतिरिक्त रकम भी दी।
हालांकि, फिल्म से अपेक्षित कमाई नहीं हो पाई, जिसके बाद निवेशक ने V Ganesan पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए IPC की धारा 420 के तहत केस दर्ज करा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि:
“सिर्फ मुनाफा न मिलना धोखाधड़ी नहीं है। यह साबित करना जरूरी है कि शुरुआत से ही धोखा देने की मंशा थी अगर फिल्म वास्तव में बनी और रिलीज हुई, तो इसे आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता…”
अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि प्रोड्यूसर की शुरुआत से ही धोखाधड़ी की कोई योजना थी।
चेक बाउंस पर भी टिप्पणी
मामले में पोस्ट-डेटेड चेक बाउंस होने का मुद्दा भी सामने आया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल चेक बाउंस होना अपने आप में धोखाधड़ी की मंशा साबित नहीं करता।
बड़ा संदेश
इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि हर कारोबारी नुकसान को आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने कहा—“फिल्म फ्लॉप हो सकती है, लेकिन इसे धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता।”
यह फैसला फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि हर उस क्षेत्र के लिए अहम है जहां निवेश जोखिम के साथ जुड़ा होता है।


