Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

ओह! समूह संपादक सतीश के. सिंह ऐसा भी करते-कराते हैं, ये तो हद है भई!!!

Abhishek Srivastava : दिल्‍ली से एक ‘अद्भुत’ अख़बार पिछले कुछ दिनों से निकल रहा है। नाम है ‘प्रजातंत्र लाइव’। इसे निकालने वाला एक चिटफंड समूह है। इसका एक अद्भुत चैनल है ‘लाइव इंडिया’ और इसी नाम से एक अद्भुत पत्रिका भी है। ‘प्रजातंत्र लाइव’ नाम के जिस अख़बार में दुष्‍यंत, विमल झा और रासबिहारी जैसे पुराने परिचित पत्रकार खुद को दिन-रात खपाए हुए हैं, उसका ‘प्रधान संपादक’ कोई प्रवीण तिवारी है जिसकी सुदर्शन तस्‍वीर रोज़ संपादकीय पन्‍ने पर छपती है अलबत्‍ता उसके नाम का लेख किसी का भी लिखा हो सकता है। इस व्‍यक्ति को अपना नाम और तस्‍वीर छपवाने का ऐसा शौक़ है कि वह विशेष आग्रह कर के संपादकीय के लोगों से कहता है कि भाई कुछ भी छाप दो मेरे नाम से।

Abhishek Srivastava : दिल्‍ली से एक ‘अद्भुत’ अख़बार पिछले कुछ दिनों से निकल रहा है। नाम है ‘प्रजातंत्र लाइव’। इसे निकालने वाला एक चिटफंड समूह है। इसका एक अद्भुत चैनल है ‘लाइव इंडिया’ और इसी नाम से एक अद्भुत पत्रिका भी है। ‘प्रजातंत्र लाइव’ नाम के जिस अख़बार में दुष्‍यंत, विमल झा और रासबिहारी जैसे पुराने परिचित पत्रकार खुद को दिन-रात खपाए हुए हैं, उसका ‘प्रधान संपादक’ कोई प्रवीण तिवारी है जिसकी सुदर्शन तस्‍वीर रोज़ संपादकीय पन्‍ने पर छपती है अलबत्‍ता उसके नाम का लेख किसी का भी लिखा हो सकता है। इस व्‍यक्ति को अपना नाम और तस्‍वीर छपवाने का ऐसा शौक़ है कि वह विशेष आग्रह कर के संपादकीय के लोगों से कहता है कि भाई कुछ भी छाप दो मेरे नाम से।

बहरहाल, मामला हालांकि इससे कहीं ज्‍यादा संगीन है क्‍योंकि ऐसा फ्रॉड करने वालों में एक नाम सतीश के. सिंह का भी है जो समूह के संपादक हैं। इस फ्रॉड का मैं प्रत्‍यक्ष गवाह हूं। नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले एक दिन उनका लिखा एक लेख मेरे पास अनुवाद के लिए कहीं से घूम-फिर कर आया। लेख अंग्रेज़ी में था! उसमें पाकिस्‍तान का प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को और भारत का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बताया गया था। मैंने आशंका जतायी, तो मुझसे कहा गया कि बिना दिमाग लगाए इसका अनुवाद कर दें। गूगल किया, तो पता चला कि 30 जनवरी, 2012 को ज़ी न्‍यूज़ की साइट पर सतीश के. सिंह का लिखा वह एक ब्‍लॉग था। मैंने मजदूर धर्म निभाते हुए जस का तस अनुवाद कर दिया। बाद में पता चला कि सतीश के. सिंह के दबाव में पत्रिका ‘लाइव इंडिया’ के संपादकीय विभाग ने प्रधानमंत्रियों का नाम बदलकर नवाज़ शरीफ़ और नरेंद्र मोदी किया और उसे शरीफ़ की भारत यात्रा के संदर्भ में एक ताज़ा लेख के रूप में छाप भी दिया।

समूह संपादक सतीश के. सिंह और प्रधान संपादक प्रवीण तिवारी नाम के ये दो प्राणी ‘लाइव इंडिया’ समूह के पत्रकारों का अपनी जलसाज़ी से जिस कदर जीना हराम किए हुए हैं, लेखन के नाम पर फ्रॉड कर रहे हैं और भारी तनख्‍वाहें ऐंठ रहे हैं, वह बाज़ार की पत्रकारिता के हिसाब से भी न सिर्फ अनैतिक है बल्कि संपादक समुदाय के माथे पर एक कलंक है। ऐसे लोगों का बहिष्‍कार होना चाहिए। ‘लाइव इंडिया’ के मई अंक में हिंदी में छपे (और 30 जनवरी, 2012 को ज़ी न्‍यूज़ के ब्‍लॉग पर छपे) सतीश के. सिंह के अंग्रेज़ी वाले लेख का मूल लिंक नीचे है और स्क्रीनशाट बिलकुल उपर है :

http://zeenews.india.com/blog/forget-the-pa-in-pak-india_582.html

तेजतर्रार पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

इसे भी पढ़ सकते हैं…

चैनल के मालिक ने संपादक के घर एक बड़ी रकम सुरक्षित रखने को भेजा, पैसा वापस आने पर करोड़ों रुपये गायब मिले!

xxx

ये लाइव इंडिया नहीं ये है चिट फंड इंडिया

xxx

चिटफंड के समारोह का ‘लाइव इंडिया’ करता रहा लाइव प्रसारण, सतीश के सिंह भी मंच पर मौजूद

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन