
ग़ाज़ीपुर के नटवरलाल शलभ सिंह मामले में एक पीड़ित की चिट्ठी-
यशवंत भैया, प्रणाम।
मैं आदर्श मिश्रा, जनपद शाहजहांपुर के कस्बा खुटार से, साप्ताहिक अख़बार क्लियर आउटलाइन का प्रधान संपादक हूँ। मैंने भी आपके व्हाट्सएप महफ़िल ग्रुप की सदस्यता ली थी। हमें लगा था कि मीडिया जगत के बड़े लोग मिलेंगे, कुछ सीखने को मिलेगा। लेकिन क्या पता था कि वीरों की धरती ग़ाज़ीपुर में भी नटवरलाल मिलेंगे।
ग्रुप के माध्यम से ग़ाज़ीपुर के ही सदस्य शलभ सिंह से संपर्क हुआ। उस समय वह आगरा में एस एस एंटरप्राइजेज में प्रोजेक्ट हेड के रूप में कार्यरत थे। मैं स्वयं उनसे मिलने आगरा गया। बातचीत में साथ काम करने पर सहमति बनी। क्लाइंट भी मैंने दिया और प्लेसमेंट एशिया के नाम से गूगल पे के माध्यम से पैसा भी भेजा। न तो काम हुआ और न ही पैसा वापस मिला।
बीच में उन्होंने कहा कि एक बड़ा प्रोजेक्ट ला रहे हैं, फ्रेंचाइज़ी बाँटी जाएगी। खड़ा मसाला नाम से काम शुरू किया और मुझसे मदद माँगी। मैंने खड़ा मसाला का लोगो बनवाकर भेजा। लेकिन जब पैसों की बात आती तो टालमटोल शुरू हो जाती।
जब बात नहीं बनी तो मैंने अपने परिचित नदीम भैया से संपर्क किया, जो उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं। पता चला कि उनकी पोस्टिंग ग़ाज़ीपुर जिले में है। मैंने एक आवेदन लिखकर दिया।




इसके बाद खड़ा मसाला रेस्टोरेंट पर लगातार सिपाही भेजे गए। तब जाकर अक्टूबर 2023 में 40 हजार रुपये मिले। लेकिन 50 हजार रुपये आज तक नहीं मिले।
सुबह-शाम मेरे द्वारा मैसेज भेजना अब रोज़ का काम हो गया है। कॉल कभी लगती नहीं, और अगर लग भी गई तो उठाई नहीं जाती। अब क्या ही कहा जाए।
सिर्फ़ हमारी ही नहीं, बहुतों की यही व्यथा है। न खुलकर कह सकते हैं, न कुछ कर सकते हैं। मन विचलित होता है तो सोच लेते हैं कि ईश्वर सब देख रहा है। किसी न किसी दिन ऐसे नटवरलाल पकड़े जाएँगे। फिर लगता है, पकड़कर भी क्या होगा, कुछ दिन में बाहर आ जाएँगे।
आपने जैसे गरिया के भगाया था, हम तो वह भी नहीं कर सकते। जब आपने भड़ास पर लिखा तो आज हमने भी मन की व्यथा कुछ कम करने के लिए भड़ास पर लिखकर ही भड़ास निकाल ली।
सादर
आदर्श मिश्रा
पत्रकार
शाहजहांपुर
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