नीरेंद्र नागर-
कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी ने बृहस्पतिवार को वोटर लिस्ट में फेरबदल के मार्फ़त हो रही कथित वोट चोरी पर एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और पत्रकारों और देश को कुछ सबूत दिखाए। इसके बाद X पर डाले गए एक पोस्ट में उन्होंने ‘देश के युवाओं, छात्रों और Gen Z’ पर भरोसा जताते हुए लिखा कि वे ही संविधान को बचाएँगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी को रोकेंगे।
यह Gen Z शब्द पिछले दिनों नेपाल में हुए विद्रोह के बाद काफ़ी चर्चा में आया है। आप शायद जानते हों कि Gen Z किसे कहते हैं। लेकिन जो न जानते हों, उनको बता दूँ कि Gen Z वह पीढ़ी है जो 1990 के दशक के आख़िरी सालों से लेकर 2010 के दशक के शुरुआती सालों में पैदा हुई। आम तौर पर 1997 से लेकर 2012 के बीच पैदा हुए बच्चों को Gen Z का सदस्य माना जाता है। यह वह पीढ़ी है जिसने इंटरनेट और मोबाइल टेक्नॉलजी के विकास को देखा है और उसका खुलकर इस्तेमाल किया है।
हिंदी मीडिया में अधिकतर साइटें इन्हें रोमन में Gen Z या Gen-Z लिख रही हैं। लेकिन कुछेक साइटें इसका देवनागरी में लिप्यंतर करके ‘जेन-जी’ या ‘जेन-जेड’ भी लिख रही हैं।
ऐेसे में किसी के भी मन में यह सवाल उठ सकता है कि Gen Z को दो तरह से क्यों लिखा जा रहा है। उसका उच्चारण जेन-जी है या जेन-जेड? दूसरे शब्दों में Gen Z में जो Z है, उसे ‘जी’ कहेंगे या ‘जेड’?
सच कहूँ तो न उसे ‘जी’ कहेंगे, न ‘जेड’ क्योंकि Z का सही उच्चारण हैं ‘ज़ी’ (अमेरिकी अंग्रेज़ी में) और ‘ज़ेड’ (ब्रिटिश अंग्रेज़ी में)। इसलिए Gen Z का अमेरिकी अंग्रेज़ी में उच्चारण हुआ ‘जेन ज़ी’ और ब्रिटिश अंग्रेज़ी में उच्चारण हुआ ‘जेन ज़ेड’।
अब इन दोनों में से आप किसको चुनते हैं, यह इसपर निर्भर करता है कि आप Z के ब्रिटिश उच्चारण (ज़ेड) के क़ायल हैं या अमेरिकी उच्चारण (ज़ी) के। आम तौर पर हम भारतीय Z को ज़ेड ही बोलते हैं – ए-बी-सी और एक्स-वाइ-ज़ेड। लेकिन Gen Z के मामले में जेन ‘ज़ी’ मुझे बोलने-सुनने में छोटा और क्यूट लगता है। इसलिए इसे ज़ेन ज़ी बोला जा सकता है।
ब्रिटेन में भी जहाँ Z को ज़ेड बोलने का ही प्रचलन है, वहाँ भी Gen Z को जेन ज़ी बोलने वाले 38% हैं।
जाते-जाते नुक़्तों पर थोड़ी बात। हिंदी मीडिया आम तौर पर नुक़्तों से परहेज़ करता है और इसीलिए Gen Z को जेन ‘जी’ लिखता है। लेकिन ऐसा करने से कितना भ्रम हो सकता है, यह आप देख ही पा रहे होंगे क्योंकि ‘जी’ तो G का उच्चारण है। जेन ‘जी’ लिखने पर कोई भी उसे Gen G समझ सकता है। क्या यह आदर्श स्थिति है?
इसीलिए ज़रूरी है कि क़, ख़ और ग़ को छोड़ भी दें तो ‘ज़’ और ‘फ़’ के मामलों में नुक़्ते अवश्य लगाए जाएँ। इससे फ़ायदा यह होगा कि जो युवा पीढ़ी आज भी हिंदी अख़बार पढ़ रही है, उसका उच्चारण सुधरेगा। वह फूल (पुष्प) और फ़ूल (मूर्ख) में अंतर करना सीख जाएगी, जेन (पीढ़ी) और ज़ेन (बौद्ध धर्म का जापानी रूप) में फ़र्क़ करना सीख जाएगी। यह उसके करियर के लिए भी लाभदायक होगा।
पिछली शब्दचर्चा…
शब्दचर्चा (पार्ट- 41): हिंदी मीडिया में अमेजन से ऐमेजॉन तक 6 रूप! सही क्या है?



