नई दिल्ली: टीवी इंडस्ट्री से जुड़ी एक अहम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के करीब ₹36,000 करोड़ के टीवी विज्ञापन बाजार की दिशा तय करने वाले TRP (टेलीविजन रेटिंग) सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया है। इस बदलाव के बाद अब रेटिंग व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के पास आ गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले यह जिम्मेदारी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के पास थी, लेकिन अब नई नीति में TRP सिस्टम से जुड़े नियामक अधिकार TRAI से हटा दिए गए हैं।
क्या बदला है?
TRP सिस्टम, जो यह तय करता है कि किस चैनल को कितना विज्ञापन मिलेगा, अब सीधे मंत्रालय के दायरे में आ गया है।
TRAI अब केवल तकनीकी और वितरण से जुड़े पहलुओं—जैसे चैनलों की कीमत, विज्ञापन की सीमा और क्वालिटी स्टैंडर्ड—तक सीमित रह गया है।
रेटिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली और दर्शकों के डेटा को ट्रैक करने के तरीके पर अब मंत्रालय का सीधा प्रभाव रहेगा।
क्यों अहम है TRP?
TRP ही तय करती है कि विज्ञापनदाता किस चैनल, शो या टाइम स्लॉट में पैसा लगाएंगे। ऐसे में इस सिस्टम पर नियंत्रण का मतलब है कि पूरे टीवी विज्ञापन बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।
उठ रहे सवाल
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहले TRAI को एक “अतिरिक्त निगरानी परत” के तौर पर देखा जाता था, जिससे पारदर्शिता बनी रहती थी। अब उसके हटने से स्वतंत्र नियमन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियामक और नीति बनाने वाली संस्था का एक ही हाथ में होना हितों के टकराव (conflict of interest) की स्थिति पैदा कर सकता है।
पहले भी विवादों में रहा TRP सिस्टम
टीवी रेटिंग सिस्टम पहले भी कई बार विवादों में रहा है, खासकर फर्जी TRP और डेटा हेरफेर के आरोपों को लेकर। इन विवादों के बाद पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या?
अब जब TRP से जुड़ा पूरा नियंत्रण मंत्रालय के पास है, तो यह देखना अहम होगा कि:
- विज्ञापन समय और नियमों में क्या बदलाव होते हैं
- चैनलों के बीच प्रतिस्पर्धा कैसे प्रभावित होती है
- और दर्शकों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है
कुल मिलाकर, यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि मीडिया इंडस्ट्री के आर्थिक और संपादकीय संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।
केंद्र सरकार ने टीवी रेटिंग की पूरी प्रणाली पर पूरा नियंत्रण ले लिया है, जिससे अरबों डॉलर के विज्ञापन खर्च पर असर पड़ता है। इसमें भारत के दूरसंचार नियामक ट्राई (Telecom Regulatory Authority of India) को टीवी रेटिंग की निगरानी से हटा दिया गया है। यह जानकारी द मिंट ने दी है।
अब यह जिम्मेदारी पूरी तरह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting – MIB) को सौंप दी गई है। पहले ट्राई और MIB दोनों मिलकर इसकी निगरानी करते थे, जिससे एक दोहरी व्यवस्था बनी हुई थी।
ट्राई के पास अभी भी प्रसारण और केबल टीवी से जुड़े अन्य पहलुओं पर अधिकार क्षेत्र बरकरार है, जैसे चैनल की कीमतें, विज्ञापन की सीमाएं, इंटरकनेक्शन और वितरण नियम, सेवा गुणवत्ता तथा अनुपालन मानक।
टीवी रेटिंग लाखों लोगों की देखने की आदतों को ट्रैक करती है और यह तय करती है कि विज्ञापन का पैसा कहां खर्च किया जाएगा। मार्च में जारी EY-FICCI रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारतीय कंपनियों ने टीवी विज्ञापन पर 36,200 करोड़ रुपये खर्च किए।
लेकिन रेटिंग्स विवादों में घिरी हुई हैं। वर्ष 2020 में मुंबई पुलिस ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की कथित संख्या में हेरफेर की जांच की थी। 2026 की नई नीति में ट्राई एक्ट का जिक्र नहीं है और बाकी सभी शक्तियां MIB को सौंप दी गई हैं।
ट्राई के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्या एन. गुप्ता ने मिंट को बताया, “भले ही सरकार के पास शक्तियां हों, लेकिन नियमन को नीति के साथ जोड़ना और एक स्वतंत्र नियामक को निगरानी से हटाना एक प्रतिगामी कदम है।” -आवेश तिवारी, पत्रकार


