
यशवंत सिंह-
देह और मन की आंतरिक भाषा को अगर समझ लें तो दवाओं की जरूरत बहुत कम पड़ेगी. फिर गंभीर रोग शायद ही हों. ऐसा क्यों कह रहा हूं… पूरी कहानी पढ़ने के बाद सोचिएगा…
तीन दशक तक झूमकर शराबखोरी करने और कोरोना काल के गंभीर संक्रमण के चलते इंटेस्टाइन में गड़बड़ी शुरू हुई तो सबसे पहला लक्षण ज्यादा गैस बनने के रूप में सामने आया. पैनडी पैन40 टाइप दवाएं खाकर इसे दबाता, इग्नोर करता रहा.
बात जब ज्यादा बढ़ी तो एंडोस्कोपी कराया, वो भी बिना बेहोशी के. इस बहादुराना कार्य के नतीजे में पता चला कि इंटेस्टाइन में एच पाइलोरी नामक एक भीषण बैक्टीरिया का साम्राज्य स्थापित है. इनको नेस्तनाबूत करने के लिए तगड़े एंटीबायोटिक का कोर्स पंंद्रह दिन चला. फिर इनके दुष्प्रभावों छालों आदि को हील करने के लिए दवा का दौर चला. अब मामला पटरी पर है.

आज जो दवाएं लिखी हैं डाक्टर ने उसमें एक सुबह सुबह गैस रोधी दवा है सायरा डी. ये सबसे सस्ती दवा है गैस रोधी दवाओं में. सेकेंड दवा ट्राईग्लिसरीन कम करने वाली है. तीसरी दवा बिकासूल है, मुंह के छाले वैगरह के लिए. चौथी दवा विटामिन डी है जिसे वीकली लेना है.
आज पूछ ही लिया. एल्कोहल चल सकता है कभी कभार. डाक्टर सुश्रुत सिंह ने कहा- बिलकुल नहीं… अगर आपको पता है कि इससे प्राब्लम है तो वो काम फिर क्यों करने का? तो उन्होंने पर्ची में लिख भी दिया, नो एल्कोहल. पिछली बार स्पाइसी और आयली बिलकुल मना था. इस बार लो स्पाइसी लो फैट लिखा है. चालीस मिनट कसरत भी लिखा है.
ये सब ध्यान से दखिए तो क्या है. बैक्टीरियल इनफेक्शन को छोड़ दीजिए तो बाकी सारा खेल लाइफस्टाइल का है. पेट के मरीजों की बाढ़ आई हुई है. गैस्ट्रो के डाक्टरों की चांदी है. बारह बारह सौ रुपये फीस है. कारण सिर्फ एक है. जब तक कोई दिक्कत नहीं हुई है तब तक रोज पार्टी करो, जमकर बाहर का खाओ पीओ. मीट मुर्गा बकरा मछली रोज उड़ाओ. दारू बीयर गांजा भांग सब ठेले जाओ. एक दिन अंदर का सिस्टम कह देता है कि बहुत हुआ. अब बदलो या झेलो.
पर हम दारू मुर्गा वाली लाइफस्टाइल के इतने तगड़े तरीके से अभ्यस्त हो जाते हैं, इस रुटीन को इतने ज्यादा दिनों से अपनाए हुए होते हैं कि उसे दिल दिमाग से कहकर तुरंत तो बदला नहीं जा सकता. संगत भी ऐसी बन चुकी होती है कि उनके अलावा किसी दूसरे के साथ उठने बैठने का दिल तक नहीं करता. तो ऐसे में फिर शुरू होती है दिल दिमाग की लड़ाई. बदलाव की लड़ाई.
देह और दिमाग कहता है सुधर जाओ, आदतें और संगत का आह्वान होता है कि अरे यार क्या रखा है जीने में, आ जाओ पार्टी में चौड़े सीने में.
मैं भी इस द्वंद्व को करीब छह से आठ साल तक जिया. अब शांति है. आठ नौ महीने हो गए सब छोड़े हुए. कह सकता हूं कि अब जाकर लाइफस्टाइल चेंज कर पाया हूं. खिचड़ी दही चोखा सबसे प्रिय भोजन लगने लगा है. घर के अलावा बाहर का खाना खाने की इच्छा नहीं होती. कहीं मजबूरी में फंस गए तो बस दाल और रोटी. दाल भी बिना फ्राई. सिर्फ उबली. हरिद्वार में जब भी आश्रम के बाहर खाना हुआ तो कई दिनों तक यही खाया.
आज डाक्टर के यहां फालोअप के लिए गया था. उन्होंने पूछा कोई दिक्कत. हमने कहा कोई दिक्कत नहीं…. जब उबला ही खाना है, जमकर वॉक करना है तो फिर दिक्कत क्या होगी… अरे हम रोज दारू मुर्गा करें और बिना एक इंच टहले बेड पर सोए सोए राज करें… तब दिक्कत न आए तो आपको असली डाक्टर मानें…
डाक्टर बेचारे सिर पर हाथ रख बोले… नो एल्कोहल, नो स्पाइसी फूड… चार हफ्ते बाद आइएगा… अगला ओपीडी आपका फ्री रहेगा… आप पत्रकार हैं, अच्छा बात करते हैं…
😁😍
ये तबका वीडियो है जब एंडोस्कोपी के बाद एच पायलोरी डायग्नोज हुआ और ट्रीटमेंट चलने लगा….
कुछ प्रतिक्रियाएं देखें-
akesh Dhar Dwivedi
अच्छी पोस्ट लिखी। बहुत से लोगो को 40-50 की एज में यह समस्या है। कंट्रोल नही कर पाना खुद को
Ashok Thapliyal
इच्छाशक्ति जगाने वाली पोस्ट । फॉलोअप करना होगा। अच्छे दिन आएंगे। बहरहाल मियां ग़ालिब भी याद आए—
बाद तौबा के भी है दिल में ये हसरत बाकी
दे के कसमें कोई इक जाम पिला दे हम को।
Prabodh Narain Singh
नवसुखुआ पीने वालों के लिए बहुत सुन्दर लेख है।
Bipin Chandra
आखिर सबको आना ही है इस डगर पर। उम्र का तकाजा यही है।
Aryan Yadav
H pylori Endoscopy s detect ho gya tha ya biopsy krai thi Sir.?
Yashwant Singh
एच पायलोरी के लिए स्टूल टेस्ट कराएं. ये आसानी से हो जाता. एंडोस्कोपी इसलिए कराया था ताकि इंटेस्टाइन के भीतर की क्या स्थिति है, पता चले. एंडोस्कोपी में इंटेस्टाइन के छाले-जख्म वाले इलाके का एक टुकड़ा भी निकाला जाता है जिसकी जांच से बहुत कुछ पता चलता है. उसी से एच पायलोरी भी पता लगता है. लेकिन एच पायलोरी स्टूल टेस्ट से भी एकुरेसी से मालूम चल जाता है. मैंने ट्रीटमेंट के तीन माह बाद डाक्टर के कहने पर स्टूल टेस्ट कराया जिससे पता चला कि एच पायलोरी अब खत्म हो चुका है.
Rajan Shukla
नरकीय जीवन जी रहे हैं 🙂
Yashwant Singh
मुझे अब उल्टा लगता है. दारू मुर्गा वालों को देखकर लगता है कि ये नारकीय जीवन जी रहे हैं… पीने के बाद वो क्या बोलते करते हैं, उसे देखकर सोचता रहता हूं कि मैं भी तो पीकर ऐसा ही करता रहा होऊंगा… बाकी पैसा सेहत वक्त… तीनों की बर्बादी…
Vishwatosh N Singh
लौकी नेनुआ जौ की रोटी और कुछ चावल…अब इसे ही स्वीकारना होगा….तब जाकर 15 दिन में एक बार आप बेइमानी कर सकते हैं…
Yashwant Singh
अब बेइमानी करने का भी दिल नहीं करता. जो बोतलें गिफ्ट में मिलती हैं उन्हें मैं मित्रों को बुलाकर बिठाकर पिला देता हूं, खुद चिखना का दुश्मन बन जाता हूं… इस स्थिति में आने में काफी वक्त लगा… वरना कम पीना और कभी कभी पीना तो काफी पहले से कर दिया था..
Mamta Kalia
पूरी अंतर्कथा लिख दी आपने। शुक्र है यह curable है
Yashwant Singh
हां मेरा लीवर तो इंटैक्ट है लेकिन एच पायलोरी बैक्टीरिया से इंटेस्टाइन का काफी हिस्सा एलर्जिक और इरोसिव हो गया था… इसे अगर अब न संभाला जाता तो फिर ये अल्सर और कैंसर में तब्दील हो सकता था.
Shambhu Dayal Vajpayee
बहुत बात कही। मैं भी 10-12 साल से इस द्वंद्व में चल रहा हूं ,मन कहता है बहुत हो गया सिगरेट-शराब छोडो ,पेट भी लगातार संकेत देता ही है। फिर भी अनसुना कर आगे बढ जाता है। परिवर्तन नयी अनुभूतियों के लिए जरूरी है। देखता हूं कब ,क्या हो पाता है।
Yashwant Singh
कुछ दिन अब मुझे बुला लीजिए और अपने साथ रखिए. या तो मैं आपकी संगत में आ जाऊंगा या आप हमारी…
Amit Maurya
अन्न का त्याग करें बाकी सब जयजय सुबह आंवला एवं एलोवेरा व खाली पेट नारियल पानी
Yashwant Singh
तू मरदे दारू छोड़ा… बाकी चाहे जउन करा…
Amit Maurya
जिसका साथ पकड़ के छोड़ दे तो बेवफा न कहलायेंगे हा कम कर दिए है एक क्वाटर बस उ भी स्कॉच
Suraj Kumar Sinha
अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे।।।।
Asima Bhatt
जी हां, सारे दुष्परिणाम अपने शरीर को अब्यूज करने का है. नेचुरोपैथी अपने शरीर को प्यार और इज्ज़त करना सिखाता है. फिर कोई तकलीफ़ नहीं होगी.
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Punit Shukla
October 16, 2023 at 5:36 am
शराबी शब्द उचित नहीं है। एक अजीब सी महक के साथ सिहरन पैदा करता है।
सुरा प्रेमी साहित्यिक, कोमल, कर्ण प्रिय शब्द रहता।
Rahul Sisodiya
October 16, 2023 at 7:22 am
दारू मुर्गा की वजह से में भी बहुत परेशान रहा हूँ। दो वर्षो तक दारू मुर्गा और स्पाइसी खाने से दूर रहा तब कही जाकर सुधार हुआ लेकिन साला वही आदत फिर पड़ने लगी हैं।
Ajay Verma
October 16, 2023 at 1:20 pm
Kya TV channels jo nashe mein hai sudhar gaye hain kya