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सुख-दुख

हमारे मीडिया के जन्तुओं के लिए मुँह छिपाने के लिए रेत तक मयस्सर नहीं है!

शीतल पी सिंह-

भारतीय मीडिया/ दक्षिणपंथी समाजशास्त्रियों और बड़े बड़े सरकारी पदों से रिटायर होकर पोस्टरिटायरमेंट लाभ के पद पाने के लिए मीडिया सोशल मीडिया पर भांट बने हुए नवजात बुद्धिजीवियों ने जड़ से नाक कटवाने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग को हफ़्तों पहले एक सत्ता पलट अभियान में घर में नज़रबंद कर दिया था।

सुब्रमण्यम स्वामी जैसे खलिहर और कुछ काल्पनिक रक्षा विशेषज्ञों ने साबित कर दिया था कि शी जिन पिंग सचमुच सत्ताच्युत किये जा चुके हैं । दुनियाँ के मीडिया के किसी कोने में भी यह खबर नहीं थी हाँ यह ख़बर ज़रूर थी कि भारतीय मीडिया में यह अफ़वाह बड़ी ज़ोरों से फैली हुई है!

मोदीजी के उदय और 2014 में उनके प्रधानमंत्री बन जाने के बाद भारतीय मीडिया और भारतीय समाज का प्रभावशाली हिस्सा एकाएक बैताल बनकर पीपल के पेड़ से चमगादड़ मुद्रा में उलटा लटक गया है और इसके सीधे खड़े हो पाने की कोई संभावना दूर दूर तक दिखलाई नहीं पड़ रही है । इनसे संवाद असंभव है क्योंकि ये अनवरत किसी अज्ञात युद्ध के मैदान में योद्धाओं की वेशभूषा और मन:स्थिति में फ़िक्स मिलते हैं!

अब जब सारी दुनिया का मीडिया चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन पर शी जिन पिंग के तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने और सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्तित्व में बदलने के आख्यान लिख रहा है तब हमारे मीडिया के जन्तुओं के लिए मुँह छिपाने के लिए रेत तक मयस्सर नहीं है । वे इतिहास में निहायत घटिया दर्ज़े के विदूषक भी दर्ज हो सकें,ऐसा भी संदेहरहित नहीं है । वे दरअसल पता नहीं क्या हो चुके हैं !

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