अवधेश दीक्षित-
ऐसा कोई सगा नहीं … जिसे हरेन्द्र ने ठगा नहीं।
बनारस के इस शीर्षस्थ ठगाध्यक्ष का नाम है -हरेंद्र शुक्ला ; पहचान है एक दलाल पत्रकार की और डींगें अफ़लातून सी। इस पर अभी तक आरोप था कि वह लंबे समय से लोगों को झांसे में लेकर उनकी मेहनत की कमाई लूटता है और पैसा वापस मांगने पर दबंगई व थेथरई के दांव-पेंच अपनाता है।
पूर्व में इसके विरुद्ध टुकड़े-टुकड़े में कुछ छोटी शिकायतें विभिन्न थानों में होती रहीं और इसे यह अपनी दलाल पत्रकारिता के माध्यम से बेशर्मी पूर्वक छिपाता और दबाता रहा। अब इसका दुर्भाग्य यह कि इसने एक ग़लत नंबर डायल कर दिया, स्पष्ट है वो नंबर मेरा था-
मैंने २४ घंटे में इसके ठगी, धोखाधड़ी और बेईमानी की पूरी फाइल तैयार कर दी. जो तथ्य सैकड़ों पन्नों में दर्जनों पीड़ितों के सीने में शूल की तरह धंसे थे, वो सारे राज संकलित साक्ष्य के रूप में एक जगह संकलित कर लिया. पुलिस के उच्च अधिकारियों तथा थाना रामनगर में इसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की माँग हेतु शिकायत पत्र भी प्रेषित कर दिया है। फ़िलहाल इसकी जाँच एसीपी कोतवाली ने प्रारम्भ कर दी है. (ठगी के कुछ चुनिंदा प्रमाण और शिकायतें तथा इकरारनामा इस पोस्ट के साथ नीचे संलग्न कर रहा हूँ, जिसे आरोपी ने कई स्थानों पर लिखित एवं हस्ताक्षरित रूप में स्वीकार भी किया है.)
आरोपी हरेंद्र शुक्ला द्वारा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सालय (BHU) में नौकरी दिलाने, हॉस्पिटल में कैंटीन दिलवाने, तुलसी विद्या निकेतन जैसे अन्य प्रतिष्ठित स्कूल/कॉलेज में एडमिशन कराने, सरकारी/निजी काम कराने, ट्रांसफर-पोस्टिंग और बीमारी/दवा के नाम पर सहानुभूति लेकर पैसे ऐंठने के सटीक तरीके अपनाए जाते हैं।
शिकायत में दर्ज पीड़ितों में कुछ प्रतिनिधि नाम- मनीष चौहान, पाण्डेयपुर 5,00,000/– मामला न्यायालय में)
वसीम, बज़रडीहा 1,52,000/ (रामनगर थाने में तहरीर और आरोपी द्वारा लौटाने की लिखित आश्वस्ति, फिर पीड़ित को मीडिया का भौकाल दिखा कर थाने में ही गाली दिया जाना)
लकी सोनकर, कमच्छा- 1,50,000/ ( इन्होंने इसकी बाइक स्टाम्प पर लिखित रूप से बंधक बनाई है, लौटाने का वादा करके रास्ता बदल कर भाग जाता है)
अनुपम यादव, माँ आयरन स्टोर, पड़ाव- 25,000/-
प्रो.सिद्धनाथ उपाध्याय (पूर्व निदेशक आईटी बीएचयू)- 15,000/
प्रो. टी. एम. महापात्र पूर्व निदेशक (आईएमएस)- 15,000/
प्रो. सदाशिव द्विवेदी 15,000/
श्री बी. के. सिंह 18,000/
केशव ताम्बूल भंडार
लगभग 1,00,000/
स्व. मुन्ना पांडेय की पुत्री के एडमिशन के नाम पर 20,000/ और स्वयं प्रार्थी डॉ. अवधेश दीक्षित (₹12,000) शामिल हैं।
इसके अलावा 3 अन्य लोग, जिन्होंने लाखों रुपये से ज़्यादा हॉस्पिटल में नौकरी के नाम पर दिए हैं, डर के कारण अपनी पहचान गोपनीय रखना चाहते हैं। जबकि दर्जनों नए पीड़ित अब सामने आने लगे हैं। कुल मिलाकर 60 लाख से अधिक की ठगी का आरोप है, जो एक गंभीर आपराधिक साजिश की ओर संकेत करता है।
पैसा वापस मांगने पर आरोपी हरेन्द्र गाली-गलौज, मारपीट की धमकी देता है, अपनी पत्नी के माध्यम से झूठे छेड़छाड़ के मुकदमे में फँसाने की बात करता है और स्वयं को पत्रकार बताकर दबाव बनाता है, जिससे कई लोग डर के कारण इसके घर तगादा करने जाने से कतराने लगे और अब तक शिकायत में भी सामने नहीं आ सके हैं। प्रार्थी द्वारा सभी साक्ष्य पुलिस प्रशासन को सौंप दिए गए हैं और मेरे द्वारा साहसपूर्ण पहल के उपरांत कई ठगी के शिकार नए पीड़ित लगातार संपर्क कर रहे हैं।
अपील:
१. ठग हमेशा बड़े संस्थान एवं पदस्थ लोगों के साथ तस्वीरें खिंचा कर, अपनी प्रगाढ़ता दिखाते हुए ठगी विद्या से लोगों का पैसा लूटता है. अस्तु ऐसे समस्त संभ्रांत और उच्च पदस्थ लोग कृपया अपने सोशल अकाउंट पर इससे संबंध विच्छेद की घोषणा करें, ताकि इस ठगी में उनका व्यक्तित्व संदिग्ध न दिखे।
२. अब चुप रहने का समय नहीं है—अगर आप या आपका कोई परिचित इस व्यक्ति का शिकार हुआ है तो तुरंत संपर्क करें, डरें नहीं, आपकी पहचान सुरक्षित रखी जाएगी। इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि कोई और इस ठगी का शिकार न बने और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। प्रशासन से मांग है कि तत्काल FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए।
संपर्क: डॉ. अवधेश दीक्षित, रामनगर, वाराणसी।
मोबाइल नंबर : 9807606000
देखें कुछ शिकायतें और ठगी के साक्ष्य…








प्रकरण पर हरेंद्र शुक्ला का पक्ष-
भू माफिया अवधेश दीक्षित का एक संगठित गिरोह है। जो वाराणसी के गंगा किनारे सरकारी जमीनों पर पौधारोपण व आश्रम बनाने के नाम पर अवैध कब्जा करता है। मैं एक पत्रकार हूं अपने पेशे के अनुरूप हमने वाराणसी के रामनगर के कोदोपुर में गंगा किनारे इनके द्वारा हरे पेड़ों को जेसीबी से काटने व बाढ़ रोकने के लिए बनाये गये बंधे की मिट्टी को काटकर ले जाने की खबर अपने फेसबुक पेज पर चलाई थी और इसके इस कृत्य का विरोध किया था। मेरी खबर के बाद से यह लोग उजागर हो गये और इनके मंसूबों पर पानी फिर गया। जिस कारण यह लोग मुझसे और मेरी पत्रकारिता से रंजिश रखने लगे तथा सोशल मीडिया पर स्वयं व अपने गिरोह के सदस्यों के माध्यम से मेरे खिलाफ दुष्प्रचार कर व करा रहे। यदि मैंने अवधेश दिक्षित अथवा उसके गिरोह के किसी सदस्य से कोई रुपया लिया है तो उसका साक्ष्य प्रस्तुत करें। मैंने किसी से कोई रुपया नहीं लिया है और न ही मैं इतना प्रभावशाली हूं कि मैं किसी को किसी भी संस्थान में नौकरी दिलवा सकूं और रुपया कमा सकूं। इन लोगों द्वारा किया जा रहा मेरे विरुद्ध अनर्गल प्रलाप और दुष्प्रचार यदि बंद नहीं किया जाता है तो मैं ऐसे असामाजिक तत्वों भू माफियाओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य हो सकता हूं क्योंकि मेरा स्वास्थ्य गंभीर रूप से खराब है और हृदय रोग का मरीज हूं।
सवाल यह है कि आखिर काशीकथा के नाम पर इन भूमाफियाओं द्वारा एक आश्रम बनवाया गया है और आश्रम की आड़ में तमाम अनैतिक व असमाजिक तत्वों के जमावड़ा के साथ ही अनैतिक कार्य का संचालन भी होता है। यह पुलिस जांच का विषय है। उस आश्रम का आर्थिक स्रोत क्या है? आश्रम किसकी जमीन पर बना है? इन लोगों द्वारा कहां कहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया गया है? इस पर भी खोजी पत्रकारिता काम कर रही है इसका भी जल्द खुलासा किया जायेगा।





Dr AK Dixit
May 1, 2026 at 11:21 am
मैं डॉ अवधेश दीक्षित, कानपुर में रहता हूं और मेरा इस सबसे कुछ लेना-देना नहीं है। यह AI की बहुत बड़ी ग़लती है।