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आज के अखबार : हेडलाइन मैनेजमेंट की मार ने वोट खरीदने के ‘एडवांस पेमेंट’ को शीर्षक नहीं बनने दिया

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों में तीन बड़ी खबरें हैं। लेह की घटना के बाद सोनम वांगचुक के पीछे सीबीआई लगाने और एफसीआरए लाइसेंस रद्द किये जाने की खबरों के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। बेशक यह खबर है लेकिन याद कीजिये के उनके धरना, प्रदर्शन और आंदोलन की कौन सी खबर आपको पढ़ने के लिए मिली या आपके इन अखबारों ने दी। या सरकार समर्थक अर्नब गोस्वामी गिरफ्तार हुआ तो कितनी जल्दी जमानत मिली और खबर बनी। जबकि विरोधियों में पांच साल से जेल में बंद लोगों को जमानत नहीं मिल रही है और नेटफ्लिक्स के संपादक की गिरफ्तारी की खबर को कितनी प्रमुखता मिली और उसमें क्या मिली या जांच कहां है की – चिन्ता ही नहीं है। आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, वांगचुक गिरफ्तार, रासुका लगाया। दूसरी बड़ी खबर ‘दवाओं पर 100% ट्रम्प टैरिफ’ की खबर है। यह नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है। हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है और शीर्षक है, ट्रम्प ने दवाइयों पर 100% टैरिफ ठोंका, भारत को फिलहाल बख्श दिया है। सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पहले पन्ने पर लीड है। इसका शीर्षक है, लद्दाख की हिन्सा के लिए वांगचुक एनएसए के तहत गिरफ्तार। कुल मिलाकर, आज की लीड और सेकेंड लीड यही दो खबरें हैं। पर एक तीसरी और बड़ी खबर सरकार के हेडलाइन मैनेजमेंट का शिकार हो गई है और जैसी है वैसे तो नहीं ही छपी। जैसे छपी है वैसे अनैतिक है और प्रधानमंत्री यह सब कर रहे हैं पर मुद्दा नहीं है यह मेरी खबर है। उस पर आने से पहले बता दूं कि आज देशबन्धु की लीड ही नहीं पहला पन्ना ही अलग है। इसमें भारतीय वायु सेना के ‘सिंकदर’ की विदाई को मास्टहेड के साथ या आस-पास लीड से ऊपर बहुत प्रमुखता से छापा गया है। खबर के अनुसार, भारतीय वायु सेना के मिग-21 ने चंडीगढ़ एयरबेस से अपनी अंतिम उड़ान भरी। भारतीय वायु सेना में इसका प्रयोग 62 साल से किया जा रहा था। यह खतरनाक साबित हुआ है कि इसे उड़ता ताबूत भी कहा जाता था। कई युवा और प्रतिभाशाली पायलट की बलि ले चुका है और इसका उपयोग बंद करने की मांग कई बार, कई तरह से कई समूंहों ने की है। इस लिहाज से यह बड़ी खबर है और मोदी सरकार इसे बेड़े से हटाने का श्रेय ले सकती है। हालांकि, वह बाद की बात होगी। आज देशबन्धु की लीड भी दिल्ली के लिहाज से महत्वपूर्ण है। खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के पटाखा निर्माताओं को राहत दी है और उन्हें ग्रीन पटाखों के निर्माण की सशर्त अनुमति मिल गई है।   

टाइम्स ऑफ इंडिया में ट्रम्प टैरिफ की खबर लीड है और शीर्षक है, अब ट्रम्प ने दवाइयों पर निशाना साधा : पेटेंट वाली दवाइयों पर 100% टैरिफ। द हिन्दू में इस खबर का शीर्षक है, ट्रम्प ने दवाइयों, ट्रकों और फर्नीचर पर टैरिफ ठोंका। वांगचुक की गिरफ्तारी यहां दो कॉलम की सेकेंड लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया में वांगचुक की गिरफ्तारी पहले पन्ने पर नजर नहीं आ रही है यानी होगी तो छोटी-मोटी या फिर मेरा पूर्वग्रह। वह इसलिये कि यहां केंद्र को हाईकोर्ट के एक आदेश की खबर पहले पन्ने पर है। इस खबर के अनुसार बंगाल की महिला और पांच अन्य को जबरन बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह उन्हें वापस लाये। अदालत ने इसके लिए केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय दिया है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह बंगाल की महिला या घुसपैठिये कहे जा रहे लोगों के बारे में केंद्र सरकार के रुख, कार्य और व्यवहार के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश है। बेशक यह बड़ी खबर है। आपके अखबार में कहां, कैसे है देखिये और समझिये। दि एशियन एज में ट्रम्प टैरिफ लीड है और वांगचुक की गिरफ्तारी सेकेंड लीड। बिहार में महिलाओं को चुनाव से पहले 10,000 रुपये प्रत्येक को ट्रांसफर करने और वोट के लिए एडवांस भुगतान किये जाने की सरकारी खबर यहां उपशीर्षक में है और वह भी सरकारी भाषा और शैली में, महिला योजना की 75 लाख लाभार्थियों को 10 हजार रुपये ट्रांसफर किये। सिर्फ बिहार की महिलाओं के लिए यह काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया (पैसे केंद्र ने दिये या राज्य ने यह खबरों में मुद्दा ही नहीं है) और इस मौके पर या इस घोषणा की खबर का शीर्षक है, बिहार की महिलाओं को सबसे ज्यादा पीड़ा (या तकलीफ) राजद के कुशासन में हुई : मोदी

कहने की जरूरत नहीं है कि पैसे राज्य सरकार के हों या केंद्र सरकार के, जनता के ही हैं और प्रधानमंत्री उसे देते हुए भाजपा के मौजूदा मुख्य विपक्षी दल की आलोचना कर रहे हैं। यह वह दल है जो वर्षों से सत्ता में नहीं है और बीच में चुनाव जीत भी गया था तो उसे जबरन सत्ता से हटाने के लिए नीतिश कुमार को मोहरा बनाया गया जो लगातार वर्षों से मुख्यमंत्री है और प्रधानमंत्री उनके काम से वोट नहीं मांग सकते हैं इसलिए नकद बांट रहे हैं। चुनावी आचार संहिता से बचने के लिए चुनाव की घोषणा से पहले। लेकिन यह पालतू बना लिये गये चुनाव आयोग का डर नहीं, उसकी और अपनी लाज बचाने के लिए हैं वरना मोदी जी की चले तो वे मतदान के पहले वाले दिन भी बांट देते हैं। मुंबई में नकद बांटते हुए भाजपा के नेता पकड़े ही गये थे। किसी कार्रवाई की खबर तो नहीं दिखी। चुनाव के दौरान शांत अवधि में पड़ोस के क्षेत्र में भाषण देकर गोदी मीडिया पर प्रचार करते ही हैं। इसके लिये चुनाव आयोग खास तारीखें तय करता है – यह सब पुराने आरोप हैं। हालांकि, यह सब अलग मुद्दा है। आज इंडियन एक्सप्रेस की लीड और सेकेंड लीड भी यही दो खबरें हैं। लीड सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी है। शीर्षक में बताया गया है कि उन्हें जोधपुर ले जाया गया है। ट्रम्प टैरिफ की खबर का उपशीर्षक है, फिलहाल भारत इसके प्रभाव से मुक्त रह सकता है लेकिन ब्रांडेड जेनरिक का निर्यात एक चिन्ता है। मेरी चिन्ता यह है कि शीर्षक और खबरों से सरकार के बचाव की जबरदस्त कोशिश चल रही है और अखबारों से ऐसा लगता है कि सभी संपादक पत्रकारिता के एक ही गुरु के शिष्य हैं। सुनने में आता है और सार्वजनिक तौर पर कहा जा चुका है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी इस संबंध में व्हाट्सऐप्प पर निर्देश जारी करते रहते हैं।

ऐसे में बिहार में वोट चोरी के आरोप में होने वाले आगामी चुनाव में सत्ता पर कब्जा बनाये रखने की कोशिश में कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार की 75 लाख महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये प्रत्येक के हिसाब से ट्रांसफर किये। इसे डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर कहा जा रहा है। मतलब जितना सरकार दे रही है वह सीधे पहुंच रहा है। यहां यह बताना उचित होगा कि बिहार के एक वरिष्ठ पत्रकार और जनसत्ता में मेरे वरिष्ठ रहे पद्म विजेता सुरेन्द्र किशोर अक्सर पूर्व प्रधानमंत्री, दिवंगत राजीव गांधी के कहे का उल्लेख करते हैं। विकिपीडिया के अनुसार, 1980 के दशक में भारत के उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि कल्याण और गरीबी उन्मूलन के लिए लक्षित प्रत्येक रुपये का केवल एक अंश, 15 पैसे, इच्छित लाभार्थी तक पहुँचता है। प्रधानमंत्री के इस अवलोकन को एक अनुमान, एक आकलन कहा गया है, जो अनुभवजन्य आंकड़ों पर आधारित नहीं है। जो भी हो, सीधा ट्रांसफर करने के मामले में भी गलत लोगों को पैसे भेजने के उदाहरण हैं। इससे संबंधित गूगल पर मिले कुछ शीर्शक इस प्रकार हैं, 1) अकाउंट नंबर गलत होने से दूसरे खाते में चली गई किसान सम्मान निधि की धनराशि 2) अकाउंट नंबर गलत होने से दूसरे खाते में चली गई किसान सम्मान निधि की धनराशि 3) पीएम किसान निधि: 27 लाख किसानों के खाते में ट्रांजैक्शन फेल, जानिए क्या है कारण, कर लें सुधार वरना फंस सकती है अगली किस्त भी 4) आपके पड़ोसी ने गलत तरीके से ली है क‍िस्‍त, अब वापस करने होंगे पैसे; ऐसे चेक करें नाम 5) गलत जानकारी देकर ले रहे हैं पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम का पैसा तो हो जाईए सावधान! (यहां कार्रवाई की कोई खबर हो तो मैं चेक नहीं कर रहा हूं। पढ़ने या देखने को तो नहीं ही मिली है)। 6) आपके खाते में भी नहीं आया 20वीं किस्त का पैसा? जानें वजह, 2000 रुपये पाने का ये है तरीका 7) इन लोगों को नहीं मिलेगा प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना की 21वीं किस्त, जानें ऐसा क्यों (खबर में कहा गया है – कई लोग हैं जो गलत तरीके से इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। खासकर वे जो 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन के मालिक बने हैं। कुछ परिवारों के कई सदस्य इस योजना से पैसे ले रहे हैं, जो गलत है। goodreturns.in की इस खबर में कहा गया है, अब सरकार ने कहा कि 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन के मालिक बनने वाले किसानों के कागजात का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके साथ ही तमाम पात्र किसानों को e-KYC कराना अनिवार्य है, अन्यथा 21वीं किस्त की राशि नहीं मिल पाएगा।

इन सात शीर्षकों के दम पर मैं यह कह सकता हूं कि ‘नामुमकिन मुमिकन है’ के जमाने में खबरें तब तक चर्चा में नहीं आती हैं जब तक राहुल गांधी जैसी कोई हस्ती उस पर प्रेस कांफ्रेंस न करे मुद्दा न बनाये। लेकिन तब भी कार्रवाई नहीं होती है। अब सरकारें नहीं गिरती हैं। इमरजेंसी की खबरों (या ज्यादती) के कारण इंदिरा गांधी की सरकार तो उस कमजोर विपक्ष ने गिरा दी थी जिसे खिचड़ी सरकार कहा जाता था। खुद ढाई साल में बिखर और लुढ़क गई थी जब मोरारजी देसाई, चरण सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी ही नहीं लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेता थे। अब की सरकार के प्रवक्ता, प्रचारक, स्वयं गृहमंत्री और प्रधानमंत्री ने इंडिया गठबंधन और गठजोड़ की राजनीति के बारे में क्या सब कहा है उसे याद दिलाने की जरूरत नहीं है। विपक्षी नेताओं पर तमाम अभद्र टिप्पणी करने वाले शीर्ष नेतृत्व के प्रचारक मां की गाली को मुद्दा बनाने में लगे हैं। ऐसे में मोदी सरकार ने पत्रकारों और पत्रकारिता का जो हाल कर रखा है उसमें पत्रकारों के नाराज वर्ग को खुश करने के लिए, किसी उपयोगी पुत्र का दिल जीतने के लिए, किसी वरिष्ठ, गरिष्ठ, बीमार या मृत पत्रकार को भारत रत्न दे दिया जाये तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा। पिछली बार जिस ढंग से और जितनी जल्बाजी में भारत रत्न बांटे गये उससे बहुत सारे पत्रकार भारत रत्न होने का इंतजार कर रहे हों तो गलत नहीं करेंगे। खबरों से आंख मूंदे रहने का ईनाम तो मिलना ही चाहिये। पर मैं खबरों की ही बात करूंगा।

बिहार की 75 लाख महिलाओं को 10 हजार रुपये के डीबीटी की खबर मेरे नौ अखबारों में सबसे प्रमुखता से हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी है। सबसे आलोचनात्मक (मैं प्रभावशाली या सही कहूंगा)  शीर्षक, “रेवड़ी राजनीति के आलोचक ने बिहार में ₹7,500 करोड़ की ‘रेवड़ी’ बांटी” – द टेलीग्राफ में है। हालत यह है कि ज्यादातर अखबारों के शीर्षक में भी भक्ति या डर दिखता है। आइये उसे भी देख लें। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, बिहार में चुनाव से पहले 75 लाख महिलाओं को 10 हजार रुपये मिले। इंडियन एक्सप्रेस में यह तीन कॉलम की खबर है और शीर्षक, बिहार रोजगार योजना के तहत प्रधानमंत्री ने 75 लाख महिलाओं को 10,000 रुपये भेजे। दि एशियन एज के शीर्षक की चर्चा पहले कर चुका हूं। टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू के साथ अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। नवोदय टाइम्स में यह सेकेंड लीड है और शीर्षक है, “महिलाएं तय करें कि राजद कभी सत्ता में न लौटे : मोदी”

जारी…

इसके आगे पढ़ें-

“रेवड़ी संस्कृति” के सबसे बड़े सिंबल बन गए “वोट चोर” मोदी! https://www.bhadas4media.com/rewdi-sanskriti-modi/

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूलचूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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