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खबर में ‘सिरप’ को बार-बार ‘सिरफ’ लिख रहा है हिंदुस्तान

भदोही से जुड़ी कोडीन सिरप मामले की एक खबर में अख़बार हिंदुस्तान से गंभीर भाषाई लापरवाही सामने आई है। खबर की हेडिंग से लेकर पूरे कंटेंट में ‘सिरप’ शब्द को गलत तरीके से ‘सिरफ’ लिखा गया है। पहली नजर में यह गलती केवल शीर्षक तक सीमित लगती है, लेकिन खबर के भीतर भी वही त्रुटि दोहराई गई है।

मामला कोडीन सिरप जैसे संवेदनशील और कानूनी रूप से गंभीर विषय से जुड़ा है, जहां शब्दों की शुद्धता बेहद अहम होती है। ‘सिरप’ (Syrup) एक दवा का स्पष्ट संदर्भ देता है, जबकि ‘सिरफ’ कोई प्रचलित या मान्य शब्द नहीं है। ऐसे में इस तरह की गलती न सिर्फ पाठकों को भ्रमित करती है, बल्कि खबर की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।

स्थानीय पाठकों और पत्रकारों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जल्दबाजी में खबर डालने और संपादन की कमी के कारण इस तरह की गलतियां बढ़ रही हैं। खास बात यह है कि यह चूक सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि पूरी खबर में लगातार दिखाई दे रही है, जो यह दर्शाती है कि न हेडलाइन और न ही बॉडी टेक्स्ट पर ठीक से प्रूफरीडिंग हुई।

मीडिया जगत में यह सवाल उठ रहा है कि जब खबरें कानूनी कार्रवाई, पुलिस जांच और गंभीर आरोपों से जुड़ी हों, तब भाषा और शब्द चयन में इस स्तर की लापरवाही कितनी उचित है। पाठकों का मानना है कि प्रतिष्ठित अख़बारों से कम से कम बुनियादी भाषाई शुद्धता की उम्मीद तो की ही जाती है।


यह सिरफ क्या बला है? यह हाल है हिंदी पत्रकारिता का। Hindustan जैसा नामी अख़बार और उसके रिपोर्टर तो यह तक नहीं पता कि सिरप होता है या सिरफ। और यह कोई टाइपो नहीं है। हेडिंग समेत पूरी ख़बर में सिरफ ही सिरफ है। हम जब पत्रकारिता में आए थे तो कम-से-कम स्नातक होना ज़रूरी हुआ करता था। अब लगता है, दसवीं फ़ेल भी पत्रकार बन जाते हैं। वह भी हिंदुस्तान जैसे अख़बारों में। – नीरेंद्र नागर, वरिष्ठ पत्रकार

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