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सियासत

RSS महासचिव होसबोले ने संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की मांग की है!

शीतल पी सिंह-

RSS के नं दो होसबोले साहब को संविधान के पहले पन्ने में समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता शब्द से आपत्ति है। RSS और हिंदू महासभा को संविधान बनते समय से ही दिक़्क़तें थीं। श्यामा प्रसाद मुखर्जी मनुस्मृति की स्थापनाओं के लिए संविधान में जगह चाहते थे और नवंबर 1949 में संघ के मुखपत्र आर्गनाइजर में लेख छापा गया कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाया जाए और मनुस्मृति के आधार पर संविधान बने।

लेकिन इन लोगों को धार्मिक पोंगापंथ, अंधविश्वास, धर्मभीरुता, पाखंड और अपराध पर कभी कोई सवाल खड़ा करते, आंदोलन करते किसी ने कभी क्यों नहीं देखा सुना….

खैर….मथुरा में एक आश्रम के बाबा का Video सामने आया है। वो महिला से एक रात संग सोने को कहता है। फिर कहता है कि द्रोपदी के 5 पति थे, तुझे दूसरे में ही दर्द हो रहा है। महिला मना कर देती है। बाबा उसको परिवार सहित आश्रम में रहने का ऑफर देता है। महिला ने चुपके से ये Video रिकॉर्ड किया है। दैनिक भास्कर ने इस खबर को प्रस्तुत किया है।


दयाशंकर मिश्रा-

संघ का एकमात्र संकल्प हिन्दू राष्ट्र का निर्माण है। राम मंदिर बस पहली सीढ़ी थी। अभी दूसरी तीसरी, चौथी, सीढ़ी आनी बाक़ी है।

RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने एक बार फिर से दोहराया है। होसबोले ने संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की मांग की है।

पहले लोकसभा में संविधान बदलने के लिए ‘400 पार’ की माँग और अब बिहार चुनाव के पहले इस माँग का अर्थ स्पष्ट है। नागरिकों को समझना होगा ; हिंदू राष्ट्र और संविधान एक दूसरे के साथ नहीं रह सकते।

हिंदू राष्ट्र की माँग संविधान पर सबसे बड़ा हमला है। हिंदू राष्ट्र अपने ही नागरिकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की ज़िद है।

मनुस्मृति के शासन के लिए संविधान पर क़ब्ज़ा ज़रूरी है। सरदार पटेल ने हिंदू राष्ट्र की माँग को पागलपन बताया था। यह हमारी जनता का सबसे प्रबल शत्रु है। यह हमारे मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का संविधान ही नागरिकों का सबसे बड़ा हितैषी है। समता, समानता, गरिमा और बंधुत्व का सबसे बड़ा शत्रु हिंदू राष्ट्र है।

हिंदू राष्ट्र से टॉप टेन में आने वाले नागरिकों को कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। बीजेपी नेताओं के उन बच्चों पर भी नहीं पड़ेगा, जो विश्व गुरु के कॉलेज छोड़कर विदेशों में पढ़ रहे हैं। इसका उनके जीवन पर ही सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा जो रथ यात्रा, कांवड़ यात्रा में हिंदुत्व की ध्वजा लहराए घूम रहे हैं। पाँच किलो राशन के लिए लाइन में लगे 80 करोड़ लोग हिंदू राष्ट्र के सबसे बड़े शिकार होंगे। आप समझ रहे हैं न!

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