नई दिल्ली। The Indian Express में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र की मोदी सरकार अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय स्वतंत्र न्यूज़ क्रिएटर्स पर भी नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत यूट्यूब, इंस्टाग्राम और X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को एक कानूनी ढांचे के भीतर लाने की योजना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह कंटेंट को लेकर सीधे ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी कर सके। साथ ही, यदि किसी कंटेंट पर शिकायत मिलती है और वह दोषी पाया जाता है, तो क्रिएटर को उसमें बदलाव या माफी भी मांगनी पड़ सकती है।
क्या हैं प्रस्तावित बदलाव?
ड्राफ्ट संशोधनों में आईटी नियम 2021 के पार्ट-III में बदलाव का सुझाव दिया गया है, जो अब तक प्रोफेशनल मीडिया संस्थानों पर लागू होता था। अब सरकार चाहती है कि स्वतंत्र न्यूज़ और करेंट अफेयर्स क्रिएटर्स को भी इसके दायरे में लाया जाए।
सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार के “एडवाइजरी” का पालन करना अनिवार्य हो सकता है
इन एडवाइजरी को “सेफ हार्बर” सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी शर्त बनाया जा सकता है
सरकार को कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने के अधिक अधिकार मिल सकते हैं
क्यों बढ़ी चिंता?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के दिनों में कई यूजर्स को सरकार के खिलाफ व्यंग्यात्मक या आलोचनात्मक कंटेंट पोस्ट करने पर ब्लॉकिंग नोटिस मिले हैं, जबकि कई मामलों में वह कंटेंट स्पष्ट रूप से अवैध नहीं था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये नियम लागू होते हैं, तो इससे ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है और सरकार का डिजिटल स्पेस पर नियंत्रण और मजबूत होगा।
क्रिएटर्स भी होंगे “पब्लिशर” के दायरे में?
लोकप्रिय न्यूज़ क्रिएटर्स, जैसे कि यूट्यूब या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय लोग, अब तक “पब्लिशर” की श्रेणी में नहीं आते थे। लेकिन नए प्रस्ताव उन्हें इस दायरे में ला सकते हैं, जिससे उनके कंटेंट पर अधिक निगरानी और जवाबदेही तय होगी। नीचे आदेश की कॉपी पढ़ें-

संदीप देव-

सरकार को जनता की बढ़ती जागरूकता से भय लग रहा है! यह भय अच्छा है, क्योंकि लोकतंत्र में मालिक जनता है, नेता सिर्फ़ चौकीदार है और चौकीदार हमेशा भय में जीता है!
इंदिरा गांधी ने भयवश ऐसे ही जनता की आवाज को कुचलना चाहा था, अब ‘अजैविक सरकार’ भी उसी रास्ते पर चल पड़ी है!
पिछले दो कार्यकाल में इन्हें डर नहीं लगा था, क्योंकि हम जैसे लाखों हिंदुओं ने इनकी तरफ से आंखें बंद कर ली थी और इनको राष्ट्रवादी और हिंदुवादी समझ लिया था!
जब इनके पसमांदावादी, जातिवादी और अमेरिकावादी होने का राज खुलने लगा तो पहले इन्होंने अपने ट्रोलरों से इसे कंट्रोल करना चाहा, लेकिन जब इनका आईटी सेल, थर्ड पार्टी ठेकेदार कंपनी और पेड ट्रोलर मिलकर भी जनता की आवाज नहीं दबा सके तो यह कानून बनाने जा रहे हैं ताकि सोशल मीडिया पर केवल इनकी चापलूसी वाला कंटेंट ही रह सके, सवाल उठाने वाले कंटेंट को यह डिलीट कर सकें। इनको गुमान है कि जब चुनाव आयोग जेब में है तो फिर जनता की आवाज क्यों सुनी जाए?
पत्रकारिता में एक उदाहरण हमेशा दिया जाता है। ‘जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो!’ यह भूल गये कि आवाज उठाकर यहां की जनता ने अंग्रेजी राज समाप्त कर दिया था, आप तो फिर भी ‘अमेरिकी पिट्ठू’ हो; और जब आज अमेरिका स्वयं अपनी जनता के आक्रोश का सामना कर रहा है तो वह आपको क्या बचाएगा?


