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ट्रंप ने देशी मीडिया के विश्वगुरू मोदीजी के भारत को “नरकद्वार” बताया!

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। Truth Social पर शेयर किए गए कंटेंट में भारत को “hellhole” (नरक का द्वार) बताने और प्रवासियों के जरिए अमेरिका को “कॉलोनी” बनाने जैसी बातें कही गई हैं।

पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि “भारत या चीन जैसे ‘नरक’ से लोग अमेरिका आते हैं, यहां जन्म लेने वाले बच्चे को नागरिकता मिलती है और फिर पूरा परिवार वहां बस जाता है।” इस तरह की भाषा और सामान्यीकरण ने कूटनीतिक मर्यादा और आपसी सम्मान पर सवाल खड़े किए हैं।

कूटनीतिक सवाल

अब निगाहें Ministry of External Affairs (MEA) पर हैं—क्या भारत औपचारिक विरोध दर्ज कराएगा? आमतौर पर ऐसे मामलों में सरकारें आधिकारिक प्रतिक्रिया, डिमार्शे या सार्वजनिक बयान के जरिए आपत्ति जताती हैं। अब तक इस बयान पर MEA की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि भारत जैसे देश के लिए इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है और सरकार को स्पष्ट, कड़ा रुख दिखाना चाहिए। वहीं, कुछ लोग इसे अमेरिकी घरेलू राजनीति के संदर्भ में दिया गया बयान मानते हुए ज्यादा तूल न देने की बात भी कर रहे हैं।

बड़ा परिप्रेक्ष्य

भारत-अमेरिका संबंध रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं—व्यापार, रक्षा और टेक्नोलॉजी सहयोग इसके प्रमुख स्तंभ हैं। ऐसे में शीर्ष स्तर के नेताओं/पूर्व नेताओं के बयान अक्सर कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा लेते हैं।


ट्रंप ने भारत को ‘नरक’ बताया है. ट्रंप ने अमेरिकी लेखक माइकल सैवेज के वीडियो का टेक्स्ट पोस्ट किया, जिसमें भारत को Hell Hole बताया गया.’
इसमें लिखा है- “यहां पैदा होने वाला बच्चा तुरंत अमेरिकी नागरिक बन जाता है, फिर वे चीन-भारत या दुनिया के किसी अन्य ‘नरक’ से अपना पूरा परिवार यहां ले आते हैं।”
मैं लिखकर दे सकता हूं – प्रधानमंत्री मोदी इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे. न लाल आंख होगी, न ही इसपर बात होगी.
बाकी एंकर लोग संभाल ही लेंगे- विश्वगुरु बता ही देंगे.


कांग्रेस का ट्वीट-

“अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को ‘नरक’ बताया है” – ये बात बेहद अपमानजनक है और भारत विरोधी है। हर भारतीय इससे आहत है।

इस बात के लिए PM मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति से बात करनी चाहिए और कड़ी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।

हालांकि, जिस हिसाब का मोदी का ट्रैक-रिकॉर्ड रहा है, ऐसे में यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि मोदी, ट्रंप के आगे कुछ बोल पाएंगे।

ट्रंप लगातार भारत के लिए अपमानजनक बातें करते हैं और मोदी चुपचाप सुनते हैं। नरेंद्र मोदी एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं और इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।


यज्ञ सफल रहा – ट्रंप प्रसन्न, भारत ‘नरक’ घोषित
युग बदल गया है। पहले लोग भगवान को खुश करने के लिये यज्ञ करते थे, अब राष्ट्रपति बनाने के लिये करते हैं। और देखिए, परिणाम भी आ गया … ट्रंप साहब प्रसन्न हुए… और भारत को ‘हेल होल’ घोषित कर दिया।
सबसे पहले तो उन सभी यज्ञाचार्यों को साधुवाद, जिन्होंने धूप-दीप-नारियल से लेकर इंटरनेट तक का उपयोग करके लोकतंत्र को सीधा स्वर्ग से जोड़ दिया। अब अमेरिका में वोटिंग मशीन नहीं, हवन कुंड से सरकार बनती है।
ट्रंप साहब ने भारत-चीन को ‘नरक’ बताया है। हम आभारी हैं। क्योंकि इतने बड़े नेता ने हमें पहचान तो दिया वरना हम तो सोच रहे थे कि हम अभी भी ‘विकासशील’ हैं।
बुद्धिबल्लभ जी कह रहे थे “देखो, ये वही देश है जहां लोग यज्ञ करके राष्ट्रपति बनवाते हैं और फिर उसी राष्ट्रपति से सुनते हैं कि तुम नरक में रहते हो।”
कितनी अद्भुत आध्यात्मिक प्रगति है!
अब सवाल ये है कि अगर अगला यज्ञ किया जाए, तो क्या ट्रंप साहब हमें स्वर्ग घोषित कर देंगे? या फिर अगली बार वे कहेंगे, भारत तो नरक भी नहीं… नरक का भी उपनगर है। मुझे तो लगता है, हमारे यज्ञाचार्यों को अब एक नया पैकेज लॉन्च करना चाहिए “राष्ट्रपति बनाओ, सम्मान पाओ” योजना।
पहले चरण में यज्ञ होगा, दूसरे में ट्वीट आएगा, तीसरे में अपमान मिलेगा।
और मीडिया? वो इस पूरे यज्ञ को ऐसे कवर करेगा जैसे कुरुक्षेत्र का युद्ध हो, “देखिए, ये आहुति डाली गई है… इससे डॉलर मजबूत होंगे।
बुद्धिबल्लभ जी सोचने लगे, इस देश में लोग अब भगवान से नहीं, अमेरिका से डरते हैं।
और डर इतना है कि उसे खुश करने के लिये यज्ञ तक कर देते हैं। हमने यज्ञ किया था सम्मान के लिये, मिला अपमान पर संतोष है कि अपमान भी इंटरनेशनल क्वालिटी का है। अंत में, फिर से धन्यवाद उन सभी यज्ञाचार्यों को, जिन्होंने हमें यह सिखाया कि लोकतंत्र में वोट से ज्यादा ताकत घी की आहुति में होती है।
और हाँ, अगली बार जब यज्ञ करें, तो एक आहुति अपने आत्मसम्मान के लिये भी डाल दीजिएगा शायद वो भी कहीं राख में दबा पड़ा हो। -अनुराग द्वारी, वरिष्ठ पत्रकार

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