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इंडिया टुडे पर पुतिन का इंटरव्यू भारत की कूटनीति का एक अंग था

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी-

अंजना ओम कश्यप के पक्ष में…. मैं आजतक की मैनेजिंग एडिटर अंजना ओम कश्यप और इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन की तरफ हूं. दोनों ने हाल ही में मॉस्को के क्रेमलिन में रूसी राष्ट्रपति का जो इंटरव्यू किया था, वह ठीक ही था. क्योंकि वह इंटरव्यू पत्रकारिता का हिस्सा नहीं था. वह भारत की डिप्लोमैसी का, कूटनीति का अंग था.

याद रखिए कि उस इंटरव्यू का मक़सद दुनिया में भारतीय पत्रकारिता का झंडा फहराना नहीं था. उस इंटरव्यू का मकसद भारत की यात्रा के पहले पुतिन को कूल डाउन करना था. सीधी सी बात है कि जिस देश की सरकार पुतिन को नेता प्रतिपक्ष से मिलने तक न दे, क्या वहां सरकार की इजाजत और मदद के बगैर रूस जाकर, वह भी क्रेमलिन में वहां के राष्ट्रपति का इंटरव्यू करना संभव है?

जाहिर सी बात है कि यह एक प्रायोजित इंटरव्यू था. ऐसे इंटरव्यू में सवाल पूछने वाला पत्रकार नहीं होता, वह एक परफॉर्मर होता है और दोनों ने अपने रोल को ठीक से परफॉर्म किया. गालियां देना आसान है. कोई भी किसी को भी गाली दे सकता है. बिका हुआ, दलाल, भक्त आदि कहने में किसी का क्या जाता है? कोई भी सड़ियल, सनकी फूफा बन सकता है, मीन मेख निकाल सकता है.

क्या पुतिन से संवेदनशील मुद्दों –उनकी पर्सनल लाइफ, गर्ल फ्रेंडों, निजी माल असबाब, राजनीतिक नाकामियों, युद्ध के अपराध, भ्रष्टाचार और उत्तराधिकार पर सवाल पूछे जा सकते थे?

  • क्या पुतीन से पूछा जाता कि आपकी दोनों बेटियाँ कैटेरिना और मारिया रूस में क्यों नहीं रहतीं? क्या उन्हें आपके शासन से डर लगता है?
  • या यह पूछा जाता कि आपकी कथित प्रेमिका अलीना कबाएवा और उनके बच्चों को आपने सार्वजनिक रूप से स्वीकार क्यों नहीं किया?
  • यह पूछकर कोई पुतिन का क्या उखाड़ लेगा कि आपकी कुल संपत्ति कितनी है? पैलेस ऑन द ब्लैक सी (पुतिन का महल) का असल मालिक कौन है? उसे बनाने में कितना धन लगा?
  • क्या पुतिन से 1999 में मॉस्को और अन्य शहरों में हुए अपार्टमेंट बम विस्फोटों में FSB की भूमिका सवाल पूछना था?
  • या यह पूछना था कि अलेक्सेई नवाल्नी को नोविचोक से जहर देने का आदेश किसने दिया था?
  • या फिर यह पूछना था कि बूचा, मारियुपोल और इरपिन में रूसी सैनिकों द्वारा किए गए नरसंहारों की जिम्मेदारी आप व्यक्तिगत रूप से कब लेंगे?
  • या फिर यह पूछना था कि यूक्रेन में 50,000 से ज्यादा रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं। क्या आप उनकी माताओं से माफी मांगेंगे?
  • या फिर यह पूछना था कि आप 25 साल से सत्ता में हैं। क्या आपको लगता है कि रूस अब एक तानाशाही बन चुका है?
  • या फिर यह पूछना था कि 2020 के संवैधानिक संशोधन से आप 2036 तक सत्ता में रह सकेंगे। क्या आप जीवनभर राष्ट्रपति बने रहना चाहते हैं?
  • या फिर यह पूछना था कि आपने अपने कितने पुराने दोस्तों-साथियों को अरबपति बनाया है? रोमान अब्रामोविच, गेनाडी तिमचेंको, अर्कडी और बोरिस रोतेनबर्ग को ठेके कैसे मिले?
  • या फिर यह पूछना था कि क्या आपने कभी अपने कुत्ते को किसी विदेशी नेता के सामने डराने के लिए जानबूझकर इस्तेमाल किया? (जैसे एंजेला मर्केल के साथ)
  • या फिर यह पूछना था कि आपकी प्लास्टिक सर्जरी और बॉटॉक्स की अफवाहें क्यों इतनी जोरों पर हैं? आपकी सेहत वाकई ठीक है?
  • या फिर यह पूछना था कि क्या आप डरते हैं कि एक दिन आपका भी गद्दाफी या सद्दाम हुसैन जैसा अंत होगा?
  • या फिर यह पूछना था कि क्रेमलिन में कौन सा व्यक्ति आपका उत्तराधिकारी हो सकता है? या आप किसी को सत्ता सौंपने को तैयार ही नहीं हैं?
  • या फिर यह पूछना था कि आपने बोरिस येल्तसिन के परिवार को 1999 में अभयदान क्यों दिया था? क्या आपको भी अपने लिए ऐसा ही अभयदान चाहिए?
  • या फिर यह पूछना था कि 2008 में जॉर्जिया और 2014 में क्राइमिया के बाद आपने यूक्रेन पर 2022 में पूर्ण आक्रमण क्यों किया, जबकि आप जानते थे कि रूस आर्थिक रूप से तबाह हो जाएगा?
  • या फिर यह पूछना था कि रूस में हजारों लोग सिर्फ ‘स्लावा युक्रेनी’ कहने पर जेल जा रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आप स्टालिन से भी बदतर हो गए हैं?
  • या फिर यह पूछना था कि प्रिगोझिन की विमान दुर्घटना “तकनीकी खराबी” थी या आपका आदेश? आपने अपने भाषणों में बार-बार कहा कि “रूस के पास यूक्रेन पर परमाणु हमला करने का कोई इरादा नहीं है”। तो फिर आपने परमाणु हथियारों की धमकी क्यों दी?
  • या फिर यह पूछना था कि अगर कल आप मर जाएँ तो अगले 24 घंटे में रूस में क्या होगा? क्या आपको लगता है कि आपके बिना रूस का पूरा सिस्टम ढह जाएगा? या जनता जश्न मनाएगी?

सवाल तो बहुतेरे होंगे. अंजना ओम कश्यप और गीता मोहन के पास भी होंगे. जब मेरे पास हो सकते हैं तो उनके पास भी होंगे ही…. लेकिन वे सवाल पूछने क्रेम लिन, मास्को, रूस थोड़े ही गई थी.

किसी भी पत्रकार को मौका मिलता तो छोड़ता?… और अगर कोई पत्रकार यह सवाल सीधा पुतिन से कर ले तो उसे…. छोड़ेगा? इनमें से ज्यादातर सवाल रूसी टीवी पर कभी नहीं पूछे जा सकते, क्योंकि पूछने वाला तुरंत गायब हो जाएगा।

मैं अंजना ओम कश्यप और गीता मोहन के परफार्मेस की तारीफ करता हूं. उन्हें इंक्रिमेंट की सिफारिश भी करता हूं! आमीन!

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