संजय कुमार सिंह
आज मेरे ज्यादातर अखबारों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत के बाद के कमाल की खबर (रें) लीड है। खास बात यह है कि कल खबर थी, ईरान के राष्ट्रपति ने भारत को राहत देने से मना कर दिया आज राजदूत के हवाले से दोस्ताना रिश्तों की खबर छपी है। देशबन्धु में यह खबर लीड नहीं है लेकिन शीर्षक है – पश्चिम एशिया संकट के बीच ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली बोले, भारत-ईरान के बीच दोस्ताना रिश्ते। देशबन्धु में यह खबर भी है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और कोमा में हैं। युद्ध के समय ऐसी खबरों का कोई खास मतलब नहीं होता है और आज दोस्ताना रिश्तों की खबरों के साथ इसकी पुष्टि या खंडन होना चाहिए था। पर वह सब भी नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर का शीर्षक है, भारत आने वाले ईंधन के जहाज के सुरक्षित निकास पर ईरान के दूत ने कहा, पूरी कोशिश करूंगा। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार आश्वासन मिल गया। मोदी ने कहा, ईरान मित्र है। खबर का इंट्रो है – रिपोर्ट है कि गैस लेकर आ रहे दो पोत होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। खबर इस प्रकार है, गुरुवार को देर रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत में मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत ईरान का मित्र है और उनकी सरकार कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए जो कुछ भी कर सकेगी, करेगी क्योंकि युद्ध बढ़ना किसी के हित में नहीं है। अखबार ने लिखा है कि यह तेहरान के साथ एकजुटता जताने के सबसे करीब है और तेहरान ने कहा कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय पोत को सुरक्षित जाने देगा। खबर में यह भी लिखा है कि, ईरान के राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की संतुलित और रचनात्मक स्थितियों तथा तनाव कम करने के इसके प्रयासों को सराहा है।
दुनिया जानती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से युद्ध शुरू होने के कई दिनों बाद बात की। इतने समय देश को कुछ भी नहीं बताया। बात तब की जब कोई रास्ता नहीं बचा, मजबूरी थी। कल यह खबर सुर्खियों में थी। मैंने लिखा था कि सोशल मीडिया की खबरों के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध को ठुकरा दिया है। कल यह बात खबरों में नहीं थी। संभव है यह सूचना देर से आई हो इसलिए छप नहीं पाई हो। लेकिन यह खबर दिन भर मीडिया में नहीं के बराबर चर्चा में आई। अगर गलत थी तो यह भी नहीं बताया गया। आज इस खबर को नजरअंदाज करते हुए खबर छपी है। यह राजदूत के हवाले से है। कल की खबर की चर्चा ही नहीं है। स्थिति यह है कि आज द हिन्दू में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है और पहले पन्ने पर अंदर जिन खबरों की सूचना है उनमें भी यह खबर नहीं है। इन खबरों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव की खबर भी है। हिन्दुस्तान टाइम्स, द टेलीग्राफ, नवोदय टाइम्स की लीड सरकारी है। और यही अमर उजाला की लीड है। भिन्न अखबारों के शीर्षक की भाषा और शब्द अलग हो सकते हैं लेकिन मूल खबर वही है जो अमर उजाला में है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक इस प्रकार है, गैस से लदे भारत के दो जहाजों को होर्मुज से निकलने की मंजूरी। उपशीर्षक है, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियन की बातचीत के बाद बनी सहमति, जयशंकर-अराघची की भी वार्ता। इस खबर के मुख्य शीर्षक के साथ लाल रिवर्स में छपा है, ईरानी राजदूत ने कहा – भारत व ईरान दोस्त।

आज की खास खबरों में एक यह भी है कि सरकार यह साबित करने में लगी है कि युद्ध के कारण देश में गैस की किल्लत नहीं है। इसके लिए भाजपा ने तमाम उपाय किए हैं और यह आरोप लगाया जा रहा है कि जानबूजकर गैस को लेकर डर फैलाया जा रहा है। मेरा मानना है कि अगर कांग्रेस ऐसा कर रही है और गैस की कोई किल्लत नहीं है तो सरकार उससे निपटने में पूरी तरह नाकाम है और कांग्रेस जीत रही है, भाजपा परेशान है। यह अलग बात है कि ऐसा है नहीं और संकट नहीं होता तो भाजपा परेशान क्यों होती है। हम कई साल से देख रहे हैं कि भाजपा और खासकर नरेन्द्र मोदी कांग्रेस को कोस कर ही वोट पाते हैं। आगे की बाद में देखेंगे पर अभी तो साफ दिख रहा है कि मोदी जी ने ईरान के राष्ट्रपित से बात करके सब ठीक कर लिया, गैस की कोई किल्लत नहीं है। कांग्रेस पैनिक फैला रही है और भारतीय पोत को होर्मुज स्ट्रेट से सेफ पैसेज मिलता रहेगा। कुछ जहाज आ गए हैं उसका भी प्रचार है। हालांकि कल खबर छपी थी कि जहाज ने ट्रांसपोंडर को बंद कर होर्मुज क्षेत्र पार करने का जोखिम लिया था। आज दि एशियन एज में भी सरकारी प्रचार की यह खबर नहीं है। गैस की खबर जरूर है और सरकार ने यह संदेश दिया है कि गैस के लिए न घबराएं। द हिन्दू ने आज नई वैश्विक अनिश्चितताओं, जैसे पश्चिम एशिया संकट और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से निपटने के लिए भारत सरकार के ₹57,381.84 करोड़ से लेकर ₹एक लाख करोड़ तक के आर्थिक स्थिरीकरण कोष की स्थापना की खबर को लीड बनाया है। यह कोष भू-राजनीतिक तनावों और आकस्मिक आर्थिक झटकों के दौरान राजकोषीय लचीलापन बनाए रखने और देश की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक ‘बफर’ के रूप में काम करेगा।
होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पोत को निकलने की इजाजत के संबंध में अमर उजाला की खबर इस प्रकार है, पश्चिम एशिया में जंग के चलते भारत में पैदा हुए एलपीजी संकट के बीच शुक्रवार को तब बड़ी राहत मिली, जब ईरान ने भारत के गैस से लदे दो जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलने की इजाजत दे दी। वहीं, सऊदी अरब का एक तेल टैंकर भी शनिवार को भारत पहुंचने वाला है। पीएम नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच बृहस्पतिवार को फोन पर हुई बातचीत के अगले दिन यह राहत भरी खबर आई है। इससे पहले, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने सहमति के संकेत देते हुए कहा था कि ईरान भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने के लिए सुरक्षित रास्ता देगा। फतहाली ने कहा कि भारत और ईरान मित्र हैं और ऐसा करना हमारे हित में है। फतहाली ने कहा, भारत से हमारे अच्छे संबंध हैं। हमने समस्याएं हल करने की पूरी कोशिश की है। यह सब तब जब अमर उजाला ने कल खबर दी थी और मैंने यहां लिखा था। आज उसी खबर के अनुसार यह बताना उपयुक्त रहेगा कि ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने कहा था कि ईरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की अनुमति दी है। यह मार्ग ईरान पर इस्त्राइल और अमेरिका के हमले के समय से ही बंद है। तख्त- रवांची ने कहा, कुछ देशों ने होर्मुज से सुरक्षित मार्ग प्रदान करने के बारे में हमसे बात की है। हमने उनके साथ सहयोग किया है। हालांकि, उन्होंने यह जानकारी नहीं दी कि किन देशों गया है। उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि जिन देशों ने के जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया आक्रमण में अमेरिका-इस्राइल का साथ दिया, उन्हें होर्मुज से सुरक्षित मार्ग का लाभ नहीं मिलना चाहिए। अब खबर ऐसे छप रही है जैसे नरेन्द्र मोदी ने बात की और भारत को कोई विशेष सुविधा मिल गई है जबकि कल की खबर के अनुसार, ईरान ने कहा था विशेषकर भारत को – आज उसकी चर्चा नहीं है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


