Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो दुनिया जब युद्ध में फंसी है, भारत सरकार मीडिया मैनेजमेंट में!

अफगानिस्तान पर हमला, भारत की प्रतिक्रिया और प्रचारकों की तैनाती की सरकारी तैयारीसे लग रहा है कि देश की कूटनीति बच्चों के पार्टी-पार्टीके खेल या कुट्टी होने जैसे युद्धमें बदल गई है।

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों की बड़ी खबरों में एक – अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हमला है लेकिन देश के लिए इससे बड़ी ‘खबर’ यह है कि भारत ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है और अखबारों में इसे कहीं ज्यादा कहीं कम महत्व मिला है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है – काबुल में अस्पताल पर पाकिस्तान का हवाई हमला, 408 लोगों की मौत। बेशक, अंतरराष्ट्रीय स्तर की यह एक बड़ी खबर है लेकिन भारत के लिए यह भी खबर है कि सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है जो अमर उजाला में कड़ी निन्दा के तहत छपी है। इसका शीर्षक है, भारत ने कहा – कायरतापूर्ण व अमानवीय कृत। मेरे नौ अखबारों में हमले की खबर टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू में लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक में ही लिखा है, भारत ने ‘बर्बर कार्रवाई’ की निन्दा की। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की ही खबर के अनुसार, पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने से इनकार किया है। द हिन्दू में यह खबर लीड है। उपशीर्षक में लिखा है कि पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया और सैकड़ों मौतों के दावों को प्रचार कहकर खारिज किया। भारत ने इस कार्रवाई की निन्दा की, अलग से सिंगल कॉलम की खबर है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला है और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए सीधा खतरा है।

कहने की जरूरत नहीं है कि भारत ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले की निन्दा तो की है लेकिन 28 फरवरी 2026 को जब ईरान पर इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के हमले शुरू हुए, उसी दिन दक्षिणी ईरान के शहर मिनाब में “शाजरेह तैय्यबेह” नाम के एक गर्ल्स स्कूल पर हमला हुआ था। यह हमला स्कूल के समय हुआ और बच्चियाँ कक्षा में थीं। लिहाजा बड़ी संख्या में बच्चियाँ मारी गईं। पर भारत ने न कोई सीधी, कड़ी या नाम लेकर निंदा की। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में हमले के बाद भारत ने अपेक्षाकृत स्पष्ट शब्दों में चिंता जताई और निन्दा की है। इसलिए यह खबर बड़ी हो गई है। इंडियन एक्सप्रेस ने इजराइल के कहने के आधार पर ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी के मारे जाने की खबर को लीड बनाया है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने अफगानिस्तान पर हमले की खबर को पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड बनाया है जबकि मुख्य अखबार की लीड, वार्ता की पेशकश को खारिज किए जाने की खबर है। शीर्षक है, इजराइल ने (ईरान के) सुरक्षा प्रमुख के मारे जाने की खबर दी तो ईरान ने वार्ता की पेशकश खारिज कर दी। खबर इस प्रकार है, इजराइल ने मंगलवार को कहा कि उसने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी को मार गिराया है। वह युद्ध के पहले दिन से अब तक लक्षित सबसे वरिष्ठ हस्ती थे। एक शीर्ष ईरानी अधिकारी ने कहा कि नए सर्वोच्च नेता ने मध्यस्थ देशों द्वारा दिए गए तनाव कम करने के प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है। अफगानिस्तान पर हमले की खबर इंडियन एक्सप्रेस में चार कॉलम में है। शीर्षक में यह भी कहा गया है कि भारत के अनुसार, नरसंहार को अभियान के रूप में पूरा किया गया।

दि एशियन एज में ईरान पर ईजराइल के हमले की खबर जैसे छपी है उससे लग रहा है कि ईरान के दो शिखर के योद्धा मारे जा चुके हैं और यह तेहरान के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका है। हालांकि, फ्लैग शीर्षक के अनुसार –  ईरान के हमले से पड़ोसियों और तेल बाजारों पर दबाव। ऐसा ही शीर्षक नवोदय टाइम्स में है, हमले में ईरान के शीर्षक सुरक्षा अधिकारी लारीजानी की मौत। द टेलीग्राफ की लीड पश्चिम बंगाल चुनाव की खबर है और चुनाव के संबंध में यह बड़ी खबर है कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पूरे राज्य के अपने सभी उम्मीदवारों के नाम जारी कर दिए हैं। आज यह और इससे संबंधित कई खबरें पहले पन्ने पर हैं और जाहिर है कि युद्ध नहीं हो रहा होता या इसमें भारत की परोक्ष भागीदारी नहीं होती या कम होती तो यह स्थिति नहीं भी हो सकती थी। कुल मिलाकर, अखबारों की खबरें जब सरकार के पक्ष में होती हैं, सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि एलपीजी लेकर एक जहाज भारत पहुंच चुका है तो देशबन्धु की खबर का शीर्षक है, होर्मुज जल डमरूमध्य में तीन लाख टन एलपीजी फंसी। इन खबरों से खबरों की आपकी जरूरत या भूख कैसे पूरी होगी, आप तय कीजिए पर खबरों की प्रस्तुति सामान्य नहीं है – यह स्पष्ट है और इसी में आता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मी़डिया मैनेजमेंट में लगी हुई है और विदेशी दूतावासों में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की तैनाती होने वाली है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर इस प्रकार है : दुनिया भर के मीडिया से सीधे जुड़ने और भारत के विकास की कहानी को प्रचारित करने तथा प्रतिकूल नैरेटिव (कहानियों) का मुकाबला करने के लक्ष्य से सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के तहत एक नई वैश्विक आउटरीच इकाई बनाने का प्रस्ताव किया है। इस प्रस्ताव में भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) अधिकारियों के 40 काडर पद तैयार किए जाएंगे जो विदेशी दूतावासों में मीडिया और संचार के काम खासतौर से देखेंगे।

मोदी सरकार से पहले पीआईबी का काम उसके नाम से ही स्पष्ट है, प्रेस इंफॉर्मेंशन ब्यूरो था यानी प्रेस के लिए सूचना इकट्ठा करना और प्रेस को देना। अब यह सब नहीं होता है या कहिए नहीं के बराबर होता है। पीआईबी से फैक्ट चेक करवाया जा रहा है और मुझे लगता था कि वही सोशल मीडिया कंपनियों को संदेश भेज देता है कि फलां पोस्ट को हटा दिए जाए। नए बने भारतीय कानून का पालन करते हुए उनके लिए पोस्ट हटाना (शायद तीन घंटे में ही) मजबूरी है। ऐसे में वे पोस्ट हटा देते हैं और उपयोगकर्ता को इसकी सूचना दे देते हैं। ऐसे ढेरों मामले होते रहते हैं और सोशल मीडिया पर भी दिखते हैं। यह काम सरकारी है और सरकारी स्तर पर, सरकारी शैली में किया जाता है। इससे गलत पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो या नहीं, पोस्ट हट या दब जाती है। कायदे से सरकार को बताना चाहिए कि कौन सी पोस्ट किस कानून का उल्लंघन कर रही है और क्यों हटाया जाना चाहिए। सिर्फ पोस्ट हटाने के आदेश का पालन होना ही है इसलिए सरकार का काम तो हो रहा है पर जनता के साथ न्याय नहीं हो रहा है। सच पूछिए तो सरकार अपने और भाजपा या दूसरे नेताओं के खिलाफ खबरें हटवा देती है जबकि कांग्रेस और दूसरे दलों के खिलाफ गलत, झूठी या भ्रमक पोस्ट भी बनी रहती है।

यह व्यवस्था सरकार को अनुचित लाभ दे रही है और इससे निपटने की बजाय सरकार इस व्यवस्था का विस्तार कर रही है। यह दिलचस्प है कि सरकार यह सब तब कर रही है जब युद्ध चल रहा है।  सरकार हेडलाइन मैनेजमेंट में लगी हुई है। यह अलग बात है कि सरकार की इस नीति से परेशान होकर कांग्रेस ने भाजपा को जवाब देना शुरू किया है। विपक्ष के सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किए जाने पर उनके साथ (धरने पर) बैठकर चाय बिस्किट खाने के लिए राहुल गांधी को बदनाम करने पर आज गुरदीप सिंह सप्पल की पोस्ट अच्छी है। कहने की जरूरत नहीं है कि मुद्दा विपक्षी सासंदों का निलंबन था पर उसे चाय-बिस्किट की ओर मोड़ दिया गया। ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा था कि पहले के लोकसभा अध्यक्ष भी सदस्यों को निलंबित करते थे पर सभी दलों के सदस्य निलंबित होते थे और उनकी पार्टी के सदस्यों को कोई विशेषाधिकार नहीं होता था। ओम बिरला सिर्फ विपक्षी सासंदों को निलंबित करते हैं। संख्या बल पर टिके ओम बिरला विपक्षी सांसदों को निलंबित करने की संख्या का भी रिकार्ड बना चुके हैं। खुले आम साथी सांसद को गाली देने वाले अपनी पार्टी के सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का रिकार्ड भी ओम बिरला के नाम है। लेकिन भाजपा के लिए तो यह सब मुद्दा नहीं ही होता है अब मीडिया के लिए भी यह सब चर्चा का विषय नहीं है। अनुकूल व्यवस्ता बनाने के क्रम में सरकार अब पीआईबी से अपना प्रचार करवाने की नई योजना पर काम कर रही है।

यही नहीं, एक और खबर के अनुसार, सोशल मीडिया से पोस्ट हटवाने का अधिकार सरकार कई अन्य मंत्रालयों (असल में बाबुओं) को सौपने का विचार कर रही है। सूचना और प्रचारण मंत्रालय के अलावा अब इनमें गृह, वित्त और रक्षा मंत्रालय भी शामिल होंगे। सेना प्रमुख को किताब नहीं लिखने देने से लेकर बाबुओं पर रिटायरमेंट के बाद 20 साल की पाबंदी, खबर लीक होने पर गोपनीयता कानून के तहत कार्रवाई से धमकी आदि के बाद भ्रष्टाचार दूर करने के इस सरकार के दावों और पीएम केयर्स को याद कीजिए। दूसरी ओर भ्रष्ट कही गई कांग्रेस के खिलाफ कोई मामला अभी तक साबित नहीं हुआ है और उसने जो आरटीआई कानून दिया था उसका हाल आप जानते हैं। फिर भी हम विश्व गुरू हैं, दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था और न जाने क्या-क्या। मुझे लगता है कांग्रेस का भ्रष्टाचार ही बेहतर था। आजादी तो थी ही, लोकतंत्र भी था। इतना की लाल कृष्ण आडवाणी  को गिरफ्तार करने के लिए चुने गए युवा आईएएस प्रचारक बन गए, सांसद-मंत्री रहकर अब सरकार विरोधी हो गए हैं। मुझे लगता है कि यह मिल-बांट कर खाना है जिसे हिन्दुत्व का चोला पहना दिया जाता है। 

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन