गुरदीप सिंह सप्पल-
देश के प्रतिष्ठित अख़बार The Indian Express की एक रिपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि अख़बार ने ईरान से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर अधूरी या भ्रामक रिपोर्टिंग की है, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहला विवाद: ‘डूबे ईरानी जहाज़’ वाली खबर

अख़बार ने अपनी एक लीड स्टोरी में यह दावा किया कि डूबे हुए ईरानी जहाज़ IRIS Dena को भारतीय अधिकारियों ने शरण देने की पेशकश की थी।
हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यहां तक कि जब इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से सवाल किया गया तो उन्होंने भी इसका सीधा जवाब नहीं दिया।
आलोचना यह भी है कि अख़बार ने इस दावे को “स्रोतों” के हवाले से एक लाइन में लिखा, लेकिन बाद में भी जब इसी विषय पर फ्रंट पेज पर नई रिपोर्ट छपी तो उसमें इस दावे की पुष्टि या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
दूसरा विवाद: ईरानी राष्ट्रपति के बयान की व्याख्या

दूसरा विवाद अख़बार की हेडलाइन को लेकर है। रिपोर्ट में हेडलाइन दी गई— “Iran apologises for attack on neighbours, Trump calls its surrender.”
इसमें ईरान के राष्ट्रपति के बयान का एक अहम हिस्सा छोड़ दिया गया। उनके बयान में एक महत्वपूर्ण वाक्य था— “unless attacks come from them.”
इसका अर्थ यह है कि ईरान ने पूरी तरह हमले छोड़ने की बात नहीं कही, बल्कि यह संकेत दिया कि— यदि पड़ोसी देशों की ज़मीन से अमेरिका या इज़राइल की सैन्य कार्रवाई होती है, तो ईरान वहां हमला कर सकता है। लेकिन यदि वे देश तटस्थ रहते हैं, तो ईरान उन पर हमला नहीं करेगा।
रणनीतिक भाषा में इसे डिटरेंस मैसेजिंग माना जाता है, यानी संभावित हमले को रोकने के लिए चेतावनी देना—न कि शांति का सीधा वादा।
उठ रहे हैं सवाल
आरोप है कि इस अहम संदर्भ को हटाकर खबर को अलग तरीके से पेश किया गया, जिससे पाठकों को अधूरी तस्वीर मिलती है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह संपादकीय चूक है या जानबूझकर किया गया चयन।
हालांकि इस मामले पर अभी तक The Indian Express की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


