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आईपीएस पति की हत्या कर पत्नी ने दोस्त से कहा- राक्षस को मार डाला

मनु लक्ष्मी मिश्रा-

क समय था जब केवल पुरुष बदनाम थे कि कसाई होते हैं, पत्नी को नौकर समझते हैं, मारते हैं, पीटते हैं। यद्यपि मेरा अब भी विश्वास है कि केवल पति या ससुर रूपी पुरुष ही इस अत्याचार के दोषी नहीं हैं वरन् उन्हें पीछे से उकसाने वाली मां चाची, बुआ जैसी प्रजाति का हाथ भी सत्तर फीसदी रहता है। लेकिन आज कल देखिए मेरठ के मुस्कान कांड का नीला ड्रम देश विदेश में ट्रेंड कर रहा है। अभी इसकी चर्चा थमी ही नहीं कि रविता नामक पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मारकर सांप के काटने से मृत्यु हुई है को सिद्ध करने के लिए बिस्तर पर सांप छोड़ दिया।

आज की हैरतअंगेज हाई प्रोफाइल घटना कर्नाटक के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश की बेंगलुरु में हत्या उनकी ही पत्नी ने कर दी। 68 वर्षीय रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अपने ही घर में खून से लथपथ मृत पाए गए. शरीर पर पेट और सीने पर चाकू के कई घाव मिले. उनकी पत्नी पल्लवी ने पुलिस को फोन कर हत्या की सूचना दी। हत्या से पहले पल्लवी ने दोस्त को फोन करके कहा “राक्षस को मार डाला” कहा. संपत्ति विवाद को हत्या का संभावित मकसद माना जा रहा. ओम प्रकाश 1981 बैच के आईपीएस, बिहार के चंपारण के मूल निवासी थे.

रिश्तों के पवित्र बंधन पर कलुषित स्वार्थ की छाया जो हो रहा है ,जो दिखाई देता है और रोज़-ब-रोज पढ़ने और सुनने को मिलता है वो अत्यंत दुखदायी और आश्चर्यजनक है, पीड़ादायक भी। ऐसा नहीं कि पहले ऐसा नहीं होता था, होता तो था पर यदा-कदा, कहीं-कहीं पर ऐसा न था जैसा अब दिखाई सुनाई दे रहा है। यह समाज के लिए घातक तो है ही नयी पीढ़ी के लिए एक गंभीर चेतावनी भी।

इस तरह तो न पवित्र रिश्तों की कोई महत्व बचा रहेगा और न उन रिश्तों में बंध जाने का कोई बंधन और न उनका कोई आधार। इन बन्धनों में बंध जाने की लालसा और पवित्र रिश्तों की पवित्रता जिसके पीछे सिर्फ और सिर्फ जीवनशैली और जीवनपर्यंत साथ निभाने की लालसा ही गठबंधन आधार ही अनंत होते थे। पर आज समाज में इन रिश्तों का न कोई महत्व है और न ही कोई पवित्रता।

जो हो रहा है वह हम जैसे लोगों के लिए दुखद है और एक पृश्न जरुर कौंधता है कि आने वाला समय क्या ऐसे ही रिश्तों को कलंकित करता रहेगा? हमारा यह समाज जो पवित्र रिश्तों पर जीवन की डगर पर अपनी यात्रा करता है उसकी “जीवन की राह कैसी होगी ?” उसका ठहराव कहां होगा। लोग कहते हैं कि मां बाप अरेंज मैरिज कर देते हैं, लड़का लड़की एक दूसरे को नहीं जानते इसलिए भी ऐसे कांड होते हैं। पर मुस्कान कांड में दोनों का प्रेम विवाह था।

मेरी एक दोस्त का फोन आया कि उसका शादी योग्य बेटा तो शादी से ही डर गया और कह रहा है कि मम्मी ड्रम में जाने से तो अच्छा है कि अकेले जीवन गुजारूं। आप तो हैं ही। मनु प्लीज़ आप समझाइए मेरा तो एक ही बेटा है। मैंने उनको आश्वासन दिया कि जल्दी ही बेटे से मिलूंगी। अगर ड्रम, सांप से कटाने, प्रेमी के साथ मिलकर पति मारे गए हैं तो फ्रिज में, अटैची में, बोरों में, मारकर फांसी में लटकाई पत्नियां भी गईं हैं। दोनों पक्ष प्रताणित हैं। महिलाओं के साथ पहले से होता आया है पुरुषों के साथ अब मामले सामने आ रहे हैं।

आज आवश्यकता है पुनः मूल्यों की तरफ लौटे। न केवल बच्चों बल्कि हर उम्र के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। उन्हें केवल मंहगे गैजेट्स, इंटरनेट के सहारे न छोड़ा जाए। सारी कोशिश करने के बाद भी रिश्ता न चले तो सम्मान से अलग होना चाहिए, समाज क्या कहेगा इस ट्रामा से बाहर निकलना होगा। अलग-अलग होकर भी बच्चों को पाला जा सकता है।

यदि किसी रिश्ते में प्यार नहीं है तो जबरदस्ती से नहीं सुखी रहा जा सकता। एकतरफा प्यार है तो आप करिए कौन मना कर रहा है। प्यार में प्रेमी त्याग प्रस्तुत करता है। दूसरे पक्ष को बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे रिश्तों का अंजाम हमेशा बहुत खराब होता है। कोई खुश नहीं रह सकता।

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