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सियासत

दंगाइयों का बखूबी नियंत्रण करने वाले आईपीएस का मिनटों में ट्रांसफर बताता है कि अब नेता, ईमानदार अफसर को डिस्टर्ब करने से गुरेज नही करते!

मनीष सिंह-

“अरे, वो ईमानदार आदमी है, डिस्टर्ब मत करो”

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छत्तीसगढ़ में मेरे जिले से एक बहुत बड़े नेता हुए। सरपंच से विधायक, मंत्री और फिर मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। पीसीसी के प्रेसिडेंट थे।

शानदार इंसान.. प्रशासन की घुट्टी रग रग में थी। अफसरों को कैसे टेकल करना है, नंद कुमार पटेल से बेहतर कौन जानता था। अद्भुत लोकप्रियता थी। कोई उनके दरवाजे से खाली हाथ नही जाता था। न कोई उनका आग्रह ठुकरा पाता था।

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एक दफे हमारी पेशी लगी। उनकी विधानसभा के एक गांव में, मजदूरी पेमेंट न होने की शिकायत हुई थी। दरअसल स्थानीय मुंशी नें एस्टिमेट से ज्यादा काम करा दिया था। बजट था नही..

‘गांव वाले एस्टिमेट- फेस्टिमेट नही जानते। बीस बाइस हजार का मामला है, निपटा दो” – उन्होंने कहा, हमने मान लिया। चाय मिली,

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और इसी समय और भी फरियादी आते रहे।

अगला फरियादी आया, पैर छुए। गमछा बताता था कि उनका समर्थक और पार्टी वर्कर है। छतीसगढ़ी में बाते हुई। फिर जरा नाराज से होकर बोले- मेरे से गलत काम करवाओगे???

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समर्थक ने दांत चियार दिए। पटेल साहब ने फोन उठाया। शायद कलेक्टर को लगाया था। हम एक तरफ की आवाज सुन सकते थे। उत्तर सुनकर वे बोले – अरे मैं भी समझता हूँ। लेकिन इतना भी गलत नही है। कार्यकर्ता है। करवा दीजिए, आप बोलेंगे तो हो जायेगा-

यूनाइटेड एमपी का एक्स होम मिनिस्टर, किसी कलेक्टर से “इसरार” कर रहा था।

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आगे सुनकर बोले- “अरे नही नही। वो ईमानदार आदमी है, नही करेगा। उसे डिस्टर्ब मत करो। कोई और आदमी हो तो बताओ… “

वो काम हुआ, या नही, मुझे नही पता। मगर यह बात बड़ी अच्छी लगी, की वे किसी ईमानदार आदमी को डिस्टर्ब नही करना चाहते थे। उससे उसकी इच्छा के विरुद्ध दबाव डालकर अनुचित काम नही करवाना चाहते थे।

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नेता की मजबूरियां होती हैं। राजनीति में कच्चा पक्का करना पड़ता है। मगर किसी ईमानदार अफसर की इज्जत करना, दरअसल उस नेता की शख़्सियत को बताता है।

दंगाइयों का बखूबी नियंत्रण करने वाले आईपीएस प्रभाकर चौधरी का मिनटों में ट्रांसफर बताता है कि अब नेता, ईमानदार अफसर को डिस्टर्ब करने से गुरेज नही करते।

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प्रभाकर चौधरी के करियर के 10 साल में 18 ट्रान्सफ़र बताते है कि नाइंसाफी का दौर काफी लम्बा खिंच गया है ।

दिन रात जागकर यूपीएससी की तैयारी करने वाले युवा जब सिस्टम में कुछ करना चाहते है, तो नेता की राजनीति में रोड़ा हो जाते हैं। जिस सिस्टम में टैलेंट और ईमानदारी को, बैलेंस लायक भी जगह न मिले, वो अन्याय औऱ अक्षमता का रक्षक हो जाता है।

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डबल इंजन की सरकारें, दरअसल दोधारी तलवारें हैं। इस सिस्टम को बैलेंस करने की आवश्यकता है। कम से कम दो में से एक तो गवर्मेन्ट ऐसी हो जिसमें कोई नेता कहे .. “अरे, वो ईमानदार आदमी है, उसे डिस्टर्ब मत करो”।


बिमल कुमार यादव-

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2010 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी प्रभाकर चौधरी के स्थानांतरण को लेकर बहस अभी खत्म नहीं हुई है, उनके पिता पारसनाथ चौधरी, जो उत्तर प्रदेश के एक स्थानीय भाजपा नेता हैं, अब एक वायरल वीडियो में आरोप लगा रहे हैं कि उनके आईपीएस बेटे प्रभाकर चौधरी का तबादला इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने बरेली को दंगे जैसी स्थिति से बचाया था।

यह स्थानांतरण श्री प्रभाकर चौधरी द्वारा 30 जुलाई को बरेली जिले में एक अनधिकृत मार्ग से धार्मिक जुलूस निकालने की इच्छा रखने वाले कांवरियों के एक समूह के खिलाफ कार्रवाई के कुछ घंटों बाद हुआ। दशकों तक भाजपा के पदाधिकारी रहे श्री पारसनाथ चौधरी ने कहा कि वह अब भाजपा का विरोध करेंगे और अपने गृह जिले अंबेडकर नगर के कम से कम दस से बीस गांवों में भगवा पार्टी को जीतने नहीं देंगे।

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