पिछले काफी दिनों से पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के गायब होने या करा दिए जाने जैसी बाते संपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लहरा रही थीं। अब इंडियन एक्सप्रेस ने रहस्योदघाटन किया है कि धनखड़ साहब कहीं गायब नहीं हुए बल्कि अपने लिए खरबों रुपये कीमत की जमीन पर शानदार आठ मंजिला कॉम्प्लैक्स बनवा रहे हैं। पढ़ें…
प्रशांत टंडन-
जगदीप धनखड़ की इंडियन एक्सप्रेस ने बरामदगी रिपोर्ट की है. वाइस प्रेसिडेंट इंक्लेव में टेबल टेनिस खेलते है और ओटीटी पर सीरीज़ देख रहे हैं.
जयपुर में एयरपोर्ट के करीब आठ मंजिल के दो कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनवा रहे हैं. उपराष्ट्रपति को रिटायर होने पर भी लुटियंस ज़ोन में आलीशान टाइप 7 बंगला मिलता है साथ में स्टाफ और पर्सनल सेक्रेटरी भी. ये सुविधा देश और समाज के काम के लिए मिलती हैं.
बिल्डर बन चुके धनखड़ को जनता के टैक्स के पैसों से ये सुविधाएं क्यों मिलनी चाहिए? जिसके कमर्शियल कॉम्लेक्स बन रहे हैं वो दिल्ली में मकान का किराया भी दे सकता है.
जितेंद्र कुमार-
जगदीप धनखड़ के उपर आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए…
आज के इंडियन एक्सप्रेस अखबार का एंकर स्टोरी पढ़िए. कोई महान स्टोरी नहीं है, बस सूचना भर है. लेकिन इससे आप यह जानकारी जरूर निकाल सकते है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से जबर्दस्ती इस्तीफा लिखा लिए जाने के बाद भी वह मौन क्यों हैं? या फिर जिस स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया (अगर उन्हीं के ट्विटर पर किए गए पोस्ट को सच माना जाय) तो उनके स्वास्थ्य से जुड़ी कोई बुलेटिन देश का स्वास्थ्य मंत्रालय अभी तक एक बार भी जारी क्यों नहीं किया है जबकि उनके इस्तीफा दिए जाने को एक महीना पांच दिन हो गया है.
आज के इंडियन एक्सप्रेस की खबर से पता चलता है कि जगदीप धनखड़ की बेटी और उनकी पत्नी के नाम से नामित जमीन पर, जो जयपुर एयरपोर्ट से 15 मिनट की दूरी से सटे सांगनेर रोड पर ‘कामना फार्महाउस’ के नाम से था और जो 3668 स्क्वैयर मीटर एग्रीकल्चर लैंड है, को कॉमर्सियल लैंड बनाकर आठ मंजिला मॉल बनाया जा रहा है. इस लैंड डीड को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने 10 अप्रैल 2023 को बदला था. उसी जमीन से सटी 3693 वर्ग मीटर की एक और एग्रीकल्चर लैंड थी और उसका भी डीड जेडीए ने 9 फरवरी 2024 को बदला है जिसपर भी मॉल बन रहा है.


अगर धनखड़ उपराष्ट्रपति न होते तो जेडीए कृषि भूमि को कॉमर्सियल भूमि में बदल देता? इस देश में इस बात पर कौन सवाल उठाएगा कि धनखड़ ने अपने पद का दुरुपयोग करके जमीन का डीड बदलवाकर खरबों रुपए बनाए हैं!
बीजेपी की एक खासियत यह भी है कि न सिर्फ वह अपने समर्थकों को लूट मचाने में मदद करती है बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी करती है कि उनके लोग और भ्रष्टाचार में आकंठ डूब जाएं. इससे बीजेपी को दोहरा लाभ होता है. भ्रष्टाचारी सहयोगियों का समर्थन मिलता रहता है और अगर वह बाहर निकलना चाहता है तो उनके ही किए भ्रष्टाचार का डर दिखाकर उन्हें अपने साथ बने रहने के लिए बाध्य कर दिया जाता है.
बीजेपी यह खेल अपने सभी सहयोगियों के साथ बड़ी ‘ईमानदारी’ से खेलती है. लेकिन बीजेपी के बाहर के लोग जो निजी तौर पर भ्रष्ट नहीं हैं, उनसे बीजेपी घबराती है. आप बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक का उदाहरण ले सकते हैं. ऐसा नहीं है कि वे दोनों बड़े भले व्यक्ति हैं/थे. बस ये दोनों उस स्तर के भ्रष्ट नहीं है जिस तरह के अन्य लोग हैं. यही कारण है कि सत्यपाल मलिक जी भरकर मोदी और शाह के खिलाफ आरोप लगाते रहे और वे ईडी को भेजने के अलावा कुछ नहीं कर सके! इसी तरह नीतीश कुमार का जब मन होता है, लतिया देता है, फिर भी बीजेपी उन्हें अपने साथ रखने को बाध्य होती है. वैसे अब नीतीश कुमार की घेरेबंदी उनके ईर्द-गिर्द के नौकरशाहों पर नकेल कस कर दिया गया है!
जगदीप धनखड़ पद का दुरुपयोग करके अरबों रुपए नाजायज ढ़ंग से बनाया है. उसकी जांच होनी चाहिए, जांच के बाद मुकदमा चलाया जाना चाहिए और इस तरह के भ्रष्ट आदमी को पूर्व राष्ट्रपति की हैसियत से मिलनेवाली सारी सुविधा से तत्काल वंचित किया जाना चाहिए, यहां तक कि राष्ट्र हित में उन्हें सरकारी आवास और कर्मचारी भी नहीं मिलना चाहिए.


